Ram Charita Manas

Bala-Kanda

Conversation between Yajnavalkya and Bhardwaj, greatness of Prayag.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद । कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद ॥ ४३(ख) ॥

Chapter : 15 Number : 47

Chaupai / चोपाई

भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा । तिन्हहि राम पद अति अनुरागा ॥ तापस सम दम दया निधाना । परमारथ पथ परम सुजाना ॥

Chapter : 15 Number : 47

माघ मकरगत रबि जब होई । तीरथपतिहिं आव सब कोई ॥ देव दनुज किंनर नर श्रेनी । सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं ॥

Chapter : 15 Number : 47

पूजहि माधव पद जलजाता । परसि अखय बटु हरषहिं गाता ॥ भरद्वाज आश्रम अति पावन । परम रम्य मुनिबर मन भावन ॥

Chapter : 15 Number : 47

तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा । जाहिं जे मज्जन तीरथराजा ॥ मज्जहिं प्रात समेत उछाहा । कहहिं परसपर हरि गुन गाहा ॥

Chapter : 15 Number : 47

Doha / दोहा

दो. ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग । कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग ॥ ४४ ॥

Chapter : 15 Number : 48

Chaupai / चोपाई

एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं । पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं ॥ प्रति संबत अति होइ अनंदा । मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा ॥

Chapter : 15 Number : 48

एक बार भरि मकर नहाए । सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए ॥ जगबालिक मुनि परम बिबेकी । भरव्दाज राखे पद टेकी ॥

Chapter : 15 Number : 48

सादर चरन सरोज पखारे । अति पुनीत आसन बैठारे ॥ करि पूजा मुनि सुजस बखानी । बोले अति पुनीत मृदु बानी ॥

Chapter : 15 Number : 48

नाथ एक संसउ बड़ मोरें । करगत बेदतत्व सबु तोरें ॥ कहत सो मोहि लागत भय लाजा । जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा ॥

Chapter : 15 Number : 48

Doha / दोहा

दो. संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव । होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव ॥ ४५ ॥

Chapter : 15 Number : 49

Chaupai / चोपाई

अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू । हरहु नाथ करि जन पर छोहू ॥ रास नाम कर अमित प्रभावा । संत पुरान उपनिषद गावा ॥

Chapter : 15 Number : 49

संतत जपत संभु अबिनासी । सिव भगवान ग्यान गुन रासी ॥ आकर चारि जीव जग अहहीं । कासीं मरत परम पद लहहीं ॥

Chapter : 15 Number : 49

सोऽपि राम महिमा मुनिराया । सिव उपदेसु करत करि दाया ॥ रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही । कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही ॥

Chapter : 15 Number : 49

एक राम अवधेस कुमारा । तिन्ह कर चरित बिदित संसारा ॥ नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा । भयहु रोषु रन रावनु मारा ॥

Chapter : 15 Number : 49

Doha / दोहा

दो. प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि । सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि ॥ ४६ ॥

Chapter : 15 Number : 50

Chaupai / चोपाई

जैसे मिटै मोर भ्रम भारी । कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी ॥ जागबलिक बोले मुसुकाई । तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई ॥

Chapter : 15 Number : 50

राममगत तुम्ह मन क्रम बानी । चतुराई तुम्हारी मैं जानी ॥ चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा । कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा ॥

Chapter : 15 Number : 50

तात सुनहु सादर मनु लाई । कहउँ राम कै कथा सुहाई ॥ महामोहु महिषेसु बिसाला । रामकथा कालिका कराला ॥

Chapter : 15 Number : 50

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