Ram Charita Manas

Sundara-Kanda

Hanuman's conversation with ravana.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद । सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद ॥ २० ॥

Chapter : 9 Number : 22

Chaupai / चोपाई

कह लंकेस कवन तैं कीसा । केहिं के बल घालेहि बन खीसा ॥ की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही । देखउँ अति असंक सठ तोही ॥

Chapter : 9 Number : 22

मारे निसिचर केहिं अपराधा । कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा ॥ सुन रावन ब्रह्मांड निकाया । पाइ जासु बल बिरचित माया ॥

Chapter : 9 Number : 22

जाकें बल बिरंचि हरि ईसा । पालत सृजत हरत दससीसा । जा बल सीस धरत सहसानन । अंडकोस समेत गिरि कानन ॥

Chapter : 9 Number : 22

धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता । तुम्ह ते सठन्ह सिखावनु दाता । हर कोदंड कठिन जेहि भंजा । तेहि समेत नृप दल मद गंजा ॥

Chapter : 9 Number : 22

खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली । बधे सकल अतुलित बलसाली ॥

Chapter : 9 Number : 22

Doha / दोहा

दो. जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि । तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि ॥ २१ ॥

Chapter : 9 Number : 23

Chaupai / चोपाई

जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई । सहसबाहु सन परी लराई ॥ समर बालि सन करि जसु पावा । सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा ॥

Chapter : 9 Number : 23

खायउँ फल प्रभु लागी भूँखा । कपि सुभाव तें तोरेउँ रूखा ॥ सब कें देह परम प्रिय स्वामी । मारहिं मोहि कुमारग गामी ॥

Chapter : 9 Number : 23

जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे । तेहि पर बाँधेउ तनयँ तुम्हारे ॥ मोहि न कछु बाँधे कइ लाजा । कीन्ह चहउँ निज प्रभु कर काजा ॥

Chapter : 9 Number : 23

बिनती करउँ जोरि कर रावन । सुनहु मान तजि मोर सिखावन ॥ देखहु तुम्ह निज कुलहि बिचारी । भ्रम तजि भजहु भगत भय हारी ॥

Chapter : 9 Number : 23

जाकें डर अति काल डेराई । जो सुर असुर चराचर खाई ॥ तासों बयरु कबहुँ नहिं कीजै । मोरे कहें जानकी दीजै ॥

Chapter : 9 Number : 23

Doha / दोहा

दो. प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि । गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि ॥ २२ ॥

Chapter : 9 Number : 24

Chaupai / चोपाई

राम चरन पंकज उर धरहू । लंका अचल राज तुम्ह करहू ॥ रिषि पुलिस्त जसु बिमल मंयका । तेहि ससि महुँ जनि होहु कलंका ॥

Chapter : 9 Number : 24

राम नाम बिनु गिरा न सोहा । देखु बिचारि त्यागि मद मोहा ॥ बसन हीन नहिं सोह सुरारी । सब भूषण भूषित बर नारी ॥

Chapter : 9 Number : 24

राम बिमुख संपति प्रभुताई । जाइ रही पाई बिनु पाई ॥ सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं । बरषि गए पुनि तबहिं सुखाहीं ॥

Chapter : 9 Number : 24

सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी । बिमुख राम त्राता नहिं कोपी ॥ संकर सहस बिष्नु अज तोही । सकहिं न राखि राम कर द्रोही ॥

Chapter : 9 Number : 24

Doha / दोहा

दो. मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम अभिमान । भजहु राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान ॥ २३ ॥

Chapter : 9 Number : 25

Chaupai / चोपाई

जदपि कहि कपि अति हित बानी । भगति बिबेक बिरति नय सानी ॥ बोला बिहसि महा अभिमानी । मिला हमहि कपि गुर बड़ ग्यानी ॥

Chapter : 9 Number : 25

मृत्यु निकट आई खल तोही । लागेसि अधम सिखावन मोही ॥ उलटा होइहि कह हनुमाना । मतिभ्रम तोर प्रगट मैं जाना ॥

Chapter : 9 Number : 25

सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना । बेगि न हरहुँ मूढ़ कर प्राना ॥ सुनत निसाचर मारन धाए । सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए ।

Chapter : 9 Number : 25

नाइ सीस करि बिनय बहूता । नीति बिरोध न मारिअ दूता ॥ आन दंड कछु करिअ गोसाँई । सबहीं कहा मंत्र भल भाई ॥

Chapter : 9 Number : 25

सुनत बिहसि बोला दसकंधर । अंग भंग करि पठइअ बंदर ॥

Chapter : 9 Number : 25

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