Ram Charita Manas

Ayodhya-Kanda

Kaikeyi's visit to Kopabhavan

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु। काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु ॥ २२ ॥

Chapter : 4 Number : 24

Chaupai / चोपाई

कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी ॥ तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कइ भइसि अधारा ॥

Chapter : 4 Number : 24

जौं बिधि पुरब मनोरथु काली। करौं तोहि चख पूतरि आली ॥ बहुबिधि चेरिहि आदरु देई। कोपभवन गवनि कैकेई ॥

Chapter : 4 Number : 24

बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी ॥ पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा ॥

Chapter : 4 Number : 24

कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई ॥ राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई ॥

Chapter : 4 Number : 24

Doha / दोहा

दो. प्रमुदित पुर नर नारि। सब सजहिं सुमंगलचार। एक प्रबिसहिं एक निर्गमहिं भीर भूप दरबार ॥ २३ ॥

Chapter : 4 Number : 25

Chaupai / चोपाई

बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं ॥ प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी ॥

Chapter : 4 Number : 25

फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई ॥ को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेह निबाहनिहारा।

Chapter : 4 Number : 25

जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं ॥ सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू ॥

Chapter : 4 Number : 25

अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू ॥ को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई ॥

Chapter : 4 Number : 25

Doha / दोहा

दो. साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ। गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ ॥ २४ ॥

Chapter : 4 Number : 26

Chaupai / चोपाई

कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ ॥ सुरपति बसइ बाहँबल जाके। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें ॥

Chapter : 4 Number : 26

सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई ॥ सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे ॥

Chapter : 4 Number : 26

सभय नरेसु प्रिया पहिं गयऊ। देखि दसा दुखु दारुन भयऊ ॥ भूमि सयन पटु मोट पुराना। दिए डारि तन भूषण नाना ॥

Chapter : 4 Number : 26

कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी ॥ जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी ॥

Chapter : 4 Number : 26

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