Ram Charita Manas

Lanka-Kanda

Destruction of Meghnad's Yajna of Nikumbala Devi, his war with laxmana , and Meghnad's liberation after laxmana kills him.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी ॥ तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा ॥

Chapter : 20 Number : 79

इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा ॥ मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन ॥

Chapter : 20 Number : 79

जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि ॥ सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना ॥

Chapter : 20 Number : 79

लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई ॥ तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही ॥

Chapter : 20 Number : 79

मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई ॥ जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन ॥

Chapter : 20 Number : 79

जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन ॥ प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा ॥

Chapter : 20 Number : 79

जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं ॥ जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई ॥

Chapter : 20 Number : 79

Doha/ दोहा

दो. रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत। अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत ॥ ७५ ॥

Chapter : 20 Number : 80

Chaupai / चोपाई

जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा ॥ कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा ॥

Chapter : 20 Number : 80

तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई ॥ लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे ॥

Chapter : 20 Number : 80

आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा ॥ कोऽपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए ॥

Chapter : 20 Number : 80

प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा ॥ उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोऽपि तेहि घाउ न बाजा ॥

Chapter : 20 Number : 80

फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा ॥ आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला ॥

Chapter : 20 Number : 80

देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना ॥ बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई ॥

Chapter : 20 Number : 80

देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा ॥ लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा ॥

Chapter : 20 Number : 80

सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा ॥ छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा ॥

Chapter : 20 Number : 80

Doha/ दोहा

दो. रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान। धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान ॥ ७६ ॥

Chapter : 20 Number : 81

Chaupai / चोपाई

बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो ॥ तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा । चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा ।।

Chapter : 20 Number : 81

बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं ॥ जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा ॥

Chapter : 20 Number : 81

अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए ॥ सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं ॥

Chapter : 20 Number : 81

मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी ॥ नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा ॥

Chapter : 20 Number : 81

Doha/ दोहा

दो. तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि। नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि ॥ ७७ ॥

Chapter : 20 Number : 82

Chaupai / चोपाई

तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन ॥ पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे ॥

Chapter : 20 Number : 82

निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा ॥ सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला ॥

Chapter : 20 Number : 82

सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई ॥ निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा ॥

Chapter : 20 Number : 82

अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा ॥ चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली ॥

Chapter : 20 Number : 82

असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला ॥

Chapter : 20 Number : 82

Chanda / छन्द

छं. अति गर्ब गनइ न सगुन असगुन स्त्रवहिं आयुध हाथ ते। भट गिरत रथ ते बाजि गज चिक्करत भाजहिं साथ ते ॥ गोमाय गीध कराल खर रव स्वान बोलहिं अति घने। जनु कालदूत उलूक बोलहिं बचन परम भयावने ॥

Chapter : 20 Number : 83

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