Ram Charita Manas

Ayodhya-Kanda

Shri Bharat-Shatrughan leave for Chitrakoota along with some residents of Ayodhya

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. जरउ सो संपति सदन सुखु सुहद मातु पितु भाइ। सनमुख होत जो राम पद करै न सहस सहाइ ॥ १८५ ॥

Chapter : 29 Number : 195

Chaupai / चोपाई

घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना ॥ भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू ॥

Chapter : 29 Number : 195

संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही ॥ तौ परिनाम न मोरि भलाई। पाप सिरोमनि साइँ दोहाई ॥

Chapter : 29 Number : 195

करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई ॥ अस बिचारि सुचि सेवक बोले। जे सपनेहुँ निज धरम न डोले ॥

Chapter : 29 Number : 195

कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा ॥ करि सबु जतनु राखि रखवारे। राम मातु पहिं भरतु सिधारे ॥

Chapter : 29 Number : 195

Doha / दोहा

दो. आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान। कहेउ बनावन पालकीं सजन सुखासन जान ॥ १८६ ॥

Chapter : 29 Number : 196

Chaupai / चोपाई

चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी ॥ जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना ॥

Chapter : 29 Number : 196

कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू। बनहिं देब मुनि रामहिं राजू ॥ बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे। तुरत तुरग रथ नाग सँवारे ॥

Chapter : 29 Number : 196

अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ ॥ बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना ॥

Chapter : 29 Number : 196

नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना ॥ सिबिका सुभग न जाहिं बखानी। चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी ॥

Chapter : 29 Number : 196

Doha / दोहा

दो. सौंपि नगर सुचि सेवकनि सादर सकल चलाइ। सुमिरि राम सिय चरन तब चले भरत दोउ भाइ ॥ १८७ ॥

Chapter : 29 Number : 197

Chaupai / चोपाई

राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी ॥ बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं ॥

Chapter : 29 Number : 197

देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे ॥ जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली ॥

Chapter : 29 Number : 197

तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी ॥ तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू ॥

Chapter : 29 Number : 197

सिर धरि बचन चरन सिरु नाई। रथ चढ़ि चलत भए दोउ भाई ॥ तमसा प्रथम दिवस करि बासू। दूसर गोमति तीर निवासू ॥

Chapter : 29 Number : 197

Doha / दोहा

दो. पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग। करत राम हित नेम ब्रत परिहरि भूषन भोग ॥ १८८ ॥

Chapter : 29 Number : 198

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