| |
|

This overlay will guide you through the buttons:

ॐ श्री गणेशाय नमः

सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने ॥ कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई ॥
जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई ॥ सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा ॥
दो. भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ ॥ कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ ॥ २३१ ॥
तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई ॥ गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी ॥
मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई ॥ लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना ॥
सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता ॥ भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा ॥
गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी ॥ कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ ॥
दो. सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु। सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु ॥ २३२ ॥
जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को ॥ कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा ॥

Add to Playlist

Practice Later

No Playlist Found

Create a Verse Post


Shloka QR Code

🔗

🪔 Powered by Gyaandweep.com

namo namaḥ!

भाषा चुने (Choose Language)

नमो नमः

Practice 100+ Vedic scriptures and 1000s of chants — one verse at a time.

Sign In