Ram Charita Manas

Bala-Kanda

Devatas pray to Shiva to get married, Saptarishis go to Parvati.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु । निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु ॥ ८८ ॥

Chapter : 25 Number : 96

Chaupai / चोपाई

यह उत्सव देखिअ भरि लोचन । सोइ कछु करहु मदन मद मोचन । कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा । कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा ॥

Chapter : 25 Number : 96

सासति करि पुनि करहिं पसाऊ । नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ ॥ पारबतीं तपु कीन्ह अपारा । करहु तासु अब अंगीकारा ॥

Chapter : 25 Number : 96

सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी । ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी ॥ तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं । बरषि सुमन जय जय सुर साई ॥

Chapter : 25 Number : 96

अवसरु जानि सप्तरिषि आए । तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए ॥ प्रथम गए जहँ रही भवानी । बोले मधुर बचन छल सानी ॥

Chapter : 25 Number : 96

Doha / दोहा

दो. कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस । अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस ॥ ८९ ॥

Chapter : 25 Number : 97

Chaupai / चोपाई

सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी । उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी ॥ तुम्हरें जान कामु अब जारा । अब लगि संभु रहे सबिकारा ॥

Chapter : 25 Number : 97

हमरें जान सदा सिव जोगी । अज अनवद्य अकाम अभोगी ॥ जौं मैं सिव सेये अस जानी । प्रीति समेत कर्म मन बानी ॥

Chapter : 25 Number : 97

तौ हमार पन सुनहु मुनीसा । करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा ॥ तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा । सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा ॥

Chapter : 25 Number : 97

तात अनल कर सहज सुभाऊ । हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ ॥ गएँ समीप सो अवसि नसाई । असि मन्मथ महेस की नाई ॥

Chapter : 25 Number : 97

Doha / दोहा

दो. हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास ॥ चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास ॥ ९० ॥

Chapter : 25 Number : 98

Chaupai / चोपाई

सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा । मदन दहन सुनि अति दुखु पावा ॥ बहुरि कहेउ रति कर बरदाना । सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना ॥

Chapter : 25 Number : 98

हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई । सादर मुनिबर लिए बोलाई ॥ सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई । बेगि बेदबिधि लगन धराई ॥

Chapter : 25 Number : 98

पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही । गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही ॥ जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती । बाचत प्रीति न हृदयँ समाती ॥

Chapter : 25 Number : 98

लगन बाचि अज सबहि सुनाई । हरषे मुनि सब सुर समुदाई ॥ सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे । मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे ॥

Chapter : 25 Number : 98

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