Ram Charita Manas

Ayodhya-Kanda

Conversation between King Indra and King Brihaspati

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि। बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि ॥ २१७ ॥

Chapter : 34 Number : 228

Chaupai / चोपाई

बचन सुनत सुरगुरु मुसकाने। सहस्रनयन बिनु लोचन जाने ॥ मायापति सेवक सन माया। करइ त उलटि परइ सुरराया ॥

Chapter : 34 Number : 228

तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी ॥ सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ ॥

Chapter : 34 Number : 228

जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई ॥ लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा ॥

Chapter : 34 Number : 228

भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही ॥

Chapter : 34 Number : 228

Doha / दोहा

दो. मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत अकाजु। अजसु लोक परलोक दुख दिन दिन सोक समाजु ॥ २१८ ॥

Chapter : 34 Number : 229

Chaupai / चोपाई

सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा ॥ मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई ॥

Chapter : 34 Number : 229

जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू ॥ करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा ॥

Chapter : 34 Number : 229

तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा ॥ अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस ॥

Chapter : 34 Number : 229

राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी ॥ अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई ॥

Chapter : 34 Number : 229

Doha / दोहा

दो. राम भगत परहित निरत पर दुख दुखी दयाल। भगत सिरोमनि भरत तें जनि डरपहु सुरपाल ॥ २१९ ॥

Chapter : 34 Number : 230

Chaupai / चोपाई

सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी ॥ स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू ॥

Chapter : 34 Number : 230

सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी ॥ बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ ॥

Chapter : 34 Number : 230

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