Ram Charita Manas

Sundara-Kanda

Ravana discussion with Mandodari about the imminent war.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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संस्कृत्म
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ॐ श्री गणेशाय नमः

Chaupai / चोपाई

उहाँ निसाचर रहहिं ससंका । जब ते जारि गयउ कपि लंका ॥ निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा । नहिं निसिचर कुल केर उबारा ॥

Chapter : 14 Number : 38

जासु दूत बल बरनि न जाई । तेहि आएँ पुर कवन भलाई ॥ दूतन्हि सन सुनि पुरजन बानी । मंदोदरी अधिक अकुलानी ॥

Chapter : 14 Number : 38

रहसि जोरि कर पति पग लागी । बोली बचन नीति रस पागी ॥ कंत करष हरि सन परिहरहू । मोर कहा अति हित हियँ धरहु ॥

Chapter : 14 Number : 38

समुझत जासु दूत कइ करनी । स्त्रवहीं गर्भ रजनीचर धरनी ॥ तासु नारि निज सचिव बोलाई । पठवहु कंत जो चहहु भलाई ॥

Chapter : 14 Number : 38

तब कुल कमल बिपिन दुखदाई । सीता सीत निसा सम आई ॥ सुनहु नाथ सीता बिनु दीन्हें । हित न तुम्हार संभु अज कीन्हें ॥

Chapter : 14 Number : 38

Doha / दोहा

दो. -राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक । जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक ॥ ३६ ॥

Chapter : 14 Number : 39

Chaupai / चोपाई

श्रवन सुनी सठ ता करि बानी । बिहसा जगत बिदित अभिमानी ॥ सभय सुभाउ नारि कर साचा । मंगल महुँ भय मन अति काचा ॥

Chapter : 14 Number : 39

जौं आवइ मर्कट कटकाई । जिअहिं बिचारे निसिचर खाई ॥ कंपहिं लोकप जाकी त्रासा । तासु नारि सभीत बड़ि हासा ॥

Chapter : 14 Number : 39

अस कहि बिहसि ताहि उर लाई । चलेउ सभाँ ममता अधिकाई ॥ मंदोदरी हृदयँ कर चिंता । भयउ कंत पर बिधि बिपरीता ॥

Chapter : 14 Number : 39

बैठेउ सभाँ खबरि असि पाई । सिंधु पार सेना सब आई ॥ बूझेसि सचिव उचित मत कहहू । ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ॥

Chapter : 14 Number : 39

जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं । नर बानर केहि लेखे माही ॥

Chapter : 14 Number : 39

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