Ram Charita Manas

Bala-Kanda

The glory of hearing and singing Shri Ramcharit Manas.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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संस्कृत्म
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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु । जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु ॥ ३६० ॥

Chapter : 58 Number : 316

Chaupai / चोपाई

बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी । बहुरि गाधिसुत कथा बखानी ॥ सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ । बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ ॥

Chapter : 58 Number : 316

बहुरे लोग रजायसु भयऊ । सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ ॥ जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा । सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा ॥

Chapter : 58 Number : 316

आए ब्याहि रामु घर जब तें । बसइ अनंद अवध सब तब तें ॥ प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू । सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू ॥

Chapter : 58 Number : 316

कबिकुल जीवनु पावन जानी ॥ राम सीय जसु मंगल खानी ॥ तेहि ते मैं कछु कहा बखानी । करन पुनीत हेतु निज बानी ॥

Chapter : 58 Number : 316

Chanda / छन्द

छं. निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसी कह्यो । रघुबीर चरित अपार बारिधि पारु कबि कौनें लह्यो ॥ उपबीत ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं । बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्बदा सुखु पावहीं ॥

Chapter : 58 Number : 317

Sortha/ सोरठा

सो. सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं । तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु ॥ ३६१ ॥

Chapter : 58 Number : 318

Ram Charita Manas Ends / राम चरित मानस सम्पूर्णम्

इति श्रीमद्रामचरितमानसे सकलकलिकलुषबिध्वंसने प्रथमः सोपानः समाप्तः ।

Chapter : 58 Number : 319

Ram Charita Manas Ends / राम चरित मानस

प्रथमः सोपानः समाप्तः । (बालकाण्ड समाप्त)

Chapter : 58 Number : 319

(बालकाण्ड समाप्त)

Chapter : 58 Number : 319

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