Ram Charita Manas

Kishkinda Kanda

War between Bali and Sugriva, Bali understandthe reason of his death, Bali's wife Tara Laments.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

कोसलेस सुत लछिमन रामा। कालहु जीति सकहिं संग्रामा ॥

Chapter : 5 Number : 8

Doha / दोहा

दो. कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ। जौं कदाचि मोहि मारहिं तौ पुनि होउँ सनाथ ॥ ७ ॥

Chapter : 5 Number : 9

Chaupai / चोपाई

अस कहि चला महा अभिमानी। तृन समान सुग्रीवहि जानी ॥ भिरे उभौ बाली अति तर्जा । मुठिका मारि महाधुनि गर्जा ॥

Chapter : 5 Number : 9

तब सुग्रीव बिकल होइ भागा। मुष्टि प्रहार बज्र सम लागा ॥ मैं जो कहा रघुबीर कृपाला। बंधु न होइ मोर यह काला ॥

Chapter : 5 Number : 9

एकरूप तुम्ह भ्राता दोऊ। तेहि भ्रम तें नहिं मारेउँ सोऊ ॥ कर परसा सुग्रीव सरीरा। तनु भा कुलिस गई सब पीरा ॥

Chapter : 5 Number : 9

मेली कंठ सुमन कै माला। पठवा पुनि बल देइ बिसाला ॥ पुनि नाना बिधि भई लराई। बिटप ओट देखहिं रघुराई ॥

Chapter : 5 Number : 9

Doha / दोहा

दो. बहु छल बल सुग्रीव कर हियँ हारा भय मानि। मारा बालि राम तब हृदय माझ सर तानि ॥ ८ ॥

Chapter : 5 Number : 10

Chaupai / चोपाई

परा बिकल महि सर के लागें। पुनि उठि बैठ देखि प्रभु आगें ॥ स्याम गात सिर जटा बनाएँ। अरुन नयन सर चाप चढ़ाएँ ॥

Chapter : 5 Number : 10

पुनि पुनि चितइ चरन चित दीन्हा। सुफल जन्म माना प्रभु चीन्हा ॥ हृदयँ प्रीति मुख बचन कठोरा। बोला चितइ राम की ओरा ॥

Chapter : 5 Number : 10

धर्म हेतु अवतरेहु गोसाई। मारेहु मोहि ब्याध की नाई ॥ मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कबन नाथ मोहि मारा ॥

Chapter : 5 Number : 10

अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी ॥ इन्हहि कुद्दष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई ॥

Chapter : 5 Number : 10

मुढ़ तोहि अतिसय अभिमाना। नारि सिखावन करसि न काना ॥ मम भुज बल आश्रित तेहि जानी। मारा चहसि अधम अभिमानी ॥

Chapter : 5 Number : 10

Doha / दोहा

दो. सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि। प्रभु अजहूँ मैं पापी अंतकाल गति तोरि ॥ ९ ॥

Chapter : 5 Number : 11

Chaupai / चोपाई

सुनत राम अति कोमल बानी। बालि सीस परसेउ निज पानी ॥ अचल करौं तनु राखहु प्राना। बालि कहा सुनु कृपानिधाना ॥

Chapter : 5 Number : 11

जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं। अंत राम कहि आवत नाहीं ॥ जासु नाम बल संकर कासी। देत सबहि सम गति अविनासी ॥

Chapter : 5 Number : 11

मम लोचन गोचर सोइ आवा। बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा ॥

Chapter : 5 Number : 11

Chanda / छन्द

छं. सो नयन गोचर जासु गुन नित नेति कहि श्रुति गावहीं। जिति पवन मन गो निरस करि मुनि ध्यान कबहुँक पावहीं ॥

Chapter : 5 Number : 12

मोहि जानि अति अभिमान बस प्रभु कहेउ राखु सरीरही। अस कवन सठ हठि काटि सुरतरु बारि करिहि बबूरही ॥ १ ॥

Chapter : 5 Number : 12

अब नाथ करि करुना बिलोकहु देहु जो बर मागऊँ। जेहिं जोनि जन्मौं कर्म बस तहँ राम पद अनुरागऊँ ॥

Chapter : 5 Number : 12

यह तनय मम सम बिनय बल कल्यानप्रद प्रभु लीजिऐ। गहि बाहँ सुर नर नाह आपन दास अंगद कीजिऐ ॥ २ ॥

Chapter : 5 Number : 12

Doha / दोहा

दो. राम चरन दृढ़ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग। सुमन माल जिमि कंठ ते गिरत न जानइ नाग ॥ १० ॥

Chapter : 5 Number : 13

Chaupai / चोपाई

राम बालि निज धाम पठावा। नगर लोग सब ब्याकुल धावा ॥ नाना बिधि बिलाप कर तारा। छूटे केस न देह सँभारा ॥

Chapter : 5 Number : 13

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