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ॐ श्री गणेशाय नमः

सादर सिवहि नाइ अब माथा । बरनउँ बिसद राम गुन गाथा ॥ संबत सोरह सै एकतीसा । करउँ कथा हरि पद धरि सीसा ॥
नौमी भौम बार मधु मासा । अवधपुरीं यह चरित प्रकासा ॥ जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं । तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं ॥
असुर नाग खग नर मुनि देवा । आइ करहिं रघुनायक सेवा ॥ जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना । करहिं राम कल कीरति गाना ॥
दो. मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर । जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर ॥ ३४ ॥
दरस परस मज्जन अरु पाना । हरइ पाप कह बेद पुराना ॥ नदी पुनीत अमित महिमा अति । कहि न सकइ सारद बिमलमति ॥
राम धामदा पुरी सुहावनि । लोक समस्त बिदित अति पावनि ॥ चारि खानि जग जीव अपारा । अवध तजे तनु नहि संसारा ॥
सब बिधि पुरी मनोहर जानी । सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी ॥ बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा । सुनत नसाहिं काम मद दंभा ॥
रामचरितमानस एहि नामा । सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा ॥ मन करि विषय अनल बन जरई । होइ सुखी जौ एहिं सर परई ॥
रामचरितमानस मुनि भावन । बिरचेउ संभु सुहावन पावन ॥ त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन । कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन ॥
रचि महेस निज मानस राखा । पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा ॥ तातें रामचरितमानस बर । धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर ॥

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