Ram Charita Manas

Lanka-Kanda

Hanuman fainting from Bharat's arrow, dialogue between King Bharat and Hanuman.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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संस्कृत्म
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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha/ दोहा

दो. देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि। बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि ॥ ५८ ॥

Chapter : 15 Number : 62

Chaupai / चोपाई

परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक ॥ सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए ॥

Chapter : 15 Number : 62

बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा ॥ मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी ॥

Chapter : 15 Number : 62

जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा ॥ जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया ॥

Chapter : 15 Number : 62

तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला ॥ सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा ॥

Chapter : 15 Number : 62

Sortha/ सोरठा

सो. लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल। प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक ॥ ५९ ॥

Chapter : 15 Number : 63

Chaupai / चोपाई

तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी ॥ कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने ॥

Chapter : 15 Number : 63

अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ ॥ जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा ॥

Chapter : 15 Number : 63

तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता ॥ चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता ॥

Chapter : 15 Number : 63

सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना ॥ राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी ॥

Chapter : 15 Number : 63

Doha/ दोहा

दो. तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत। अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत ॥ ६०(क) ॥

Chapter : 15 Number : 64

भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार। मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार ॥ ६०(ख) ॥

Chapter : 15 Number : 64

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