Ram Charita Manas

Bala-Kanda

Vishwamitra demands Ram-Laxman from King Dashrath to teach them at his Gurukul, Tadka getting killed.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

प्रातकाल उठि कै रघुनाथा । मातु पिता गुरु नावहिं माथा ॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा । देखि चरित हरषइ मन राजा ॥

Chapter : 39 Number : 225

Doha / दोहा

दो. ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप । भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप ॥ २०५ ॥

Chapter : 39 Number : 226

Chaupai / चोपाई

यह सब चरित कहा मैं गाई । आगिलि कथा सुनहु मन लाई ॥ बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी । बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी ॥

Chapter : 39 Number : 226

जहँ जप जग्य मुनि करही । अति मारीच सुबाहुहि डरहीं ॥ देखत जग्य निसाचर धावहि । करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं ॥

Chapter : 39 Number : 226

गाधितनय मन चिंता ब्यापी । हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी ॥ तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा । प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा ॥

Chapter : 39 Number : 226

एहुँ मिस देखौं पद जाई । करि बिनती आनौ दोउ भाई ॥ ग्यान बिराग सकल गुन अयना । सो प्रभु मै देखब भरि नयना ॥

Chapter : 39 Number : 226

Doha / दोहा

दो. बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार । करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार ॥ २०६ ॥

Chapter : 39 Number : 227

Chaupai / चोपाई

मुनि आगमन सुना जब राजा । मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा ॥ करि दंडवत मुनिहि सनमानी । निज आसन बैठारेन्हि आनी ॥

Chapter : 39 Number : 227

चरन पखारि कीन्हि अति पूजा । मो सम आजु धन्य नहिं दूजा ॥ बिबिध भाँति भोजन करवावा । मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा ॥

Chapter : 39 Number : 227

पुनि चरननि मेले सुत चारी । राम देखि मुनि देह बिसारी ॥ भए मगन देखत मुख सोभा । जनु चकोर पूरन ससि लोभा ॥

Chapter : 39 Number : 227

तब मन हरषि बचन कह राऊ । मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ ॥ केहि कारन आगमन तुम्हारा । कहहु सो करत न लावउँ बारा ॥

Chapter : 39 Number : 227

असुर समूह सतावहिं मोही । मै जाचन आयउँ नृप तोही ॥ अनुज समेत देहु रघुनाथा । निसिचर बध मैं होब सनाथा ॥

Chapter : 39 Number : 227

Doha / दोहा

दो. देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान । धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान ॥ २०७ ॥

Chapter : 39 Number : 228

Chaupai / चोपाई

सुनि राजा अति अप्रिय बानी । हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी ॥ चौथेंपन पायउँ सुत चारी । बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी ॥

Chapter : 39 Number : 228

मागहु भूमि धेनु धन कोसा । सर्बस देउँ आजु सहरोसा ॥ देह प्रान तें प्रिय कछु नाही । सोउ मुनि देउँ निमिष एक माही ॥

Chapter : 39 Number : 228

सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं । राम देत नहिं बनइ गोसाई ॥ कहँ निसिचर अति घोर कठोरा । कहँ सुंदर सुत परम किसोरा ॥

Chapter : 39 Number : 228

सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी । हृदयँ हरष माना मुनि ग्यानी ॥ तब बसिष्ट बहु निधि समुझावा । नृप संदेह नास कहँ पावा ॥

Chapter : 39 Number : 228

अति आदर दोउ तनय बोलाए । हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए ॥ मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ । तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ ॥

Chapter : 39 Number : 228

Doha / दोहा

दो. सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस । जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस ॥ २०८(क) ॥

Chapter : 39 Number : 229

Sortha/ सोरठा

सो. पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन ॥ कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन ॥ २०८(ख)

Chapter : 39 Number : 229

Chaupai / चोपाई

अरुन नयन उर बाहु बिसाला । नील जलज तनु स्याम तमाला ॥ कटि पट पीत कसें बर भाथा । रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा ॥

Chapter : 39 Number : 229

स्याम गौर सुंदर दोउ भाई । बिस्बामित्र महानिधि पाई ॥ प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना । मोहि निति पिता तजेहु भगवाना ॥

Chapter : 39 Number : 229

चले जात मुनि दीन्हि दिखाई । सुनि ताड़का क्रोध करि धाई ॥ एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा । दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा ॥

Chapter : 39 Number : 229

तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही । बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही ॥ जाते लाग न छुधा पिपासा । अतुलित बल तनु तेज प्रकासा ॥

Chapter : 39 Number : 229

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