Ram Charita Manas

Sundara-Kanda

Maa Sita conversation with her caretaker Trijata.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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संस्कृत्म
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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच । मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच ॥ ११ ॥

Chapter : 6 Number : 13

Chaupai / चोपाई

त्रिजटा सन बोली कर जोरी । मातु बिपति संगिनि तैं मोरी ॥ तजौं देह करु बेगि उपाई । दुसहु बिरहु अब नहिं सहि जाई ॥

Chapter : 6 Number : 13

आनि काठ रचु चिता बनाई । मातु अनल पुनि देहि लगाई ॥ सत्य करहि मम प्रीति सयानी । सुनै को श्रवन सूल सम बानी ॥

Chapter : 6 Number : 13

सुनत बचन पद गहि समुझाएसि । प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि ॥ निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी । अस कहि सो निज भवन सिधारी ॥

Chapter : 6 Number : 13

कह सीता बिधि भा प्रतिकूला । मिलहि न पावक मिटिहि न सूला ॥ देखिअत प्रगट गगन अंगारा । अवनि न आवत एकउ तारा ॥

Chapter : 6 Number : 13

पावकमय ससि स्त्रवत न आगी । मानहुँ मोहि जानि हतभागी ॥ सुनहि बिनय मम बिटप असोका । सत्य नाम करु हरु मम सोका ॥

Chapter : 6 Number : 13

नूतन किसलय अनल समाना । देहि अगिनि जनि करहि निदाना ॥ देखि परम बिरहाकुल सीता । सो छन कपिहि कलप सम बीता ॥

Chapter : 6 Number : 13

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