Ram Charita Manas

Ayodhya-Kanda

Shri Rama explaining to Laxman by praising the glory of Bharata.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने ॥ कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई ॥

Chapter : 37 Number : 242

जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई ॥ सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा ॥

Chapter : 37 Number : 242

Doha / दोहा

दो. भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ ॥ कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ ॥ २३१ ॥

Chapter : 37 Number : 243

Chaupai / चोपाई

तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई ॥ गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी ॥

Chapter : 37 Number : 243

मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई ॥ लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना ॥

Chapter : 37 Number : 243

सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता ॥ भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा ॥

Chapter : 37 Number : 243

गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी ॥ कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ ॥

Chapter : 37 Number : 243

Doha / दोहा

दो. सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु। सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु ॥ २३२ ॥

Chapter : 37 Number : 244

Chaupai / चोपाई

जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को ॥ कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा ॥

Chapter : 37 Number : 244

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