Ram Charita Manas

Uttara Kanda

Welcome of Shri Rama, Bharat Milap. Everyone in ayodhya celebrates with joy.

ॐ श्री परमात्मने नमः


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ॐ श्री गणेशाय नमः

Doha / दोहा

दो. आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान । नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान ॥ ४(क) ॥

Chapter : 3 Number : 7

उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि तुम्ह कुबेर पहिं जाहु । प्रेरित राम चलेउ सो हरषु बिरहु अति ताहु ॥ ४(ख) ॥

Chapter : 3 Number : 7

Chaupai / चोपाई

आए भरत संग सब लोगा। कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा ॥ बामदेव बसिष्ठ मुनिनायक। देखे प्रभु महि धरि धनु सायक ॥

Chapter : 3 Number : 7

धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह ॥ भेंटि कुसल बूझी मुनिराया। हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया ॥

Chapter : 3 Number : 7

सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा। धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा ॥ गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज। नमत जिन्हहि सुर मुनि संकर अज ॥

Chapter : 3 Number : 7

परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए ॥ स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े ॥

Chapter : 3 Number : 7

Chanda / छन्द

छं. राजीव लोचन स्त्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी । अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी ॥

Chapter : 3 Number : 8

प्रभु मिलत अनुजहि सोह मो पहिं जाति नहिं उपमा कही । जनु प्रेम अरु सिंगार तनु धरि मिले बर सुषमा लही ॥ १ ॥

Chapter : 3 Number : 8

बूझत कृपानिधि कुसल भरतहि बचन बेगि न आवई । सुनु सिवा सो सुख बचन मन ते भिन्न जान जो पावई ॥

Chapter : 3 Number : 8

अब कुसल कौसलनाथ आरत जानि जन दरसन दियो । बूड़त बिरह बारीस कृपानिधान मोहि कर गहि लियो ॥ २ ॥

Chapter : 3 Number : 8

Doha / दोहा

दो. पुनि प्रभु हरषि सत्रुहन भेंटे हृदयँ लगाइ । लछिमन भरत मिले तब परम प्रेम दोउ भाइ ॥ ५ ॥

Chapter : 3 Number : 9

Chaupai / चोपाई

भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे ॥ सीता चरन भरत सिरु नावा। अनुज समेत परम सुख पावा ॥

Chapter : 3 Number : 9

प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित बियोग बिपति सब नासी ॥ प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी ॥

Chapter : 3 Number : 9

अमित रूप प्रगटे तेहि काला। जथाजोग मिले सबहि कृपाला ॥ कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी। किए सकल नर नारि बिसोकी ॥

Chapter : 3 Number : 9

छन महिं सबहि मिले भगवाना। उमा मरम यह काहुँ न जाना ॥ एहि बिधि सबहि सुखी करि रामा। आगें चले सील गुन धामा ॥

Chapter : 3 Number : 9

कौसल्यादि मातु सब धाई। निरखि बच्छ जनु धेनु लवाई ॥

Chapter : 3 Number : 9

Chanda / छन्द

छं. जनु धेनु बालक बच्छ तजि गृहँ चरन बन परबस गईं । दिन अंत पुर रुख स्त्रवत थन हुंकार करि धावत भई ॥

Chapter : 3 Number : 10

अति प्रेम सब मातु भेटीं बचन मृदु बहुबिधि कहे । गइ बिषम बियोग भव तिन्ह हरष सुख अगनित लहे ॥

Chapter : 3 Number : 10

Doha / दोहा

दो. भेटेउ तनय सुमित्राँ राम चरन रति जानि । रामहि मिलत कैकेई हृदयँ बहुत सकुचानि ॥ ६(क) ॥

Chapter : 3 Number : 11

लछिमन सब मातन्ह मिलि हरषे आसिष पाइ । कैकेइ कहँ पुनि पुनि मिले मन कर छोभु न जाइ ॥ ६ ॥

Chapter : 3 Number : 11

Chaupai / चोपाई

सासुन्ह सबनि मिली बैदेही। चरनन्हि लागि हरषु अति तेही ॥ देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता ॥

Chapter : 3 Number : 11

सब रघुपति मुख कमल बिलोकहिं। मंगल जानि नयन जल रोकहिं ॥ कनक थार आरति उतारहिं। बार बार प्रभु गात निहारहिं ॥

Chapter : 3 Number : 11

नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं ॥ कौसल्या पुनि पुनि रघुबीरहि। चितवति कृपासिंधु रनधीरहि ॥

Chapter : 3 Number : 11

हृदयँ बिचारति बारहिं बारा। कवन भाँति लंकापति मारा ॥ अति सुकुमार जुगल मेरे बारे। निसिचर सुभट महाबल भारे ॥

Chapter : 3 Number : 11

Doha / दोहा

दो. लछिमन अरु सीता सहित प्रभुहि बिलोकति मातु । परमानंद मगन मन पुनि पुनि पुलकित गातु ॥ ७ ॥

Chapter : 3 Number : 12

Chaupai / चोपाई

लंकापति कपीस नल नीला। जामवंत अंगद सुभसीला ॥ हनुमदादि सब बानर बीरा। धरे मनोहर मनुज सरीरा ॥

Chapter : 3 Number : 12

भरत सनेह सील ब्रत नेमा। सादर सब बरनहिं अति प्रेमा ॥ देखि नगरबासिंह कै रीती। सकल सराहहि प्रभु पद प्रीती ॥

Chapter : 3 Number : 12

पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए ॥ गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे ॥

Chapter : 3 Number : 12

ए सब सखा सुनहु मुनि मेरे। भए समर सागर कहँ बेरे ॥ मम हित लागि जन्म इन्ह हारे। भरतहु ते मोहि अधिक पिआरे ॥

Chapter : 3 Number : 12

सुनि प्रभु बचन मगन सब भए। निमिष निमिष उपजत सुख नए ॥

Chapter : 3 Number : 12

Doha / दोहा

दो. कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ ॥ आसिष दीन्हे हरषि तुम्ह प्रिय मम जिमि रघुनाथ ॥ ८(क) ॥

Chapter : 3 Number : 13

सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद । चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद ॥ ८(ख) ॥

Chapter : 3 Number : 13

Chaupai / चोपाई

कंचन कलस बिचित्र सँवारे। सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे ॥ बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू ॥

Chapter : 3 Number : 13

बीथीं सकल सुगंध सिंचाई। गजमनि रचि बहु चौक पुराई ॥ नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे ॥

Chapter : 3 Number : 13

जहँ तहँ नारि निछावर करहीं। देहिं असीस हरष उर भरहीं ॥ कंचन थार आरती नाना। जुबती सजें करहिं सुभ गाना ॥

Chapter : 3 Number : 13

करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें ॥ पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना ॥

Chapter : 3 Number : 13

तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं ॥

Chapter : 3 Number : 13

Doha / दोहा

दो. नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस । अस्त भएँ बिगसत भईं निरखि राम राकेस ॥ ९(क) ॥

Chapter : 3 Number : 14

होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान । पुर नर नारि सनाथ करि भवन चले भगवान ॥ ९(ख) ॥

Chapter : 3 Number : 14

Chaupai / चोपाई

प्रभु जानी कैकेई लजानी। प्रथम तासु गृह गए भवानी ॥ ताहि प्रबोधि बहुत सुख दीन्हा। पुनि निज भवन गवन हरि कीन्हा ॥

Chapter : 3 Number : 14

कृपासिंधु जब मंदिर गए। पुर नर नारि सुखी सब भए ॥ गुर बसिष्ट द्विज लिए बुलाई। आजु सुघरी सुदिन समुदाई ॥

Chapter : 3 Number : 14

सब द्विज देहु हरषि अनुसासन। रामचंद्र बैठहिं सिंघासन ॥ मुनि बसिष्ट के बचन सुहाए। सुनत सकल बिप्रन्ह अति भाए ॥

Chapter : 3 Number : 14

कहहिं बचन मृदु बिप्र अनेका। जग अभिराम राम अभिषेका ॥ अब मुनिबर बिलंब नहिं कीजे। महाराज कहँ तिलक करीजै ॥

Chapter : 3 Number : 14

Doha / दोहा

दो. तब मुनि कहेउ सुमंत्र सन सुनत चलेउ हरषाइ । रथ अनेक बहु बाजि गज तुरत सँवारे जाइ ॥ १०(क) ॥

Chapter : 3 Number : 15

जहँ तहँ धावन पठइ पुनि मंगल द्रब्य मगाइ । हरष समेत बसिष्ट पद पुनि सिरु नायउ आइ ॥ १०(ख) ॥

Chapter : 3 Number : 15

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