Ram Charita Manas

Aranyaka Kanda

Maa Sita getting kidnapped and laments over her decision.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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संस्कृत्म
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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

सून बीच दसकंधर देखा। आवा निकट जती कें बेषा ॥ जाकें डर सुर असुर डेराहीं। निसि न नीद दिन अन्न न खाहीं ॥

Chapter : 11 Number : 34

सो दससीस स्वान की नाई। इत उत चितइ चला भड़िहाई ॥ इमि कुपंथ पग देत खगेसा। रह न तेज बुधि बल लेसा ॥

Chapter : 11 Number : 34

नाना बिधि करि कथा सुहाई। राजनीति भय प्रीति देखाई ॥ कह सीता सुनु जती गोसाईं। बोलेहु बचन दुष्ट की नाईं ॥

Chapter : 11 Number : 34

तब रावन निज रूप देखावा। भई सभय जब नाम सुनावा ॥ कह सीता धरि धीरजु गाढ़ा। आइ गयउ प्रभु रहु खल ठाढ़ा ॥

Chapter : 11 Number : 34

जिमि हरिबधुहि छुद्र सस चाहा। भएसि कालबस निसिचर नाहा ॥ सुनत बचन दससीस रिसाना। मन महुँ चरन बंदि सुख माना ॥

Chapter : 11 Number : 34

Doha / दोहा

दो. क्रोधवंत तब रावन लीन्हिसि रथ बैठाइ। चला गगनपथ आतुर भयँ रथ हाँकि न जाइ ॥ २८ ॥

Chapter : 11 Number : 35

Chaupai / चोपाई

हा जग एक बीर रघुराया। केहिं अपराध बिसारेहु दाया ॥ आरति हरन सरन सुखदायक। हा रघुकुल सरोज दिननायक ॥

Chapter : 11 Number : 35

हा लछिमन तुम्हार नहिं दोसा। सो फलु पायउँ कीन्हेउँ रोसा ॥ बिबिध बिलाप करति बैदेही। भूरि कृपा प्रभु दूरि सनेही ॥

Chapter : 11 Number : 35

बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा ॥ सीता कै बिलाप सुनि भारी। भए चराचर जीव दुखारी ॥

Chapter : 11 Number : 35

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