Ram Charita Manas

Lanka-Kanda

Mandodari again convincing Ravana to stop the imminent war by giving back Maa Sita.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha/ दोहा

साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ ॥ ३५ (ख) ॥

Chapter : 9 Number : 37

Chaupai / चोपाई

कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही ॥ रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई ॥

Chapter : 9 Number : 37

पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा ॥ कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका ॥

Chapter : 9 Number : 37

रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा ॥ जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा ॥

Chapter : 9 Number : 37

अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु ॥ पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु ॥

Chapter : 9 Number : 37

बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा ॥ जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला ॥

Chapter : 9 Number : 37

भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही ॥ सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा ॥

Chapter : 9 Number : 37

सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी ॥

Chapter : 9 Number : 37

Doha/ दोहा

दो. बधि बिराध खर दूषनहि लीँलाँ हत्यो कबंध। बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध ॥ ३६ ॥

Chapter : 9 Number : 38

Chaupai / चोपाई

जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला ॥ कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू ॥

Chapter : 9 Number : 38

सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा ॥ अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके ॥

Chapter : 9 Number : 38

तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू ॥ अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा ॥

Chapter : 9 Number : 38

काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा ॥ निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं ॥

Chapter : 9 Number : 38

Doha/ दोहा

दो. दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु। कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु ॥ ३७ ॥

Chapter : 9 Number : 39

Chaupai / चोपाई

नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना ॥ बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली ॥

Chapter : 9 Number : 39

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