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अथ मनुष्यवर्गः
मनुष्यः. (6) - मनुष्य (पुं) , मानुष (पुं) , मर्त्य (पुं) , मनुज (पुं) , मानव (पुं) , नर (पुं)
मनुष्या मानुषा मर्त्या मनुजा मानवा नराः ॥ २.५.५२९ ॥
मनुष्यः. (6) - मनुष्य (पुं) , मानुष (पुं) , मर्त्य (पुं) , मनुज (पुं) , मानव (पुं) , नर (पुं)
पुरुषः. (5) - पुमाम्स (पुं) , पञ्चजन (पुं) , पुरुष (पुं) , पूरुष (पुं) , नर (पुं)
स्युः पुमांसः पञ्चजनाः पुरुषाः पूरुषा नरः॥ २.५.५३० ॥
पुरुषः. (5) - पुमाम्स (पुं) , पञ्चजन (पुं) , पुरुष (पुं) , पूरुष (पुं) , नर (पुं)
स्त्री. (7) - स्त्री (स्त्री) , योषित् (स्त्री) , अबला (स्त्री) , योषा (स्त्री) , नारी (स्त्री) , सीमन्तिनी (स्त्री) , वधू (स्त्री)
स्त्री योषिदबला योषा नारी सीमन्तिनी वधूः॥ २.५.५३१ ॥
स्त्री. (7) - स्त्री (स्त्री) , योषित् (स्त्री) , अबला (स्त्री) , योषा (स्त्री) , नारी (स्त्री) , सीमन्तिनी (स्त्री) , वधू (स्त्री)
स्त्री. (4) - प्रतीपदर्शिनी (स्त्री) , वामा (स्त्री) , वनिता (स्त्री) , महिला (स्त्री)
प्रतीपदर्शिनी वामा वनिता महिला तथा॥ २.५.५३२ ॥
स्त्री. (4) - प्रतीपदर्शिनी (स्त्री) , वामा (स्त्री) , वनिता (स्त्री) , महिला (स्त्री)
स्त्रीविशेषः. (4) - अङ्गना (स्त्री) , भीरु (स्त्री) , कामिनी (स्त्री) , वामलोचना (स्त्री)
विशेषास्त्वङ्गना भीरुः कामिनी वामलोचना॥ २.५.५३३ ॥
स्त्रीविशेषः. (4) - अङ्गना (स्त्री) , भीरु (स्त्री) , कामिनी (स्त्री) , वामलोचना (स्त्री)
स्त्रीविशेषः. (5) - प्रमदा (स्त्री) , मानिनी (स्त्री) , कान्ता (स्त्री) , ललना (स्त्री) , नितम्बिनी (स्त्री)
प्रमदा मानिनी कान्ता ललना च नितम्बिनी॥ २.५.५३४ ॥
स्त्रीविशेषः. (5) - प्रमदा (स्त्री) , मानिनी (स्त्री) , कान्ता (स्त्री) , ललना (स्त्री) , नितम्बिनी (स्त्री)
स्त्रीविशेषः. (3) - सुन्दरी (स्त्री) , रमणी (स्त्री) , रामा (स्त्री) कोपनस्त्री. (2) - कोपना (स्त्री) , भामिनी (स्त्री)
सुन्दरी रमणी रामा कोपना सैव भामिनी॥ २.५.५३५ ॥
स्त्रीविशेषः. (3) - सुन्दरी (स्त्री) , रमणी (स्त्री) , रामा (स्त्री) कोपनस्त्री. (2) - कोपना (स्त्री) , भामिनी (स्त्री)
अत्यन्तोत्कृष्टस्त्री. (4) - वरारोहा (स्त्री) , मत्तकाशिनी (स्त्री) , उत्तमा (स्त्री) , वरवर्णिनी (स्त्री)
वरारोहा मत्तकाशिन्युत्तमा वरवर्णिनी॥ २.५.५३६ ॥
अत्यन्तोत्कृष्टस्त्री. (4) - वरारोहा (स्त्री) , मत्तकाशिनी (स्त्री) , उत्तमा (स्त्री) , वरवर्णिनी (स्त्री)
पट्टमहिषी. (1) - महिषी (स्त्री) राजभार्या. (1) - भोगिनी (स्त्री)
कृताभिषेका महिषी भोगिन्योऽन्या नृपस्त्रियः॥ २.५.५३७ ॥
पट्टमहिषी. (1) - महिषी (स्त्री) राजभार्या. (1) - भोगिनी (स्त्री)
पत्नी. (4) - पत्नी (स्त्री) , पाणिगृहीती (स्त्री) , द्वितीया (स्त्री) , सहधर्मिणी (स्त्री)
पत्नी पाणिगृहीती च द्वितीया सहधर्मिणी॥ २.५.५३८ ॥
पत्नी. (4) - पत्नी (स्त्री) , पाणिगृहीती (स्त्री) , द्वितीया (स्त्री) , सहधर्मिणी (स्त्री)
पत्नी. (3) - भार्या (स्त्री) , जाया (स्त्री) , दार (पुं-बहु) पतिपुत्रातिमती. (1) - कुटुम्बिनी (स्त्री)
भार्या जायाथ पुंभूम्नि दाराः स्यात्तु कुटुम्बिनी॥ २.५.५३९ ॥
पत्नी. (3) - भार्या (स्त्री) , जाया (स्त्री) , दार (पुं-बहु) पतिपुत्रातिमती. (1) - कुटुम्बिनी (स्त्री)
पतिपुत्रातिमती. (1) - पुरन्ध्री (स्त्री) पतिव्रता. (4) - सुचरित्रा (स्त्री) , सती (स्त्री) , साध्वी (स्त्री) , पतिव्रता (स्त्री)
पुरंध्री सुचरित्रा तु सती साध्वी पतिव्रता॥ २.५.५४० ॥
पतिपुत्रातिमती. (1) - पुरन्ध्री (स्त्री) पतिव्रता. (4) - सुचरित्रा (स्त्री) , सती (स्त्री) , साध्वी (स्त्री) , पतिव्रता (स्त्री)
प्रथममूढा. (3) - कृतसपत्निका (स्त्री) , अध्यूढा (स्त्री) , अधिविन्ना (स्त्री) स्वेच्छाकृतपतिवरणा. (1) - स्वयंवरा (स्त्री)
कृतसापत्निकाध्यूढाधिविन्नाथ स्वयंवरा॥ २.५.५४१ ॥
प्रथममूढा. (3) - कृतसपत्निका (स्त्री) , अध्यूढा (स्त्री) , अधिविन्ना (स्त्री) स्वेच्छाकृतपतिवरणा. (1) - स्वयंवरा (स्त्री)
स्वेच्छाकृतपतिवरणा. (2) - पतिंवरा (स्त्री) , वर्या (स्त्री) दोषवारणकृतकुलरक्षास्त्री. (2) - कुलस्त्री (स्त्री) , कुलपालिका (स्त्री)
पतिंवरा च वर्याथ कुलस्त्री कुलपालिका॥ २.५.५४२ ॥
स्वेच्छाकृतपतिवरणा. (2) - पतिंवरा (स्त्री) , वर्या (स्त्री) दोषवारणकृतकुलरक्षास्त्री. (2) - कुलस्त्री (स्त्री) , कुलपालिका (स्त्री)
कन्या. (2) - कन्या (स्त्री) , कुमारी (स्त्री) अदृष्टरजस्का. (3) - गौरी (स्त्री) , नग्निका (स्त्री) , अनागतार्तवा (स्त्री)
कन्या कुमारी गौरी तु नग्निकाऽनागतार्तवा॥ २.५.५४३ ॥
कन्या. (2) - कन्या (स्त्री) , कुमारी (स्त्री) अदृष्टरजस्का. (3) - गौरी (स्त्री) , नग्निका (स्त्री) , अनागतार्तवा (स्त्री)
प्रथमप्राप्तरजोयोगा. (2) - मध्यमा (स्त्री) , दृष्टरजस् (स्त्री) यौवनयुक्ता. (2) - तरुणी (स्त्री) , युवति (स्त्री)
स्यान्मध्यमा दृष्टरजास्तरुणी युवतिः समे॥ २.५.५४४ ॥
प्रथमप्राप्तरजोयोगा. (2) - मध्यमा (स्त्री) , दृष्टरजस् (स्त्री) यौवनयुक्ता. (2) - तरुणी (स्त्री) , युवति (स्त्री)
पुत्रभार्या. (3) - स्नुषा (स्त्री) , जनी (स्त्री) , वधू (स्त्री) प्राप्तयौवना पितृगेहस्था. (2) - चिरिण्टी (स्त्री) , सुवासिनी (स्त्री)
समाः स्नुषाजनीवध्वश्चिरिण्टी तु सुवासिनी॥ २.५.५४५ ॥
पुत्रभार्या. (3) - स्नुषा (स्त्री) , जनी (स्त्री) , वधू (स्त्री) प्राप्तयौवना पितृगेहस्था. (2) - चिरिण्टी (स्त्री) , सुवासिनी (स्त्री)
धनादीच्छायुक्ता. (2) - इच्छावती (स्त्री) , कामुका (स्त्री) मैथुनेच्छावती. (2) - वृषस्यन्ती (स्त्री) , कामुकी (स्त्री)
इच्छावती कामुका स्याद् वृषस्यन्ती तु कामुकी॥ २.५.५४६ ॥
धनादीच्छायुक्ता. (2) - इच्छावती (स्त्री) , कामुका (स्त्री) मैथुनेच्छावती. (2) - वृषस्यन्ती (स्त्री) , कामुकी (स्त्री)
या कान्तेच्छयारतिस्थानं गच्छती सा. (1) - अभिसारिका (स्त्री)
कान्तार्थिनी तु या याति संकेतं साभिसारिका॥ २.५.५४७ ॥
या कान्तेच्छयारतिस्थानं गच्छती सा. (1) - अभिसारिका (स्त्री)
स्वैरिणी. (6) - पुंश्चली (स्त्री) , धर्षिणी (स्त्री) , बन्धकी (स्त्री) , असती (स्त्री) , कुलटा (स्त्री) , इत्वरी (स्त्री)
पुंश्चली धर्षिणी बन्धक्यसती कुलटेत्वरी॥ २.५.५४८ ॥
स्वैरिणी. (6) - पुंश्चली (स्त्री) , धर्षिणी (स्त्री) , बन्धकी (स्त्री) , असती (स्त्री) , कुलटा (स्त्री) , इत्वरी (स्त्री)
स्वैरिणी. (2) - स्वैरिणी (स्त्री) , पांसुला (स्त्री) अपत्यरहिता. (1) - अशिश्वी (स्त्री)
स्वैरिणी पांसुला च स्यादशिश्वी शिशुना विना॥ २.५.५४९ ॥
स्वैरिणी. (2) - स्वैरिणी (स्त्री) , पांसुला (स्त्री) अपत्यरहिता. (1) - अशिश्वी (स्त्री)
पतिपुत्ररहिता. (1) - अवीरा (स्त्री) विधवा. (2) - विश्वस्ता (स्त्री) , विधवा (स्त्री)
अवीरा निष्पतिसुता विश्वस्ताविधवे समे॥ २.५.५५० ॥
पतिपुत्ररहिता. (1) - अवीरा (स्त्री) विधवा. (2) - विश्वस्ता (स्त्री) , विधवा (स्त्री)
सखी. (3) - आलि (स्त्री) , सखी (स्त्री) , वयस्या (स्त्री) सुमङ्गली. (2) - पतिवत्नी (स्त्री) , सभर्तृका (स्त्री)
आलिः सखी वयस्याथ पतिवत्नी सभर्तृका॥ २.५.५५१ ॥
सखी. (3) - आलि (स्त्री) , सखी (स्त्री) , वयस्या (स्त्री) सुमङ्गली. (2) - पतिवत्नी (स्त्री) , सभर्तृका (स्त्री)
पक्वकेशी. (2) - वृद्धा (स्त्री) , पलिक्नी (स्त्री) स्वयम्ज्ञात्री. (2) - प्राज्ञी (स्त्री) , प्रज्ञा (स्त्री) प्रशस्तबुद्धी. (2) - प्राज्ञा (स्त्री) , धीमती (स्त्री)
वृद्धा पलिक्नी प्राज्ञी तु प्रज्ञा प्राज्ञा तु धीमती॥ २.५.५५२ ॥
पक्वकेशी. (2) - वृद्धा (स्त्री) , पलिक्नी (स्त्री) स्वयम्ज्ञात्री. (2) - प्राज्ञी (स्त्री) , प्रज्ञा (स्त्री) प्रशस्तबुद्धी. (2) - प्राज्ञा (स्त्री) , धीमती (स्त्री)
शूद्रस्यभार्या. (1) - शूद्री (स्त्री) शूद्रजातीया. (1) - शूद्रा (स्त्री)
शूद्री शूद्रस्य भार्या स्याच्छूद्रा तज्जातिरेव च॥ २.५.५५३ ॥
शूद्रस्यभार्या. (1) - शूद्री (स्त्री) शूद्रजातीया. (1) - शूद्रा (स्त्री)
आभीरी. (2) - आभीरी (स्त्री) , महाशूद्री (स्त्री)
आभीरी तु महाशूद्री जातिपुंयोगयोः समा॥ २.५.५५४ ॥
आभीरी. (2) - आभीरी (स्त्री) , महाशूद्री (स्त्री)
वैश्यजातीया. (2) - अर्याणी (स्त्री) , अर्या (स्त्री) क्षत्रियजातीया. (2) - क्षत्रिया (स्त्री) , क्षत्रियाणी (स्त्री)
अर्याणी स्वयमर्या स्यात्क्षत्रिया क्षत्रियाण्यपि॥ २.५.५५५ ॥
वैश्यजातीया. (2) - अर्याणी (स्त्री) , अर्या (स्त्री) क्षत्रियजातीया. (2) - क्षत्रिया (स्त्री) , क्षत्रियाणी (स्त्री)
स्वयम्विद्योपदेशीनी. (2) - उपाध्याया (स्त्री) , उपाध्यायी (स्त्री) स्वयम्मन्त्रव्याख्यात्री. (1) - आचार्या (स्त्री)
उपाध्यायाप्युपाध्यायी स्यादाचार्यापि च स्वतः॥ २.५.५५६ ॥
स्वयम्विद्योपदेशीनी. (2) - उपाध्याया (स्त्री) , उपाध्यायी (स्त्री) स्वयम्मन्त्रव्याख्यात्री. (1) - आचार्या (स्त्री)
आचार्यभार्या. (1) - आचार्यानी (स्त्री) वैश्यपत्नी. (1) - अर्यी (स्त्री) क्षत्रियपत्नी. (1) - क्षत्रियी (स्त्री)
आचार्यानी तु पुंयोगे स्यादर्यी क्षत्रियी तथा॥ २.५.५५७ ॥
आचार्यभार्या. (1) - आचार्यानी (स्त्री) वैश्यपत्नी. (1) - अर्यी (स्त्री) क्षत्रियपत्नी. (1) - क्षत्रियी (स्त्री)
विद्योपदेष्टृभार्या. (2) - उपाध्यायानी (स्त्री) , उपाध्यायी (स्त्री) नपुंसकम्. (1) - पोटा (स्त्री)
उपाध्यायान्युपाध्यायी पोटा स्त्रीपुंसलक्षणा॥ २.५.५५८ ॥
विद्योपदेष्टृभार्या. (2) - उपाध्यायानी (स्त्री) , उपाध्यायी (स्त्री) नपुंसकम्. (1) - पोटा (स्त्री)
वीरस्य भार्या. (2) - वीरपत्नी (स्त्री) , वीरभार्या (स्त्री) वीरस्य माता. (2) - वीरमातृ (स्त्री) , वीरसू (स्त्री)
वीरपत्नी वीरभार्या वीरमाता तु वीरसूः॥ २.५.५५९ ॥
वीरस्य भार्या. (2) - वीरपत्नी (स्त्री) , वीरभार्या (स्त्री) वीरस्य माता. (2) - वीरमातृ (स्त्री) , वीरसू (स्त्री)
प्रसूता. (4) - जातापत्या (स्त्री) , प्रजाता (स्त्री) , प्रसूता (स्त्री) , प्रसूतिका (स्त्री)
जातापत्या प्रजाता च प्रसूता च प्रसूतिका॥ २.५.५६० ॥
प्रसूता. (4) - जातापत्या (स्त्री) , प्रजाता (स्त्री) , प्रसूता (स्त्री) , प्रसूतिका (स्त्री)
नग्ना. (2) - नग्निका (स्त्री) , कोटवी (स्त्री) दूती. (2) - दूती (स्त्री) , सञ्चारिका (स्त्री)
स्त्री नग्निका कोटवी स्याद्दूतीसंचारिके समे॥ २.५.५६१ ॥
नग्ना. (2) - नग्निका (स्त्री) , कोटवी (स्त्री) दूती. (2) - दूती (स्त्री) , सञ्चारिका (स्त्री)
अर्धवृद्धा काषायवसना अधवा च स्त्री. (1) - कात्यायनी (स्त्री)
कात्यायन्यर्धवृद्धा या काषायवसनाऽधवा॥ २.५.५६२ ॥
अर्धवृद्धा काषायवसना अधवा च स्त्री. (1) - कात्यायनी (स्त्री)
परवेश्मस्था स्ववशा शिल्पकारिका च स्त्री. (1) - सैरन्ध्री (स्त्री)
सैरन्ध्री परवेश्मस्था स्ववशा शिल्पकारिका॥ २.५.५६३ ॥
परवेश्मस्था स्ववशा शिल्पकारिका च स्त्री. (1) - सैरन्ध्री (स्त्री)
कृष्णकेशी प्रेष्यान्तःपुरचारिणी च स्त्री. (1) - असिक्नी (स्त्री)
असिक्नी स्यादवृद्धा या प्रेष्याऽन्तःपुरचारिणी॥ २.५.५६४ ॥
कृष्णकेशी प्रेष्यान्तःपुरचारिणी च स्त्री. (1) - असिक्नी (स्त्री)
वेश्या. (4) - वारस्त्री (स्त्री) , गणिका (स्त्री) , वेश्या (स्त्री) , रूपाजीवा (स्त्री)
वारस्त्री गणिका वेश्या रूपाजीवाथ सा जनैः॥ २.५.५६५ ॥
वेश्या. (4) - वारस्त्री (स्त्री) , गणिका (स्त्री) , वेश्या (स्त्री) , रूपाजीवा (स्त्री)
जनैः सत्कृतवेश्या. (1) - वारमुख्या (स्त्री) परनारीं पुंसा संयोजयित्री. (2) - कुट्टनी (स्त्री) , शम्भली (स्त्री)
सत्कृता वारमुख्या स्यात्कुट्टनी शम्भली समे॥ २.५.५६६ ॥
जनैः सत्कृतवेश्या. (1) - वारमुख्या (स्त्री) परनारीं पुंसा संयोजयित्री. (2) - कुट्टनी (स्त्री) , शम्भली (स्त्री)
शुभाशुभनिरूपिणी. (3) - विप्रश्निका (स्त्री) , ईक्षणिका (स्त्री) , दैवज्ञा (स्त्री) रजस्वला. (1) - रजस्वला (स्त्री)
विप्रश्निका त्वीक्षणिका दैवज्ञाथ रजस्वला॥ २.५.५६७ ॥
शुभाशुभनिरूपिणी. (3) - विप्रश्निका (स्त्री) , ईक्षणिका (स्त्री) , दैवज्ञा (स्त्री) रजस्वला. (1) - रजस्वला (स्त्री)
रजस्वला. (5) - स्त्रीधर्मिणी (स्त्री) , अवि (स्त्री) , आत्रेयी (स्त्री) , मलिनी (स्त्री) , पुष्पवती (स्त्री)
स्त्रीधर्मिण्यविरात्रेयी मलिनी पुष्पवत्यपि॥ २.५.५६८ ॥
रजस्वला. (5) - स्त्रीधर्मिणी (स्त्री) , अवि (स्त्री) , आत्रेयी (स्त्री) , मलिनी (स्त्री) , पुष्पवती (स्त्री)
रजस्वला. (2) - ऋतुमती (स्त्री) , उदक्या (स्त्री) आर्तवम्. (3) - रजस् (नपुं) , पुष्प (नपुं) , आर्तव (नपुं)
ऋतुमत्यप्युदक्यापि स्याद्रजः पुष्पमार्तवम्॥ २.५.५६९ ॥
रजस्वला. (2) - ऋतुमती (स्त्री) , उदक्या (स्त्री) आर्तवम्. (3) - रजस् (नपुं) , पुष्प (नपुं) , आर्तव (नपुं)
गर्भवशादभिलाषविशेषवती. (2) - श्रद्धालु (स्त्री) , दोहदवती (स्त्री) रजोहीना. (2) - निष्कला (स्त्री) , विगतार्तवा (स्त्री)
श्रद्धालुर्दोहदवती निष्कला विगतार्तवा॥ २.५.५७० ॥
गर्भवशादभिलाषविशेषवती. (2) - श्रद्धालु (स्त्री) , दोहदवती (स्त्री) रजोहीना. (2) - निष्कला (स्त्री) , विगतार्तवा (स्त्री)
गर्भिणी. (4) - आपन्नसत्त्वा (स्त्री) , गुर्विणी (स्त्री) , अन्तर्वत्नी (स्त्री) , गर्भिणी (स्त्री)
आपन्नसत्त्वा स्याद्गुर्विण्यन्तर्वत्नी च गर्भिणी॥ २.५.५७१ ॥
गर्भिणी. (4) - आपन्नसत्त्वा (स्त्री) , गुर्विणी (स्त्री) , अन्तर्वत्नी (स्त्री) , गर्भिणी (स्त्री)
गणिकासमूहः. (1) - गाणिक्य (नपुं) गर्भिणीसमूहः. (1) - गार्भिण (नपुं) युवतीसमूहः. (1) - यौवत (नपुं)
गणिकादेस्तु गाणिक्यं गार्भिणं यौवतं गणे॥ २.५.५७२ ॥
गणिकासमूहः. (1) - गाणिक्य (नपुं) गर्भिणीसमूहः. (1) - गार्भिण (नपुं) युवतीसमूहः. (1) - यौवत (नपुं)
द्विवारमूढा. (2) - पुनर्भू (स्त्री) , दिधिषु (स्त्री) द्व्यूढापतिः. (1) - दिधिषू (स्त्री)
पुनर्भूर्दिधिषूरूढा द्विस्तस्या दिधिषुः पतिः॥ २.५.५७३ ॥
द्विवारमूढा. (2) - पुनर्भू (स्त्री) , दिधिषु (स्त्री) द्व्यूढापतिः. (1) - दिधिषू (स्त्री)
द्व्यूढाप्रधानभार्यः. (1) - अग्रेदिधिषू (पुं)
स तु द्विजोऽग्रेदिधिषूः सैव यस्य कुटुम्बिनी॥ २.५.५७४ ॥
द्व्यूढाप्रधानभार्यः. (1) - अग्रेदिधिषू (पुं)
कन्यकासुतः. (2) - कानीन (पुं) , कन्यकाजात (पुं) सुभगापुत्रः. (1) - सुभगासुत (पुं)
कानीनः कन्यकाजातः सुतोऽथ सुभगासुतः॥ २.५.५७५ ॥
कन्यकासुतः. (2) - कानीन (पुं) , कन्यकाजात (पुं) सुभगापुत्रः. (1) - सुभगासुत (पुं)
सुभगापुत्रः. (1) - सौभागिनेय (पुं) परभार्यापुत्रः. (1) - पारस्त्रैणेय (पुं)
सौभागिनेयः स्यात्पारस्त्रैणेयस्तु परस्त्रियाः॥ २.५.५७६ ॥
सुभगापुत्रः. (1) - सौभागिनेय (पुं) परभार्यापुत्रः. (1) - पारस्त्रैणेय (पुं)
पितृष्वसुः सुतः. (2) - पैतृष्वसेय (पुं) , पैतृष्वस्रीय (पुं)
पैतृष्वसेयः स्यात्पैतृष्वस्रीयश्च पितृष्वसुः॥ २.५.५७७ ॥
पितृष्वसुः सुतः. (2) - पैतृष्वसेय (पुं) , पैतृष्वस्रीय (पुं)
मातृष्वसुः सुतः. (1) - मातृष्वसृ (स्त्री) अपरमातृसुतः. (2) - वैमात्रेय (पुं) , विमातृज (पुं)
सुतो मातृष्वसुश्चैवं वैमात्रेयो विमातृजः॥ २.५.५७८ ॥
मातृष्वसुः सुतः. (1) - मातृष्वसृ (स्त्री) अपरमातृसुतः. (2) - वैमात्रेय (पुं) , विमातृज (पुं)
कुलटायाः पुत्रः. (3) - बान्धकिनेय (पुं) , बन्धुल (पुं) , असतीसुत (पुं)
अथ बान्धकिनेयः स्याद्बन्धुलश्चासतीसुतः॥ २.५.५७९ ॥
कुलटायाः पुत्रः. (3) - बान्धकिनेय (पुं) , बन्धुल (पुं) , असतीसुत (पुं)
कुलटायाः पुत्रः. (2) - कौलटेर (पुं) , कौलटेय (पुं)
कौलटेरः कौलतेयो भिक्षुकी तु सती यदि॥ २.५.५८० ॥
कुलटायाः पुत्रः. (2) - कौलटेर (पुं) , कौलटेय (पुं)
सत्या भिक्षार्थमटन्त्याः पुत्रः. (2) - कौलटिनेय (पुं) , कौलटेय (पुं)
तदा कौलटिनेयोऽस्याः कौलतेयोऽपि चात्मजः॥ २.५.५८१ ॥
सत्या भिक्षार्थमटन्त्याः पुत्रः. (2) - कौलटिनेय (पुं) , कौलटेय (पुं)
पुत्रः. (5) - आत्मज (पुं) , तनय (पुं) , सूनु (पुं) , सुत (पुं) , पुत्र (पुं)
आत्मजस्तनयः सूनुः सुतः पुत्रः स्त्रियां त्वमी॥ २.५.५८२ ॥
पुत्रः. (5) - आत्मज (पुं) , तनय (पुं) , सूनु (पुं) , सुत (पुं) , पुत्र (पुं)
तनयदुहित्रोः नाम. (2) - अपत्य (नपुं) , तोक (नपुं) पुत्री. (5) - आत्मजा (स्त्री) , तनया (स्त्री) , सूनू (स्त्री) , सुता (स्त्री) , पुत्री (स्त्री)
आहुर्दुहितरं सर्वेऽपत्यं तोकं तयोः समे॥ २.५.५८३ ॥
तनयदुहित्रोः नाम. (2) - अपत्य (नपुं) , तोक (नपुं) पुत्री. (5) - आत्मजा (स्त्री) , तनया (स्त्री) , सूनू (स्त्री) , सुता (स्त्री) , पुत्री (स्त्री)
स्वस्माज्जातपुत्रः. (2) - उरस्य (पुं) , औरस (पुं) पिता. (3) - तात (पुं) , जनक (पुं) , पितृ (पुं)
स्वजाते त्वौरसोरस्यौ तातस्तु जनकः पिता॥ २.५.५८४ ॥
स्वस्माज्जातपुत्रः. (2) - उरस्य (पुं) , औरस (पुं) पिता. (3) - तात (पुं) , जनक (पुं) , पितृ (पुं)
जननी. (4) - जनयित्री (स्त्री) , प्रसू (स्त्री) , मातृ (स्त्री) , जननी (स्त्री) भगिनी. (2) - भगिनी (स्त्री) , स्वसृ (स्त्री)
जनयित्री प्रसूर्माता जननी भगिनी स्वसा॥ २.५.५८५ ॥
जननी. (4) - जनयित्री (स्त्री) , प्रसू (स्त्री) , मातृ (स्त्री) , जननी (स्त्री) भगिनी. (2) - भगिनी (स्त्री) , स्वसृ (स्त्री)
भर्तृभगिनी. (1) - ननन्दृ (स्त्री) सुतस्य सुतायाः वा अपत्यः. (3) - नप्त्री (स्त्री) , पौत्री (स्त्री) , सुतात्मजा (स्त्री)
ननान्दा तु स्वसा पत्युर्नप्त्री पौत्री सुतात्मजा॥ २.५.५८६ ॥
भर्तृभगिनी. (1) - ननन्दृ (स्त्री) सुतस्य सुतायाः वा अपत्यः. (3) - नप्त्री (स्त्री) , पौत्री (स्त्री) , सुतात्मजा (स्त्री)
परस्परम् भ्रातृभार्या. (1) - यातर (स्त्री)
भार्यास्तु भ्रातृवर्गस्य यातरः स्युः परस्परम्॥ २.५.५८७ ॥
परस्परम् भ्रातृभार्या. (1) - यातर (स्त्री)
भ्रातृपत्निः. (2) - प्रजावती (स्त्री) , भ्रातृजाया (स्त्री) मातुलभार्या. (2) - मातुलानी (स्त्री) , मातुली (स्त्री)
प्रजावती भ्रातृजाया मातुलानी तु मातुली॥ २.५.५८८ ॥
भ्रातृपत्निः. (2) - प्रजावती (स्त्री) , भ्रातृजाया (स्त्री) मातुलभार्या. (2) - मातुलानी (स्त्री) , मातुली (स्त्री)
पत्युर्वा पत्न्याः वा माता. (1) - श्वश्रू (स्त्री) पत्युर्वा पत्न्याः वा पिता. (1) - श्वशुर (पुं)
पतिपत्न्योः प्रसूः श्वश्रूः श्वशुरस्तु पिता तयोः॥ २.५.५८९ ॥
पत्युर्वा पत्न्याः वा माता. (1) - श्वश्रू (स्त्री) पत्युर्वा पत्न्याः वा पिता. (1) - श्वशुर (पुं)
पितुर्भ्राता. (1) - पितृव्य (पुं) मातुर्भ्राता. (1) - मातुल (पुं)
पितुर्भ्राता पितृव्यः स्यान्मातुर्भ्राता तु मातुलः॥ २.५.५९० ॥
पितुर्भ्राता. (1) - पितृव्य (पुं) मातुर्भ्राता. (1) - मातुल (पुं)
पत्नीभ्राता. (1) - श्याल (पुं) पत्युः कनिष्ठभ्राता. (2) - देवृ (पुं) , देवर (पुं)
श्यालाः स्युर्भ्रातरः पत्न्याः स्वामिनो देवृदेवरौ॥ २.५.५९१ ॥
पत्नीभ्राता. (1) - श्याल (पुं) पत्युः कनिष्ठभ्राता. (2) - देवृ (पुं) , देवर (पुं)
भगिनीसुताः. (2) - स्वस्रीय (पुं) , भागिनेय (पुं) पुत्र्याः पतिः. (1) - जामातृ (पुं)
स्वस्रीयो भागिनेयः स्याज्जमाता दुहितुः पतिः॥ २.५.५९२ ॥
भगिनीसुताः. (2) - स्वस्रीय (पुं) , भागिनेय (पुं) पुत्र्याः पतिः. (1) - जामातृ (पुं)
पितामहस्य पिता. (1) - प्रपितामह (पुं)
पितामहः पितृपिता तत्पिता प्रपितामहः॥ २.५.५९३ ॥
पितामहस्य पिता. (1) - प्रपितामह (पुं)
मातुः पिता. (1) - मातामह (पुं) मातामहस्य पिता. (1) - प्रमातामह (पुं) सपिण्डाः. (2) - सपिण्ड (पुं) , सनाभि (पुं)
मातुर्मातामहाद्येवं सपिण्डास्तु सनाभयः॥ २.५.५९४ ॥
मातुः पिता. (1) - मातामह (पुं) मातामहस्य पिता. (1) - प्रमातामह (पुं) सपिण्डाः. (2) - सपिण्ड (पुं) , सनाभि (पुं)
एकोदरभ्राता. (4) - समानोदर्य (पुं) , सोदर्य (पुं) , सगर्भ्य (पुं) , सहज (पुं)
समानोदर्यसोदर्यसगर्भ्यसहजाः समाः॥ २.५.५९५ ॥
एकोदरभ्राता. (4) - समानोदर्य (पुं) , सोदर्य (पुं) , सगर्भ्य (पुं) , सहज (पुं)
सगोत्रः. (6) - सगोत्र (पुं) , बान्धव (पुं) , ज्ञाति (पुं) , बन्धु (पुं) , स्व (पुं) , स्वजन (पुं)
सगोत्रबान्धवज्ञातिबन्धुस्वस्वजनाः समाः॥ २.५.५९६ ॥
सगोत्रः. (6) - सगोत्र (पुं) , बान्धव (पुं) , ज्ञाति (पुं) , बन्धु (पुं) , स्व (पुं) , स्वजन (पुं)
ज्ञातेर्भावः. (1) - ज्ञातेय (नपुं) बन्धूनां समूहः. (1) - बन्धुता (स्त्री)
ज्ञातेयं बन्धुता तेषां क्रमाद्भावसमूहयोः॥ २.५.५९७ ॥
ज्ञातेर्भावः. (1) - ज्ञातेय (नपुं) बन्धूनां समूहः. (1) - बन्धुता (स्त्री)
पतिः. (4) - धव (पुं) , प्रिय (पुं) , पति (पुं) , भर्तृ (पुं) मुख्यादन्यभर्ता. (2) - जार (पुं) , उपपति (पुं)
धवः प्रियः पतिर्भर्ता जारस्तूपपतिः समौ॥ २.५.५९८ ॥
पतिः. (4) - धव (पुं) , प्रिय (पुं) , पति (पुं) , भर्तृ (पुं) मुख्यादन्यभर्ता. (2) - जार (पुं) , उपपति (पुं)
जीवति पत्यौ जारजातः पुत्रः. (1) - कुण्ड (पुं) विधवायाम् जारजातः पुत्रः. (1) - गोलक (पुं)
अमृते जारजः कुण्डो मृते भर्तरि गोलकः॥ २.५.५९९ ॥
जीवति पत्यौ जारजातः पुत्रः. (1) - कुण्ड (पुं) विधवायाम् जारजातः पुत्रः. (1) - गोलक (पुं)
भ्रातृपुत्रः. (2) - भ्रात्रीय (पुं) , भ्रातृज (पुं) भ्रातृभगिन्योः नाम. (2) - भ्रातृभगिनी (पुं) , भ्रातर् (पुं-द्वि)
भ्रात्रीयो भ्रातृजो भ्रातृभगिन्यौ भ्रातरावुभौ॥ २.५.६०० ॥
भ्रातृपुत्रः. (2) - भ्रात्रीय (पुं) , भ्रातृज (पुं) भ्रातृभगिन्योः नाम. (2) - भ्रातृभगिनी (पुं) , भ्रातर् (पुं-द्वि)
मातापितरौ. (4) - मातापितृ (पुं-द्वि) , पितरौ (पुं-द्वि) , मातरपितृ (पुं-द्वि) , प्रसूजनयितृ (पुं-द्वि)
मातापितरौ पितरौ मातरपितरौ प्रसूजनयितारौ॥ २.५.६०१ ॥
मातापितरौ. (4) - मातापितृ (पुं-द्वि) , पितरौ (पुं-द्वि) , मातरपितृ (पुं-द्वि) , प्रसूजनयितृ (पुं-द्वि)
श्वश्रूश्वशुरौ. (2) - श्वश्रूश्वशुर (पुं-द्वि) , श्वशुर (पुं-द्वि) पुत्रश्च पुत्री च. (1) - पुत्रौ (पुं-द्वि)
श्वश्रूश्वशुरौ श्वशुरौ पुत्रौ पुत्रश्च दुहिता च॥ २.५.६०२ ॥
श्वश्रूश्वशुरौ. (2) - श्वश्रूश्वशुर (पुं-द्वि) , श्वशुर (पुं-द्वि) पुत्रश्च पुत्री च. (1) - पुत्रौ (पुं-द्वि)
दम्पती. (4) - दम्पती (पुं-द्वि) , जम्पती (पुं-द्वि) , जायापती (पुं-द्वि) , भार्यापती (पुं-द्वि)
दंपती जंपती जायापती भार्यापती च तौ॥ २.५.६०३ ॥
दम्पती. (4) - दम्पती (पुं-द्वि) , जम्पती (पुं-द्वि) , जायापती (पुं-द्वि) , भार्यापती (पुं-द्वि)
गर्भवेष्टनचर्मः. (2) - गर्भाशय (पुं) , जरायु (पुं) शुक्लशोणितसम्पातः. (2) - उल्ब (पुं-नपुं) , कलल (पुं-नपुं)
गर्भाशयो जरायुः स्यादुल्बं च कललोऽस्त्रियाम्॥ २.५.६०४ ॥
गर्भवेष्टनचर्मः. (2) - गर्भाशय (पुं) , जरायु (पुं) शुक्लशोणितसम्पातः. (2) - उल्ब (पुं-नपुं) , कलल (पुं-नपुं)
प्रसवमासः. (2) - सूतिमास (पुं) , वैजनन (पुं) कुक्षिस्थगर्भः. (2) - गर्भ (पुं) , भ्रूण (पुं)
सूतिमासो वैजननो गर्भो भ्रूण इमौ समौ॥ २.५.६०५ ॥
प्रसवमासः. (2) - सूतिमास (पुं) , वैजनन (पुं) कुक्षिस्थगर्भः. (2) - गर्भ (पुं) , भ्रूण (पुं)
नपुंसकम्. (5) - तृतीयाप्रकृति (पुं) , शण्ढ (पुं) , क्लीब (पुं-नपुं) , षण्ड (पुं) , नपुंसक (पुं-नपुं)
तृतीयाप्रकृतिः शण्ढः क्लीबः पण्डो नपुंसके॥ २.५.६०६ ॥
नपुंसकम्. (5) - तृतीयाप्रकृति (पुं) , शण्ढ (पुं) , क्लीब (पुं-नपुं) , षण्ड (पुं) , नपुंसक (पुं-नपुं)
बाल्यत्वम्. (3) - शिशुत्व (नपुं) , शैशव (नपुं) , बाल्य (नपुं) तारुण्यम्. (2) - तारुण्य (नपुं) , यौवन (नपुं)
शिशुत्वं शैशवं बाल्यं तारुण्यं यौवनं समे॥ २.५.६०७ ॥
बाल्यत्वम्. (3) - शिशुत्व (नपुं) , शैशव (नपुं) , बाल्य (नपुं) तारुण्यम्. (2) - तारुण्य (नपुं) , यौवन (नपुं)
वृद्धत्वम्. (2) - स्थाविर (नपुं) , वृद्धत्व (नपुं) वृद्धसमूहः. (2) - वृद्धसङ्घ (पुं) , वार्धक (नपुं)
स्यात्स्थाविरं तु वृद्धत्वं वृद्धसंघेऽपि वार्धकम्॥ २.५.६०८ ॥
वृद्धत्वम्. (2) - स्थाविर (नपुं) , वृद्धत्व (नपुं) वृद्धसमूहः. (2) - वृद्धसङ्घ (पुं) , वार्धक (नपुं)
जरया शुक्लः. (1) - पलित (नपुं) जरा. (2) - विस्रसा (स्त्री) , जरा (स्त्री)
पलितं जरसा शौक्ल्यं केशादौ विस्रसा जरा॥ २.५.६०९ ॥
जरया शुक्लः. (1) - पलित (नपुं) जरा. (2) - विस्रसा (स्त्री) , जरा (स्त्री)
अतिबालिका. (4) - उत्तानशया (स्त्री) , डिम्भा (स्त्री) , स्तनपा (स्त्री) , स्तनन्धयी (स्त्री)
स्यादुत्तानशया डिम्भा स्तनपा च स्तनंधयी॥ २.५.६१० ॥
अतिबालिका. (4) - उत्तानशया (स्त्री) , डिम्भा (स्त्री) , स्तनपा (स्त्री) , स्तनन्धयी (स्त्री)
बालः. (2) - बाल (पुं) , माणवक (पुं) युवा. (3) - वयस्थ (पुं) , तरुण (पुं) , युवन् (पुं)
बालस्तु स्यान्माणवको वयस्थस्तरुणो युवा॥ २.५.६११ ॥
बालः. (2) - बाल (पुं) , माणवक (पुं) युवा. (3) - वयस्थ (पुं) , तरुण (पुं) , युवन् (पुं)
वृद्धः. (6) - प्रवयस् (पुं) , स्थविर (पुं) , वृद्ध (पुं) , जीन (पुं) , जीर्ण (पुं) , जरत् (पुं)
प्रवयाः स्थविरो वृद्धो जीनो जीर्णो जरन्नपि॥ २.५.६१२ ॥
वृद्धः. (6) - प्रवयस् (पुं) , स्थविर (पुं) , वृद्ध (पुं) , जीन (पुं) , जीर्ण (पुं) , जरत् (पुं)
अतिवृद्धः. (3) - वर्षीयस् (पुं) , दशमिन् (पुं) , ज्यायस् (पुं) ज्येष्ठभ्राता. (3) - पूर्वज (पुं) , अग्रिय (पुं) , अग्रज (पुं)
वर्षीयान्दशमी ज्यायान्पूर्वजस्त्वग्रियोऽग्रजः॥ २.५.६१३ ॥
अतिवृद्धः. (3) - वर्षीयस् (पुं) , दशमिन् (पुं) , ज्यायस् (पुं) ज्येष्ठभ्राता. (3) - पूर्वज (पुं) , अग्रिय (पुं) , अग्रज (पुं)
कनिष्ठभ्राता. (5) - जघन्यज (पुं) , कनिष्ठ (पुं) , यवीय (पुं) , अवरज (पुं) , अनुज (पुं)
जघन्यजे स्युः कनिष्ठयवीयोऽवरजानुजाः॥ २.५.६१४ ॥
कनिष्ठभ्राता. (5) - जघन्यज (पुं) , कनिष्ठ (पुं) , यवीय (पुं) , अवरज (पुं) , अनुज (पुं)
निर्बलः. (3) - अमांस (पुं) , दुर्बल (पुं) , छात (पुं) बलवान्. (3) - बलवत् (पुं) , मांसल (पुं) , अंसल (पुं)
अमांसो दुर्बलश्छातो बलवान्मांसलोंऽसलः॥ २.५.६१५ ॥
निर्बलः. (3) - अमांस (पुं) , दुर्बल (पुं) , छात (पुं) बलवान्. (3) - बलवत् (पुं) , मांसल (पुं) , अंसल (पुं)
स्थूलोदरः. (5) - तुन्दिल (पुं) , तुन्दिक (पुं) , तुन्दिन् (पुं) , बृहत्कुक्षि (पुं) , पिचण्डिल (पुं)
तुन्दिलस्तुन्दिभस्तुन्दी बृहत्कुक्षिः पिचण्डिलः॥ २.५.६१६ ॥
स्थूलोदरः. (5) - तुन्दिल (पुं) , तुन्दिक (पुं) , तुन्दिन् (पुं) , बृहत्कुक्षि (पुं) , पिचण्डिल (पुं)
चिपिटनासः. (4) - अवटीट (पुं) , अवनाट (पुं) , अवभ्रट (पुं) , नतनासिक (पुं)
अवटीटोऽवनाटश्चावभ्रटो नतनासिके॥ २.५.६१७ ॥
चिपिटनासः. (4) - अवटीट (पुं) , अवनाट (पुं) , अवभ्रट (पुं) , नतनासिक (पुं)
प्रशस्तकेशः. (3) - केशव (पुं) , केशिक (पुं) , केशिन् (पुं) श्लथचर्मवान्. (2) - वलिन (पुं) , वलिभ (पुं)
केशवः केशिकः केशी वलिनो वलिभः समौ॥ २.५.६१८ ॥
प्रशस्तकेशः. (3) - केशव (पुं) , केशिक (पुं) , केशिन् (पुं) श्लथचर्मवान्. (2) - वलिन (पुं) , वलिभ (पुं)
स्वभावन्यूनाधिकाङ्गः. (2) - विकलाङ्ग (पुं) , अपोगण्ड (पुं) ह्रस्वः. (3) - खर्व (पुं) , ह्रस्व (पुं) , वामन (पुं)
विकलाङ्गस्त्वपोगण्डः खर्वो ह्रस्वश्च वामनः॥ २.५.६१९ ॥
स्वभावन्यूनाधिकाङ्गः. (2) - विकलाङ्ग (पुं) , अपोगण्ड (पुं) ह्रस्वः. (3) - खर्व (पुं) , ह्रस्व (पुं) , वामन (पुं)
तीक्ष्णनासिकः. (2) - खरणस् (पुं) , खरणस (पुं) गतनासिकः. (2) - विग्र (पुं) , गतनासिक (पुं)
खरणाः स्यात्खरणसो विग्रस्तु गतनासिकः॥ २.५.६२० ॥
तीक्ष्णनासिकः. (2) - खरणस् (पुं) , खरणस (पुं) गतनासिकः. (2) - विग्र (पुं) , गतनासिक (पुं)
पशुखुरणसदृशनासिकः. (2) - खुरणस् (पुं) , खुरणस (पुं) विरलजानुकः. (2) - प्रज्ञु (पुं) , प्रगतजानुक (पुं)
खुरणाः स्यात्खुरणसः प्रज्ञुः प्रगतजानुकः॥ २.५.६२१ ॥
पशुखुरणसदृशनासिकः. (2) - खुरणस् (पुं) , खुरणस (पुं) विरलजानुकः. (2) - प्रज्ञु (पुं) , प्रगतजानुक (पुं)
ऊर्ध्वजानुकः. (2) - ऊर्ध्वज्ञु (पुं) , ऊर्ध्वजानु (पुं) संलग्नजानुकः. (2) - संज्ञु (पुं) , संहतजानुक (पुं)
ऊर्ध्वज्ञुरूर्ध्वजानुः स्यात्संज्ञुः संहतजानुकः॥ २.५.६२२ ॥
ऊर्ध्वजानुकः. (2) - ऊर्ध्वज्ञु (पुं) , ऊर्ध्वजानु (पुं) संलग्नजानुकः. (2) - संज्ञु (पुं) , संहतजानुक (पुं)
श्रवणशक्तिहीनः. (2) - एड (पुं) , बधिर (पुं) कुब्जः. (2) - कुब्ज (पुं) , गडुल (पुं) रोगादिना वक्रकरः. (2) - कुकर (पुं) , कुणि (पुं)
स्यादेडे बधिरः कुब्जे गडुलः कुकरे कुणिः॥ २.५.६२३ ॥
श्रवणशक्तिहीनः. (2) - एड (पुं) , बधिर (पुं) कुब्जः. (2) - कुब्ज (पुं) , गडुल (पुं) रोगादिना वक्रकरः. (2) - कुकर (पुं) , कुणि (पुं)
अल्पशरीरः. (2) - पृश्नि (पुं) , अल्पतनु (पुं) जङ्घाहीनः. (2) - श्रोण (पुं) , पङ्गु (पुं) खण्डितकेशः. (2) - मुण्ड (पुं) , मुण्डित (पुं)
पृश्निरल्पतनौ श्रोणः पङ्गौ मुण्डस्तु मुण्डिते॥ २.५.६२४ ॥
अल्पशरीरः. (2) - पृश्नि (पुं) , अल्पतनु (पुं) जङ्घाहीनः. (2) - श्रोण (पुं) , पङ्गु (पुं) खण्डितकेशः. (2) - मुण्ड (पुं) , मुण्डित (पुं)
नेत्रवियुक्तः. (2) - वलिर (पुं) , केकर (पुं) गतिविकलः. (2) - खोड (पुं) , खञ्ज (पुं)
वलिरः केकरे खोडे खञ्जस्त्रिषु जरावराः॥ २.५.६२५ ॥
नेत्रवियुक्तः. (2) - वलिर (पुं) , केकर (पुं) गतिविकलः. (2) - खोड (पुं) , खञ्ज (पुं)
कृष्णवर्णदेहगतचिह्नः. (3) - जडुल (पुं) , कालक (पुं) , पिप्लु (पुं) देहस्थतिलचिह्नः. (2) - तिलक (पुं) , तिलकालक (पुं)
जडुलः कालकः पिप्लुस्तिलकस्तिलकालकः॥ २.५.६२६ ॥
कृष्णवर्णदेहगतचिह्नः. (3) - जडुल (पुं) , कालक (पुं) , पिप्लु (पुं) देहस्थतिलचिह्नः. (2) - तिलक (पुं) , तिलकालक (पुं)
रोगाभावः. (2) - अनामय (नपुं) , आरोग्य (नपुं) रोगनिवारणः. (2) - चिकित्सा (स्त्री) , रुक्प्रतिक्रिया (स्त्री)
अनामयं स्यादारोग्यं चिकित्सा रुक्प्रतिक्रिया॥ २.५.६२७ ॥
रोगाभावः. (2) - अनामय (नपुं) , आरोग्य (नपुं) रोगनिवारणः. (2) - चिकित्सा (स्त्री) , रुक्प्रतिक्रिया (स्त्री)
औषधम्. (5) - भेषज (नपुं) , औषध (नपुं) , भैषज्य (नपुं) , अगद (पुं) , जायु (पुं)
भेषजौषधभैषज्यान्यगदो जायुरित्यपि॥ २.५.६२८ ॥
औषधम्. (5) - भेषज (नपुं) , औषध (नपुं) , भैषज्य (नपुं) , अगद (पुं) , जायु (पुं)
रोगः. (7) - रुज् (स्त्री) , रुजा (स्त्री) , उपताप (पुं) , रोग (पुं) , व्याधि (पुं) , गद (पुं) , आमय (पुं)
स्त्री रुग्रुजा चोपतापरोगव्याधिगदामयाः॥ २.५.६२९ ॥
रोगः. (7) - रुज् (स्त्री) , रुजा (स्त्री) , उपताप (पुं) , रोग (पुं) , व्याधि (पुं) , गद (पुं) , आमय (पुं)
राजयक्ष्मा. (3) - क्षय (पुं) , शोष (पुं) , यक्ष्मन् (पुं) नासारोगः. (2) - प्रतिश्याय (पुं) , पीनस (पुं)
क्षयः शोषश्च यक्ष्मा च प्रतिश्यायस्तु पीनसः॥ २.५.६३० ॥
राजयक्ष्मा. (3) - क्षय (पुं) , शोष (पुं) , यक्ष्मन् (पुं) नासारोगः. (2) - प्रतिश्याय (पुं) , पीनस (पुं)
छिक्का. (3) - क्षुत् (स्त्री) , क्षुत (नपुं) , क्षव (पुं) कासरोगः. (2) - कास (पुं) , क्षवथु (पुं)
स्त्री क्षुत्क्षुतं क्षवः पुंसि कासस्तु क्षवथुः पुमान्॥ २.५.६३१ ॥
छिक्का. (3) - क्षुत् (स्त्री) , क्षुत (नपुं) , क्षव (पुं) कासरोगः. (2) - कास (पुं) , क्षवथु (पुं)
शोथः. (3) - शोफ (पुं) , श्वयथु (पुं) , शोथ (पुं) पादस्फोटनरोगः. (2) - पादस्फोट (पुं) , विपादिका (स्त्री)
शोफस्तु श्वयथुः शोथः पादस्फोटो विपादिका॥ २.५.६३२ ॥
शोथः. (3) - शोफ (पुं) , श्वयथु (पुं) , शोथ (पुं) पादस्फोटनरोगः. (2) - पादस्फोट (पुं) , विपादिका (स्त्री)
सिध्मरोगः. (2) - किलास (नपुं) , सिध्म (नपुं) खसुरोगः. (4) - कच्छू (स्त्री) , पामन् (पुं) , पामा (स्त्री) , विचर्चिका (स्त्री)
किलाससिध्मे कच्छ्वां तु पाम पामा विचर्चिका॥ २.५.६३३ ॥
सिध्मरोगः. (2) - किलास (नपुं) , सिध्म (नपुं) खसुरोगः. (4) - कच्छू (स्त्री) , पामन् (पुं) , पामा (स्त्री) , विचर्चिका (स्त्री)
गात्रविर्घणः. (3) - कण्डू (स्त्री) , खर्जू (स्त्री) , कण्डूया (स्त्री) विस्फोटः. (2) - विस्फोट (पुं) , पिटक (वि)
कण्डूः खर्जूश्च कण्डूया विस्फोटः पिटकः स्त्रियाम्॥ २.५.६३४ ॥
गात्रविर्घणः. (3) - कण्डू (स्त्री) , खर्जू (स्त्री) , कण्डूया (स्त्री) विस्फोटः. (2) - विस्फोट (पुं) , पिटक (वि)
व्रणम्. (3) - व्रण (पुं-नपुं) , ईर्म (नपुं) , अरुस् (नपुं) सदा गलतो व्रणम्. (1) - नाडीव्रण (पुं)
व्रणोऽस्त्रियामीर्ममरुः क्लीबे नाडीव्रणः पुमान्॥ २.५.६३५ ॥
व्रणम्. (3) - व्रण (पुं-नपुं) , ईर्म (नपुं) , अरुस् (नपुं) सदा गलतो व्रणम्. (1) - नाडीव्रण (पुं)
मण्डलाकारकुष्ठः. (2) - कोठ (पुं) , मण्डलक (नपुं) श्वेतकुष्ठः. (2) - कुष्ठ (नपुं) , श्वित्र (नपुं) गुदरोगः. (2) - दुर्नामक (नपुं) , अर्शस् (नपुं)
कोठो मण्डलकं कुश्ठश्वित्रे दुर्नामकार्शसी॥ २.५.६३६ ॥
मण्डलाकारकुष्ठः. (2) - कोठ (पुं) , मण्डलक (नपुं) श्वेतकुष्ठः. (2) - कुष्ठ (नपुं) , श्वित्र (नपुं) गुदरोगः. (2) - दुर्नामक (नपुं) , अर्शस् (नपुं)
मलमूत्रनिरोधः. (2) - आनाह (पुं) , विबन्ध (पुं) ग्रहणीरोगः. (2) - ग्रहणी (स्त्री) , रुक्प्रवाहिका (स्त्री)
आनाहस्तु निबन्धः स्याद्ग्रहणीरुक्प्रवाहिका॥ २.५.६३७ ॥
मलमूत्रनिरोधः. (2) - आनाह (पुं) , विबन्ध (पुं) ग्रहणीरोगः. (2) - ग्रहणी (स्त्री) , रुक्प्रवाहिका (स्त्री)
वमनम्. (3) - प्रच्छर्दिका (स्त्री) , वमि (स्त्री) , वमथु (पुं)
प्रच्छर्दिका वमिश्च स्त्री पुमांस्तु वमथुः समाः॥ २.५.६३८ ॥
वमनम्. (3) - प्रच्छर्दिका (स्त्री) , वमि (स्त्री) , वमथु (पुं)
विद्रधिरोगः. (1) - विद्रधि (स्त्री) ज्वरः. (1) - ज्वर (पुं) प्रमेहरोगः. (1) - मेह (पुं) भगन्दररोगः. (1) - भगन्दर (पुं)
व्याधिभेदा विद्रधिः स्त्री ज्वरमेहभगंदराः॥ २.५.६३९ ॥
विद्रधिरोगः. (1) - विद्रधि (स्त्री) ज्वरः. (1) - ज्वर (पुं) प्रमेहरोगः. (1) - मेह (पुं) भगन्दररोगः. (1) - भगन्दर (पुं)
पादवल्मीकरोगः. (2) - श्लीपद (नपुं) , पादवल्मीक (नपुं) मस्तककेशरोगः. (2) - केशघ्न (नपुं) , इन्द्रलुप्तक (नपुं)
श्लीपदं पादवल्मीकं केशघ्नस्त्विन्द्रलुप्तकः॥ २.५.६४० ॥
पादवल्मीकरोगः. (2) - श्लीपद (नपुं) , पादवल्मीक (नपुं) मस्तककेशरोगः. (2) - केशघ्न (नपुं) , इन्द्रलुप्तक (नपुं)
मूत्रकृच्छ्रम्. (2) - अश्मरी (स्त्री) , मूत्रकृच्छ्र (नपुं)
अश्मरी मूत्रकृच्छ्रम् स्यात्पूर्वे शुक्रावधेस्त्रिषु॥ २.५.६४१ ॥
मूत्रकृच्छ्रम्. (2) - अश्मरी (स्त्री) , मूत्रकृच्छ्र (नपुं)
वैद्यः. (5) - रोगहारिन् (पुं) , अगदङ्कार (पुं) , भिषज् (पुं) , वैद्य (पुं) , चिकित्सक (पुं)
रोगहार्यगदंकारो भिषग्वैद्यौ चिकित्सके॥ २.५.६४२ ॥
वैद्यः. (5) - रोगहारिन् (पुं) , अगदङ्कार (पुं) , भिषज् (पुं) , वैद्य (पुं) , चिकित्सक (पुं)
रोगनिर्मुक्तः. (4) - वार्त (नपुं) , निरामय (वि) , कल्य (वि) , उल्लाघ (वि)
वार्तो निरामयः कल्य उल्लाघो निर्गतो गदात्॥ २.५.६४३ ॥
रोगनिर्मुक्तः. (4) - वार्त (नपुं) , निरामय (वि) , कल्य (वि) , उल्लाघ (वि)
रोगेण क्षीणितः. (2) - ग्लान (वि) , ग्लास्नु (वि) रोगी. (4) - आमयाविन् (वि) , विकृत (वि) , व्याधित (वि) , अपटु (वि)
ग्लानग्लास्नू आमयावी विकृतो व्याधितोऽपटुः॥ २.५.६४४ ॥
रोगेण क्षीणितः. (2) - ग्लान (वि) , ग्लास्नु (वि) रोगी. (4) - आमयाविन् (वि) , विकृत (वि) , व्याधित (वि) , अपटु (वि)
रोगी. (3) - आतुर (वि) , अभ्यमित (वि) , अभ्यान्त (वि) पामायुक्तः. (2) - पामन (वि) , कच्छुर (वि)
आतुरोऽभ्यमितोऽभ्यान्तः समौ पामनकच्छुरौ॥ २.५.६४५ ॥
रोगी. (3) - आतुर (वि) , अभ्यमित (वि) , अभ्यान्त (वि) पामायुक्तः. (2) - पामन (वि) , कच्छुर (वि)
दर्द्रुयुक्तः. (2) - दद्रुण (वि) , दद्रुरोगिन् (वि) मूलव्याधिः. (2) - अर्शोरोग (वि) , अर्शस् (वि)
दद्रुणो दद्रुरोगी स्यादर्शोरोगयुतोऽर्शसः॥ २.५.६४६ ॥
दर्द्रुयुक्तः. (2) - दद्रुण (वि) , दद्रुरोगिन् (वि) मूलव्याधिः. (2) - अर्शोरोग (वि) , अर्शस् (वि)
वातरोगी. (2) - वातकिन् (वि) , वातरोगिन् (वि) अतिसारवान्. (2) - सातिसार (वि) , अतिसारकिन् (वि)
वातकी वातरोगी स्यात्सातिसारोऽतिसारकी॥ २.५.६४७ ॥
वातरोगी. (2) - वातकिन् (वि) , वातरोगिन् (वि) अतिसारवान्. (2) - सातिसार (वि) , अतिसारकिन् (वि)
क्लिन्ननेत्रवान्. (3) - चुल्ल (वि) , चिल्ल (वि) , पिल्ल (वि)
स्युः क्लिन्नाक्षे चुल्लचिल्लपिल्लाः क्लिन्नेऽक्ष्णि चाप्यमी॥ २.५.६४८ ॥
क्लिन्ननेत्रवान्. (3) - चुल्ल (वि) , चिल्ल (वि) , पिल्ल (वि)
वातकृतचित्तविभ्रमः. (2) - उन्मत्त (वि) , उन्मादवत् (वि) कफवातः. (3) - श्लेष्मल (वि) , श्लेष्मण (वि) , कफिन् (वि)
उन्मत्त उन्मादवति श्लेष्मलः श्लेष्मणः कफी॥ २.५.६४९ ॥
वातकृतचित्तविभ्रमः. (2) - उन्मत्त (वि) , उन्मादवत् (वि) कफवातः. (3) - श्लेष्मल (वि) , श्लेष्मण (वि) , कफिन् (वि)
कुब्जः. (1) - न्युब्ज (वि) उन्नतनाभियुक्तपुरुषः. (3) - वृद्धनाभि (वि) , तुन्दिल (वि) , तुन्दिभ (वि)
न्युब्जो भुग्ने रुजा वृद्धनाभौ तुन्दिलतुन्दिभौ॥ २.५.६५० ॥
कुब्जः. (1) - न्युब्ज (वि) उन्नतनाभियुक्तपुरुषः. (3) - वृद्धनाभि (वि) , तुन्दिल (वि) , तुन्दिभ (वि)
सिध्मयुक्तः. (2) - किलासिन् (वि) , सिध्मल (वि) अचक्षुष्कः. (2) - अन्ध (वि) , अदृश् (वि) मूर्च्छावान्. (3) - मूर्च्छाल (वि) , मूर्त (वि) , मूर्च्छित (वि)
विलासी सिध्मलोऽन्धोऽदृङ्मूर्च्छाले मूर्तमूर्च्छितौ॥ २.५.६५१ ॥
सिध्मयुक्तः. (2) - किलासिन् (वि) , सिध्मल (वि) अचक्षुष्कः. (2) - अन्ध (वि) , अदृश् (वि) मूर्च्छावान्. (3) - मूर्च्छाल (वि) , मूर्त (वि) , मूर्च्छित (वि)
रेतस्. (6) - शुक्र (नपुं) , तेजस् (नपुं) , रेतस् (नपुं) , बीज (नपुं) , वीर्य (नपुं) , इन्द्रिय (नपुं)
शुक्रं तेजोरेतसी च बीजवीर्येन्द्रियाणि च॥ २.५.६५२ ॥
रेतस्. (6) - शुक्र (नपुं) , तेजस् (नपुं) , रेतस् (नपुं) , बीज (नपुं) , वीर्य (नपुं) , इन्द्रिय (नपुं)
पित्तम्. (2) - मायु (पुं) , पित्त (नपुं) कफः. (2) - कफ (पुं) , श्लेष्मन् (पुं) चर्मः. (2) - त्वच् (स्त्री) , असृर्ग्धरा (स्त्री)
मायुः पित्तं कफः श्लेष्मा स्त्रियां तु त्वगसृग्धरा॥ २.५.६५३ ॥
पित्तम्. (2) - मायु (पुं) , पित्त (नपुं) कफः. (2) - कफ (पुं) , श्लेष्मन् (पुं) चर्मः. (2) - त्वच् (स्त्री) , असृर्ग्धरा (स्त्री)
मांसम्. (6) - पिशित (नपुं) , तरस (नपुं) , मांस (नपुं) , पलल (नपुं) , क्रव्य (नपुं) , आमिष (नपुं)
पिशितं तरसं मांसं पललं क्र्व्यमामिषम्॥ २.५.६५४ ॥
मांसम्. (6) - पिशित (नपुं) , तरस (नपुं) , मांस (नपुं) , पलल (नपुं) , क्रव्य (नपुं) , आमिष (नपुं)
शुष्कमांसम्. (3) - उत्तप्त (नपुं) , शुष्कमांस (नपुं) , वल्लूर (वि)
उत्ततप्तं शुश्कमांसं स्यात्तद्वल्लूरं त्रिलिङ्गकम्॥ २.५.६५५ ॥
शुष्कमांसम्. (3) - उत्तप्त (नपुं) , शुष्कमांस (नपुं) , वल्लूर (वि)
रक्तम्. (7) - रुधिर (नपुं) , असृज् (नपुं) , लोहित (नपुं) , अस्र (नपुं) , रक्त (नपुं) , क्षतज (नपुं) , शोणित (नपुं)
रुधिरेऽसृग्लोहितास्ररक्तक्षतजशोणितम्॥ २.५.६५६ ॥
रक्तम्. (7) - रुधिर (नपुं) , असृज् (नपुं) , लोहित (नपुं) , अस्र (नपुं) , रक्त (नपुं) , क्षतज (नपुं) , शोणित (नपुं)
हृदयान्तर्गतमांसम्. (2) - बुक्का (स्त्री) , अग्रमांस (नपुं) हृदयकमलम्. (2) - हृदय (नपुं) , हृद् (नपुं) शुद्धमांसस्नेहः. (3) - मेदस् (नपुं) , वपा (स्त्री) , वसा (स्त्री)
बुक्काग्रमांसं हृदयं हृन्मेदस्तु वपा वसा॥ २.५.६५७ ॥
हृदयान्तर्गतमांसम्. (2) - बुक्का (स्त्री) , अग्रमांस (नपुं) हृदयकमलम्. (2) - हृदय (नपुं) , हृद् (नपुं) शुद्धमांसस्नेहः. (3) - मेदस् (नपुं) , वपा (स्त्री) , वसा (स्त्री)
ग्रीवा. (1) - मन्या (स्त्री) धमनिः. (3) - नाडी (स्त्री) , धमनि (स्त्री) , सिरा (स्त्री)
पश्चाद्ग्रीवाशिरा मन्या नाडी तु धमनिः शिरा॥ २.५.६५८ ॥
ग्रीवा. (1) - मन्या (स्त्री) धमनिः. (3) - नाडी (स्त्री) , धमनि (स्त्री) , सिरा (स्त्री)
उदर्यजलाशयः. (2) - तिलक (नपुं) , क्लोमन् (नपुं) मस्तकभवस्नेहः. (2) - मस्तिष्क (नपुं) , गोर्द (नपुं) मलम्. (2) - किट्ट (नपुं) , मल (पुं-नपुं)
तिलकं क्लोम मस्तिष्कं गोर्दं किट्टं मलोऽस्त्रियाम्॥ २.५.६५९ ॥
उदर्यजलाशयः. (2) - तिलक (नपुं) , क्लोमन् (नपुं) मस्तकभवस्नेहः. (2) - मस्तिष्क (नपुं) , गोर्द (नपुं) मलम्. (2) - किट्ट (नपुं) , मल (पुं-नपुं)
अन्त्रम्. (2) - अन्त्र (नपुं) , पुरीतत् (पुं-नपुं) कुक्षिवामपार्श्वेमांसपिण्डः. (2) - गुल्म (पुं) , प्लीहन् (पुं) स्नायुः. (1) - वस्नसा (स्त्री)
अन्त्रं पुरीतगुल्मस्तु प्लीहा पुंस्यथ वस्नसा॥ २.५.६६० ॥
अन्त्रम्. (2) - अन्त्र (नपुं) , पुरीतत् (पुं-नपुं) कुक्षिवामपार्श्वेमांसपिण्डः. (2) - गुल्म (पुं) , प्लीहन् (पुं) स्नायुः. (1) - वस्नसा (स्त्री)
स्नायुः. (1) - स्नायु (स्त्री) कुक्षेर्दक्षिणभागस्थमांसखण्डः. (2) - कालखण्ड (नपुं) , यकृत् (नपुं)
स्नायुः स्त्रियां कालखण्डयकृती तु समे इमे॥ २.५.६६१ ॥
स्नायुः. (1) - स्नायु (स्त्री) कुक्षेर्दक्षिणभागस्थमांसखण्डः. (2) - कालखण्ड (नपुं) , यकृत् (नपुं)
लाला. (3) - सृणिका (स्त्री) , स्यन्दिनी (स्त्री) , लाला (स्त्री) नेत्रमलम्. (1) - दूषिका (स्त्री)
सृणिका स्यन्दनी लाला दूषिका नेत्रयोर्मलम्॥ २.५.६६२ ॥
लाला. (3) - सृणिका (स्त्री) , स्यन्दिनी (स्त्री) , लाला (स्त्री) नेत्रमलम्. (1) - दूषिका (स्त्री)
नासामलम्. (2) - नासामल (नपुं) , सिङ्घाण (पुं) कर्णमलम्. (1) - पिञ्जूष (पुं)
नासामलं तु सिंघाणं पिञ्जूषं कर्णयोर्मलम्॥ २.५.६६३ ॥
नासामलम्. (2) - नासामल (नपुं) , सिङ्घाण (पुं) कर्णमलम्. (1) - पिञ्जूष (पुं)
मूत्रम्. (2) - मूत्र (नपुं) , प्रस्राव (पुं) पुरीषम्. (4) - उच्चार (पुं) , अवस्कर (पुं) , शमल (नपुं) , शकृत् (नपुं)
मूत्रं प्रस्राव उच्चारावस्करौ शमलं शकृत्॥ २.५.६६४ ॥
मूत्रम्. (2) - मूत्र (नपुं) , प्रस्राव (पुं) पुरीषम्. (4) - उच्चार (पुं) , अवस्कर (पुं) , शमल (नपुं) , शकृत् (नपुं)
पुरीषम्. (5) - पुरीष (नपुं) , गूथ (नपुं) , वर्चस्क (पुं-नपुं) , विष्ठा (स्त्री) , विश् (स्त्री)
पुरीषं गूथवर्चस्कमस्त्री विष्ठाविशौ स्त्रियौ॥ २.५.६६५ ॥
पुरीषम्. (5) - पुरीष (नपुं) , गूथ (नपुं) , वर्चस्क (पुं-नपुं) , विष्ठा (स्त्री) , विश् (स्त्री)
शिरोस्थिखण्डः. (2) - कर्पर (पुं) , कपाल (पुं-नपुं) अस्थिः. (2) - कीकस (नपुं) , कुल्य (नपुं)
स्यात्कर्परः कपालोऽस्त्री कीकसं कुल्यमस्थि च॥ २.५.६६६ ॥
शिरोस्थिखण्डः. (2) - कर्पर (पुं) , कपाल (पुं-नपुं) अस्थिः. (2) - कीकस (नपुं) , कुल्य (नपुं)
शरीरगतास्थिपञ्चरः. (1) - कङ्काल (पुं) पृष्ठमध्यगतास्थिदण्डः. (1) - कशेरुका (स्त्री)
स्याच्छरीरास्थ्नि कंकालः पृष्ठास्थ्नि तु कशेरुका॥ २.५.६६७ ॥
शरीरगतास्थिपञ्चरः. (1) - कङ्काल (पुं) पृष्ठमध्यगतास्थिदण्डः. (1) - कशेरुका (स्त्री)
मस्तकास्थिः. (2) - शिरोस्थि (नपुं) , करोटि (स्त्री) पार्श्वास्थिः. (1) - पर्शुका (स्त्री)
शिरोस्थनि करोटिः स्त्री पार्श्वास्थनि तु पर्शुका॥ २.५.६६८ ॥
मस्तकास्थिः. (2) - शिरोस्थि (नपुं) , करोटि (स्त्री) पार्श्वास्थिः. (1) - पर्शुका (स्त्री)
देहावयवः. (4) - अङ्ग (नपुं) , प्रतीक (पुं) , अवयव (पुं) , अपघन (पुं) देहः. (1) - कलेवर (नपुं)
अङ्गं प्रतीकोऽवयवोऽपघनोऽथ कलेवरम्॥ २.५.६६९ ॥
देहावयवः. (4) - अङ्ग (नपुं) , प्रतीक (पुं) , अवयव (पुं) , अपघन (पुं) देहः. (1) - कलेवर (नपुं)
देहः. (6) - गात्र (नपुं) , वपुस् (नपुं) , संहनन (नपुं) , शरीर (नपुं) , वर्ष्मन् (नपुं) , विग्रह (पुं)
गात्रं वपुः संहननं शरीरं वर्ष्म विग्रहः॥ २.५.६७० ॥
देहः. (6) - गात्र (नपुं) , वपुस् (नपुं) , संहनन (नपुं) , शरीर (नपुं) , वर्ष्मन् (नपुं) , विग्रह (पुं)
देहः. (5) - काय (पुं) , देह (पुं-नपुं) , मूर्ति (स्त्री) , तनु (स्त्री) , तनू (स्त्री)
कायो देहः क्लीबपुंसोः स्त्रियां मूर्तिस्तनुस्तनूः॥ २.५.६७१ ॥
देहः. (5) - काय (पुं) , देह (पुं-नपुं) , मूर्ति (स्त्री) , तनु (स्त्री) , तनू (स्त्री)
पादाग्रम्. (2) - पादाग्र (नपुं) , प्रपद (नपुं) चरणः. (4) - पाद (पुं) , पद् (पुं) , अङ्घ्रि (पुं) , चरण (पुं-नपुं)
पादाग्रं प्रपदं पादः पदङ्घ्रिश्चरणोऽस्त्रियाम्॥ २.५.६७२ ॥
पादाग्रम्. (2) - पादाग्र (नपुं) , प्रपद (नपुं) चरणः. (4) - पाद (पुं) , पद् (पुं) , अङ्घ्रि (पुं) , चरण (पुं-नपुं)
पादग्रन्थी. (2) - घुटिका (स्त्री) , गुल्फ (पुं) पादपश्चाद्भागः. (1) - पार्ष्णि (पुं)
तद् ग्रन्थी घुटिके गुल्फौ पुमान्पार्ष्णिस्तयोरधः॥ २.५.६७३ ॥
पादग्रन्थी. (2) - घुटिका (स्त्री) , गुल्फ (पुं) पादपश्चाद्भागः. (1) - पार्ष्णि (पुं)
जङ्घा. (2) - जङ्घा (स्त्री) , प्रसृता (स्त्री) जानूरुसन्धिः. (3) - जानु (पुं-नपुं) , ऊरुपर्वन् (पुं-नपुं) , अष्टीवत् (पुं-नपुं)
जङ्घा तु प्रसृता जानूरुपर्वाष्ठीवदस्त्रियाम्॥ २.५.६७४ ॥
जङ्घा. (2) - जङ्घा (स्त्री) , प्रसृता (स्त्री) जानूरुसन्धिः. (3) - जानु (पुं-नपुं) , ऊरुपर्वन् (पुं-नपुं) , अष्टीवत् (पुं-नपुं)
जानूपरिभागः. (2) - सक्थि (नपुं) , ऊरु (पुं) ऊरुसन्धिः. (1) - वङ्क्षण (पुं)
सक्थि क्लीबे पुमानूरुस्तत्संधिः पुंसि वङ्क्षणः॥ २.५.६७५ ॥
जानूपरिभागः. (2) - सक्थि (नपुं) , ऊरु (पुं) ऊरुसन्धिः. (1) - वङ्क्षण (पुं)
पुरीषनिर्गममार्गः. (3) - गुद (नपुं) , अपान (नपुं) , पायु (पुं) नाभ्यधोभागः. (1) - बस्ति (स्त्री-पुं)
गुदं त्वपानं पायुर्ना बस्तिर्नाभेरधो द्वयोः॥ २.५.६७६ ॥
पुरीषनिर्गममार्गः. (3) - गुद (नपुं) , अपान (नपुं) , पायु (पुं) नाभ्यधोभागः. (1) - बस्ति (स्त्री-पुं)
कटीफलकः. (2) - कट (पुं) , श्रोणिफलक (नपुं) कटिः. (3) - कटि (स्त्री) , श्रोणि (स्त्री) , ककुद्मती (स्त्री)
कटो ना श्रोणिफलकं कटिः श्रोणिः ककुद्मती॥ २.५.६७७ ॥
कटीफलकः. (2) - कट (पुं) , श्रोणिफलक (नपुं) कटिः. (3) - कटि (स्त्री) , श्रोणि (स्त्री) , ककुद्मती (स्त्री)
स्त्रीकट्याः पश्चाद्भागः. (1) - नितम्ब (पुं) स्त्रीकट्याः अग्रभागः. (1) - जघन (नपुं)
पश्चान्नितम्बः स्त्रीकट्याः क्लीबे तु जघनं पुरः॥ २.५.६७८ ॥
स्त्रीकट्याः पश्चाद्भागः. (1) - नितम्ब (पुं) स्त्रीकट्याः अग्रभागः. (1) - जघन (नपुं)
पृष्ठवंशादधोगर्ताः. (2) - कूपक (पुं) , कुकुन्दर (पुं)
कूपकौ तु नितम्बस्थौ द्वयहीने ककुन्दरे॥ २.५.६७९ ॥
पृष्ठवंशादधोगर्ताः. (2) - कूपक (पुं) , कुकुन्दर (पुं)
कटिस्थमांसपिण्डाः. (2) - स्फिच् (स्त्री) , कटिप्रोथ (पुं) भगशिश्नः. (1) - उपस्थ (पुं)
स्त्रियाम् स्फिचौ कटिप्रोथावुपस्थो वक्ष्यमाणयोः॥ २.५.६८० ॥
कटिस्थमांसपिण्डाः. (2) - स्फिच् (स्त्री) , कटिप्रोथ (पुं) भगशिश्नः. (1) - उपस्थ (पुं)
स्त्रीयोनिः. (2) - भग (नपुं) , योनि (स्त्री-पुं) पुरुषलिङ्गः. (4) - शिश्न (पुं) , मेढ्र (पुं) , मेहन (नपुं) , शेफस् (नपुं)
भगं योनिर्द्वयोः शिश्नो मेढ्रो मेहनशेफसी॥ २.५.६८१ ॥
स्त्रीयोनिः. (2) - भग (नपुं) , योनि (स्त्री-पुं) पुरुषलिङ्गः. (4) - शिश्न (पुं) , मेढ्र (पुं) , मेहन (नपुं) , शेफस् (नपुं)
अण्डकोशः. (3) - मुष्क (पुं) , अण्डकोश (पुं) , वृषण (पुं) पृष्ठवंशाधोभागः. (1) - त्रिक (नपुं)
मुष्कोऽण्डकोशो वृषणः पृष्ठवंशाधरे त्रिकम्॥ २.५.६८२ ॥
अण्डकोशः. (3) - मुष्क (पुं) , अण्डकोश (पुं) , वृषण (पुं) पृष्ठवंशाधोभागः. (1) - त्रिक (नपुं)
जठरम्. (5) - पिचण्ड (पुं) , कुक्षि (पुं) , जठर (पुं-नपुं) , उदर (नपुं) , तुन्द (नपुं) वक्षोजः. (2) - स्तन (पुं) , कुच (पुं)
पिचण्डकुक्षी जठरोदरं तुन्दं स्तनौ कुचौ॥ २.५.६८३ ॥
जठरम्. (5) - पिचण्ड (पुं) , कुक्षि (पुं) , जठर (पुं-नपुं) , उदर (नपुं) , तुन्द (नपुं) वक्षोजः. (2) - स्तन (पुं) , कुच (पुं)
स्तनाग्रः. (2) - चूचुक (पुं-नपुं) , कुचाग्र (नपुं) अङ्कः. (2) - क्रोड (स्त्री-नपुं) , भुजान्तर (नपुं)
चूचुकं तु कुचाग्रं स्यान्न ना क्रोडं भुजान्तरम्॥ २.५.६८४ ॥
स्तनाग्रः. (2) - चूचुक (पुं-नपुं) , कुचाग्र (नपुं) अङ्कः. (2) - क्रोड (स्त्री-नपुं) , भुजान्तर (नपुं)
उरस्. (3) - उरस् (नपुं) , वत्स (पुं-नपुं) , वक्षस् (नपुं) देहपश्चाद्भागः. (1) - पृष्ठ (नपुं)
उरो वत्सं च वक्षश्च पृष्ठं तु चरमं तनोः॥ २.५.६८५ ॥
उरस्. (3) - उरस् (नपुं) , वत्स (पुं-नपुं) , वक्षस् (नपुं) देहपश्चाद्भागः. (1) - पृष्ठ (नपुं)
भुजशिरः. (3) - स्कन्ध (पुं) , भुजशिरस् (नपुं) , अंस (पुं-नपुं) अंसकक्षसन्धिः. (1) - जत्रु (नपुं)
स्कन्धो भुजशिरोंसोऽस्त्री संधी तस्यैव जत्रुणी॥ २.५.६८६ ॥
भुजशिरः. (3) - स्कन्ध (पुं) , भुजशिरस् (नपुं) , अंस (पुं-नपुं) अंसकक्षसन्धिः. (1) - जत्रु (नपुं)
कक्षः. (2) - बाहुमूल (नपुं) , कक्ष (पुं) कक्षयोरधोभगः. (1) - पार्श्व (पुं-नपुं)
बाहुमूले उभे कक्षौ पार्श्वमस्त्री तयोरधः॥ २.५.६८७ ॥
कक्षः. (2) - बाहुमूल (नपुं) , कक्ष (पुं) कक्षयोरधोभगः. (1) - पार्श्व (पुं-नपुं)
देहमध्यः. (3) - मध्यम (पुं-नपुं) , अवलग्न (पुं-नपुं) , मध्य (पुं-नपुं)
मध्यमं चावलग्नं च मध्योऽस्त्री द्वौ परौ द्वयोः॥ २.५.६८८ ॥
देहमध्यः. (3) - मध्यम (पुं-नपुं) , अवलग्न (पुं-नपुं) , मध्य (पुं-नपुं)
भुजः. (4) - भुज (स्त्री-पुं) , बाहु (स्त्री-पुं) , प्रवेष्ट (पुं) , दोस् (पुं) कूर्परः. (2) - कफोणि (स्त्री-पुं) , कूर्पर (स्त्री-पुं)
भुजबाहू प्रवेष्टो दोः स्यात्कफोणिस्तु कूर्परः॥ २.५.६८९ ॥
भुजः. (4) - भुज (स्त्री-पुं) , बाहु (स्त्री-पुं) , प्रवेष्ट (पुं) , दोस् (पुं) कूर्परः. (2) - कफोणि (स्त्री-पुं) , कूर्पर (स्त्री-पुं)
कूर्परोपरिभागः. (1) - प्रगण्ड (पुं) कूर्परयोरधः मणिबन्धपर्यन्तभागः. (1) - प्रकोष्ठ (पुं)
अस्योपरि प्रगण्डः स्यात्प्रकोष्ठस्तस्य चाप्यधः॥ २.५.६९० ॥
कूर्परोपरिभागः. (1) - प्रगण्ड (पुं) कूर्परयोरधः मणिबन्धपर्यन्तभागः. (1) - प्रकोष्ठ (पुं)
करबहिर्भागः. (1) - करभ (पुं)
मणीबन्धादाकनिष्ठं करस्य करभो बहिः॥ २.५.६९१ ॥
करबहिर्भागः. (1) - करभ (पुं)
हस्तः. (3) - पञ्चशाख (पुं) , शय (पुं) , पाणि (पुं) अङ्गुष्ठसमीपाङ्गुली. (2) - तर्जनी (स्त्री) , प्रदेशिनी (स्त्री)
पञ्चशाखः शयः पाणिस्तर्जनी स्यात्प्रदेशिनी॥ २.५.६९२ ॥
हस्तः. (3) - पञ्चशाख (पुं) , शय (पुं) , पाणि (पुं) अङ्गुष्ठसमीपाङ्गुली. (2) - तर्जनी (स्त्री) , प्रदेशिनी (स्त्री)
अङ्गुली. (2) - अङ्गुली (स्त्री) , करशाखा (स्त्री) प्रथमाङ्गुली. (1) - अङ्गुष्ठ (पुं) तर्जनी. (1) - प्रदेशिनी (स्त्री)
अङ्गुल्यः करशाखाः स्युः पुंस्यङ्गुष्ठः प्रदेशिनी॥ २.५.६९३ ॥
अङ्गुली. (2) - अङ्गुली (स्त्री) , करशाखा (स्त्री) प्रथमाङ्गुली. (1) - अङ्गुष्ठ (पुं) तर्जनी. (1) - प्रदेशिनी (स्त्री)
मध्याङ्गुली. (1) - मध्यमा (स्त्री) कनिष्ठिकासमीपवर्त्यङ्गुली. (1) - अनामिका (स्त्री) कनिष्ठाङ्गुली. (1) - कनिष्ठा (स्त्री)
मध्यमाऽनामिका चापि कनिष्ठा चेति ताः क्रमात्॥ २.५.६९४ ॥
मध्याङ्गुली. (1) - मध्यमा (स्त्री) कनिष्ठिकासमीपवर्त्यङ्गुली. (1) - अनामिका (स्त्री) कनिष्ठाङ्गुली. (1) - कनिष्ठा (स्त्री)
नखः. (4) - पुनर्भव (पुं) , कररुह (पुं) , नख (पुं-नपुं) , नखर (पुं-नपुं)
पुनर्भवः कररुहो नखोऽस्त्री नखरोऽस्त्रियाम्॥ २.५.६९५ ॥
नखः. (4) - पुनर्भव (पुं) , कररुह (पुं) , नख (पुं-नपुं) , नखर (पुं-नपुं)
तर्जनीसहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - प्रादेश (पुं) मध्यमासहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - ताल (पुं) अनामिकासहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - गोकर्ण (पुं)
प्रादेशतालगोकर्णास्तर्जन्यादियुते तते॥ २.५.६९६ ॥
तर्जनीसहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - प्रादेश (पुं) मध्यमासहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - ताल (पुं) अनामिकासहिताङ्गुष्ठविस्तृतहस्तः. (1) - गोकर्ण (पुं)
कनिष्ठासहिताङ्गुष्टविस्तृतः. (2) - वितस्ति (स्त्री-पुं) , द्वादशाङ्गुल (पुं)
अङ्गुष्ठे सकनिष्ठे स्याद्वितस्तिर्द्वादशाङ्गुलः॥ २.५.६९७ ॥
कनिष्ठासहिताङ्गुष्टविस्तृतः. (2) - वितस्ति (स्त्री-पुं) , द्वादशाङ्गुल (पुं)
विस्तृताङ्गुलपाणिः. (3) - चपेट (पुं) , प्रतल (पुं) , प्रहस्त (पुं)
पाणौ चपेटप्रतलप्रहस्ता विस्तृताङ्गुलौ॥ २.५.६९८ ॥
विस्तृताङ्गुलपाणिः. (3) - चपेट (पुं) , प्रतल (पुं) , प्रहस्त (पुं)
वामदक्षिणपाण्यौ मिलितविस्तृताङ्गुली. (2) - संहतल (पुं) , प्रतल (पुं)
द्वौ संहतौ संहततलप्रतलौ वामदक्षिणौ॥ २.५.६९९ ॥
वामदक्षिणपाण्यौ मिलितविस्तृताङ्गुली. (2) - संहतल (पुं) , प्रतल (पुं)
अर्धाञ्जलिः. (1) - प्रसृति (स्त्री) अञ्जलिः. (1) - अञ्जलि (पुं)
पाणिर्निकुब्जः प्रसृतिस्तौ युतावञ्जलिः पुमान्॥ २.५.७०० ॥
अर्धाञ्जलिः. (1) - प्रसृति (स्त्री) अञ्जलिः. (1) - अञ्जलि (पुं)
विस्तृतकरः. (1) - हस्त (पुं)
प्रकोष्ठे विस्तृतकरे हस्तो मुष्ट्या तु बद्धया॥ २.५.७०१ ॥
विस्तृतकरः. (1) - हस्त (पुं)
बद्धमुष्टिहस्तः. (1) - रत्नि (स्त्री-पुं) कनिष्ठिकायुक्तबद्धमुष्टिहस्तः. (1) - अरत्नि (स्त्री-पुं)
स रत्निः स्यादरत्निस्तु निष्कनिष्ठेन मुष्टिना॥ २.५.७०२ ॥
बद्धमुष्टिहस्तः. (1) - रत्नि (स्त्री-पुं) कनिष्ठिकायुक्तबद्धमुष्टिहस्तः. (1) - अरत्नि (स्त्री-पुं)
स्वे स्वे पार्श्वे प्रसारितबाहुमध्यम्. (1) - व्याम (पुं)
व्यामो बाह्वोः सकरयोस्ततयोस्तिर्यगनन्तरम्॥ २.५.७०३ ॥
स्वे स्वे पार्श्वे प्रसारितबाहुमध्यम्. (1) - व्याम (पुं)
पुरुषप्रमाणम्. (1) - पौरुष (वि)
ऊर्ध्वविस्तृतदोः पाणिनृमाने पौरुषं त्रिषु॥ २.५.७०४ ॥
पुरुषप्रमाणम्. (1) - पौरुष (वि)
ग्रीवाग्रभागः. (2) - कण्ठ (वि) , गल (पुं) ग्रीवा. (3) - ग्रीवा (स्त्री) , शिरोधि (स्त्री) , कन्धरा (स्त्री)
कण्ठो गलोऽथ ग्रीवायां शिरोधिः कन्धरेत्यपि॥ २.५.७०५ ॥
ग्रीवाग्रभागः. (2) - कण्ठ (वि) , गल (पुं) ग्रीवा. (3) - ग्रीवा (स्त्री) , शिरोधि (स्त्री) , कन्धरा (स्त्री)
शङ्खाकारग्रीवा. (1) - कम्बुग्रीवा (स्त्री) ग्रीवायामुन्नतभागः. (3) - अवटु (पुं) , घटा (स्त्री) , कृकाटिका (स्त्री)
कम्बुग्रीवा त्रिरेखा साऽवटुर्घाटा कृकाटिका॥ २.५.७०६ ॥
शङ्खाकारग्रीवा. (1) - कम्बुग्रीवा (स्त्री) ग्रीवायामुन्नतभागः. (3) - अवटु (पुं) , घटा (स्त्री) , कृकाटिका (स्त्री)
वदनम्. (7) - वक्त्र (नपुं) , आस्य (नपुं) , वदन (नपुं) , तुण्ड (नपुं) , आनन (नपुं) , लपन (नपुं) , मुख (नपुं)
वक्त्रास्ये वदनं तुण्डमाननं लपनं मुखम्॥ २.५.७०७ ॥
वदनम्. (7) - वक्त्र (नपुं) , आस्य (नपुं) , वदन (नपुं) , तुण्ड (नपुं) , आनन (नपुं) , लपन (नपुं) , मुख (नपुं)
नासिका. (5) - घ्राण (नपुं) , गन्धवहा (स्त्री) , घोणा (स्त्री) , नासा (स्त्री) , नासिका (स्त्री)
क्लीबे घ्राणं गन्धवहा घोणा नासा च नासिका॥ २.५.७०८ ॥
नासिका. (5) - घ्राण (नपुं) , गन्धवहा (स्त्री) , घोणा (स्त्री) , नासा (स्त्री) , नासिका (स्त्री)
अधरोष्ठमात्रम्. (4) - ओष्ठ (पुं) , अधर (पुं) , रदनच्छद (पुं) , दशनवासस् (नपुं)
ओष्ठाधरौ तु रदनच्छदौ दशनवाससी॥ २.५.७०९ ॥
अधरोष्ठमात्रम्. (4) - ओष्ठ (पुं) , अधर (पुं) , रदनच्छद (पुं) , दशनवासस् (नपुं)
ओष्ठाधोभागः. (1) - चिबुक (नपुं) कपोलः. (2) - गण्ड (पुं) , कपोल (पुं) कपोलाधोभागः. (1) - हनु (पुं)
अधस्ताच्चिबुकं गण्डौ कपोलौ तत्परा हनुः॥ २.५.७१० ॥
ओष्ठाधोभागः. (1) - चिबुक (नपुं) कपोलः. (2) - गण्ड (पुं) , कपोल (पुं) कपोलाधोभागः. (1) - हनु (पुं)
दन्तः. (4) - रदन (पुं) , दशन (पुं) , दन्त (पुं) , रद (पुं) तालुः. (2) - तालु (नपुं) , काकुद (नपुं)
रदना दशना दन्ता रदास्तालु तु काकुदम्॥ २.५.७११ ॥
दन्तः. (4) - रदन (पुं) , दशन (पुं) , दन्त (पुं) , रद (पुं) तालुः. (2) - तालु (नपुं) , काकुद (नपुं)
जिह्वा. (3) - रसज्ञा (स्त्री) , रसना (स्त्री) , जिह्वा (स्त्री) ओष्ठप्रान्तः. (1) - सक्कणी (नपुं)
रसज्ञा रसना जिह्वा प्रान्तावोष्ठस्य सृक्किणी॥ २.५.७१२ ॥
जिह्वा. (3) - रसज्ञा (स्त्री) , रसना (स्त्री) , जिह्वा (स्त्री) ओष्ठप्रान्तः. (1) - सक्कणी (नपुं)
भालः. (3) - ललाट (नपुं) , अलिक (नपुं) , गोधि (पुं) नेत्रोपरिभागस्थरोमराजिः. (1) - भ्रू (स्त्री)
ललाटमलिकं गोधिरूर्ध्वे दृग्भ्यां भ्रुवौ स्त्रियौ॥ २.५.७१३ ॥
भालः. (3) - ललाट (नपुं) , अलिक (नपुं) , गोधि (पुं) नेत्रोपरिभागस्थरोमराजिः. (1) - भ्रू (स्त्री)
भ्रूमध्यम्. (1) - कूर्च (पुं-नपुं) नेत्रकनीनिका. (2) - तारकाक्षि (स्त्री) , कनीनिका (स्त्री)
कूर्चमस्त्री भ्रुवोर्मध्यं तारकाक्ष्णः कनीनिका॥ २.५.७१४ ॥
भ्रूमध्यम्. (1) - कूर्च (पुं-नपुं) नेत्रकनीनिका. (2) - तारकाक्षि (स्त्री) , कनीनिका (स्त्री)
नेत्रम्. (6) - लोचन (नपुं) , नयन (नपुं) , नेत्र (नपुं) , ईक्षण (नपुं) , चक्षुस् (नपुं) , अक्षि (नपुं)
लोचनं नयनं नेत्रमीक्षणं चक्षुरक्षिणी॥ २.५.७१५ ॥
नेत्रम्. (6) - लोचन (नपुं) , नयन (नपुं) , नेत्र (नपुं) , ईक्षण (नपुं) , चक्षुस् (नपुं) , अक्षि (नपुं)
नेत्रम्. (2) - दृश् (स्त्री) , दृष्टि (स्त्री) अश्रुः. (5) - अस्रु (नपुं) , नेत्राम्बु (नपुं) , रोदन (नपुं) , अस्र (नपुं) , अश्रु (नपुं)
दृग्दृष्टी चास्रु नेत्राम्बु रोदनं चास्रमश्रु च॥ २.५.७१६ ॥
नेत्रम्. (2) - दृश् (स्त्री) , दृष्टि (स्त्री) अश्रुः. (5) - अस्रु (नपुं) , नेत्राम्बु (नपुं) , रोदन (नपुं) , अस्र (नपुं) , अश्रु (नपुं)
नेत्रप्रान्तः. (1) - अपाङ्ग (पुं) अपाङ्गदर्शनचेष्टा. (2) - कटाक्ष (पुं) , अपाङ्गदर्शन (नपुं)
अपाङ्गौ नेत्रयोरन्तौ कटाक्षोऽपाङ्गदर्शने॥ २.५.७१७ ॥
नेत्रप्रान्तः. (1) - अपाङ्ग (पुं) अपाङ्गदर्शनचेष्टा. (2) - कटाक्ष (पुं) , अपाङ्गदर्शन (नपुं)
कर्णः. (6) - कर्ण (पुं) , शब्दग्रह (पुं) , श्रोत्र (नपुं) , श्रुति (स्त्री) , श्रवण (पुं) , श्रवस् (नपुं)
कर्णशब्दग्रहौ श्रोत्रं श्रुतिः स्त्री श्रवणं श्रवः॥ २.५.७१८ ॥
कर्णः. (6) - कर्ण (पुं) , शब्दग्रह (पुं) , श्रोत्र (नपुं) , श्रुति (स्त्री) , श्रवण (पुं) , श्रवस् (नपुं)
शिरः. (5) - उत्तमाङ्ग (नपुं) , शिरस् (नपुं) , शीर्ष (नपुं) , मूर्धन् (पुं) , मस्तक (पुं-नपुं)
उत्तमाङ्गं शिरः शीर्षं मूर्धा ना मस्तकोऽस्त्रियाम्॥ २.५.७१९ ॥
शिरः. (5) - उत्तमाङ्ग (नपुं) , शिरस् (नपुं) , शीर्ष (नपुं) , मूर्धन् (पुं) , मस्तक (पुं-नपुं)
केशः. (6) - चिकुर (पुं) , कुन्तल (पुं) , बाल (पुं) , कच (पुं) , केश (पुं) , शिरोरुह (पुं)
चिकुरः कुन्तलो वालः कचः केशः शिरोरुहः॥ २.५.७२० ॥
केशः. (6) - चिकुर (पुं) , कुन्तल (पुं) , बाल (पुं) , कच (पुं) , केश (पुं) , शिरोरुह (पुं)
केशवृन्दम्. (2) - कैशिक (नपुं) , कैश्य (नपुं) कुटिलकेशाः. (2) - अलक (पुं) , चूर्णकुन्तल (पुं)
तद्वृन्दे कैशिकं कैश्यमलकाश्चूर्णकुन्तलाः॥ २.५.७२१ ॥
केशवृन्दम्. (2) - कैशिक (नपुं) , कैश्य (नपुं) कुटिलकेशाः. (2) - अलक (पुं) , चूर्णकुन्तल (पुं)
ललाडगतकेशाः. (1) - भ्रमरक (पुं) शिखा. (2) - काकपक्ष (पुं) , शिखण्डक (पुं)
ते ललाटे भ्रमरकाः काकपक्षः शिखण्डकः॥ २.५.७२२ ॥
ललाडगतकेशाः. (1) - भ्रमरक (पुं) शिखा. (2) - काकपक्ष (पुं) , शिखण्डक (पुं)
केशबन्धरचना. (2) - कबरी (स्त्री) , केशवेश (पुं) चूडासहितकेशः. (1) - धम्मिल्ल (पुं)
कबरी केशवेशोऽथ धम्मिल्लः संयताः कचाः॥ २.५.७२३ ॥
केशबन्धरचना. (2) - कबरी (स्त्री) , केशवेश (पुं) चूडासहितकेशः. (1) - धम्मिल्ल (पुं)
शिरोमध्यस्थचूडा. (3) - शिखा (स्त्री) , चूडा (स्त्री) , केशपाशी (स्त्री) तपस्विजटा. (2) - सटा (स्त्री) , जटा (स्त्री)
शिखा चूडा केशपाशी व्रतिनस्तु सटा जटा॥ २.५.७२४ ॥
शिरोमध्यस्थचूडा. (3) - शिखा (स्त्री) , चूडा (स्त्री) , केशपाशी (स्त्री) तपस्विजटा. (2) - सटा (स्त्री) , जटा (स्त्री)
रचितकेशः. (2) - वेणि (स्त्री) , प्रवेणी (स्त्री) निर्मलकेशः. (2) - शीर्षण्य (पुं) , शिरस्य (पुं)
वेणी प्रवेणी शीर्षण्यशिरस्यौ विशदे कचे॥ २.५.७२५ ॥
रचितकेशः. (2) - वेणि (स्त्री) , प्रवेणी (स्त्री) निर्मलकेशः. (2) - शीर्षण्य (पुं) , शिरस्य (पुं)
केशात्कलापार्थः. (3) - पाश (पुं) , पक्ष (पुं) , हस्त (पुं)
पाशः पक्षश्च हस्तश्च कलापार्थाः कचात्परे॥ २.५.७२६ ॥
केशात्कलापार्थः. (3) - पाश (पुं) , पक्ष (पुं) , हस्त (पुं)
रोमः. (3) - तनूरुह (नपुं) , रोमन् (नपुं) , लोमन् (नपुं) दाढिका. (1) - श्मश्रु (नपुं)
तनूरुहं रोम लोम तद्वृद्धौ श्मश्रु पुम्मुखे॥ २.५.७२७ ॥
रोमः. (3) - तनूरुह (नपुं) , रोमन् (नपुं) , लोमन् (नपुं) दाढिका. (1) - श्मश्रु (नपुं)
अलङ्काररचनादिकृतशोभा. (5) - आकल्प (पुं) , वेष (पुं) , नेपथ्य (नपुं) , प्रतिकर्मन् (नपुं) , प्रसाधन (नपुं)
आकल्पवेषौ नेपथ्यं प्रतिकर्म प्रसाधनम्॥ २.५.७२८ ॥
अलङ्काररचनादिकृतशोभा. (5) - आकल्प (पुं) , वेष (पुं) , नेपथ्य (नपुं) , प्रतिकर्मन् (नपुं) , प्रसाधन (नपुं)
अलङ्करणशीलः. (2) - अलङ्कर्तृ (वि) , अलङ्करिष्णु (वि) भूषितः. (1) - मण्डित (वि)
दशैते त्रिष्वलंकर्ताऽलंकरिष्णुश्च मण्डितः॥ २.५.७२९ ॥
अलङ्करणशीलः. (2) - अलङ्कर्तृ (वि) , अलङ्करिष्णु (वि) भूषितः. (1) - मण्डित (वि)
भूषितः. (4) - प्रसाधित (वि) , अलङ्कृत (वि) , भूषित (वि) , परिष्कृत (वि)
प्रसाधितोऽलंकृतश्च भूषितश्च परिष्कृतः॥ २.५.७३० ॥
भूषितः. (4) - प्रसाधित (वि) , अलङ्कृत (वि) , भूषित (वि) , परिष्कृत (वि)
अलङ्कारादिना शोभमानः. (3) - विभ्राज् (वि) , भ्राजिष्णु (वि) , रोचिष्णु (वि) भूषणक्रिया. (2) - भूषा (स्त्री) , अलङ्क्रिया (स्त्री)
विभ्राड्भ्राजिष्णुरोचिष्णू भूषणं स्यादलंक्रिया॥ २.५.७३१ ॥
अलङ्कारादिना शोभमानः. (3) - विभ्राज् (वि) , भ्राजिष्णु (वि) , रोचिष्णु (वि) भूषणक्रिया. (2) - भूषा (स्त्री) , अलङ्क्रिया (स्त्री)
भूषणम्. (4) - अलङ्कार (पुं) , आभरण (नपुं) , परिष्कार (पुं) , विभूषण (नपुं)
अलंकारस्त्वाभरणं परिष्कारो विभूषणम्॥ २.५.७३२ ॥
भूषणम्. (4) - अलङ्कार (पुं) , आभरण (नपुं) , परिष्कार (पुं) , विभूषण (नपुं)
भूषणम्. (1) - मण्डन (नपुं) किरीटम्. (2) - मुकुट (नपुं) , किरीट (पुं-नपुं)
मण्डनं चाथ मुकुटं किरीटं पुंनपुंसकम्॥ २.५.७३३ ॥
भूषणम्. (1) - मण्डन (नपुं) किरीटम्. (2) - मुकुट (नपुं) , किरीट (पुं-नपुं)
शिरोमणिः. (2) - चूडामणि (पुं) , शिरोरत्न (नपुं) हारमध्यगमणिः. (1) - तरल (पुं)
चूदामणिः शिरोरत्नं तरलो हारमध्यगः॥ २.५.७३४ ॥
शिरोमणिः. (2) - चूडामणि (पुं) , शिरोरत्न (नपुं) हारमध्यगमणिः. (1) - तरल (पुं)
सीमन्तस्थितायाः स्वर्णादिपट्टिका. (2) - बालपाश्या (स्त्री) , पारितथ्या (स्त्री) ललाटाभरणम्. (2) - पत्रपाश्या (स्त्री) , ललाटिका (स्त्री)
वालपाश्या पारितथ्या पत्रपाश्या ललाटिका॥ २.५.७३५ ॥
सीमन्तस्थितायाः स्वर्णादिपट्टिका. (2) - बालपाश्या (स्त्री) , पारितथ्या (स्त्री) ललाटाभरणम्. (2) - पत्रपाश्या (स्त्री) , ललाटिका (स्त्री)
कर्णाभरणम्. (4) - कर्णिका (स्त्री) , तालपत्र (नपुं) , कुण्डल (नपुं) , कर्णवेष्टन (नपुं)
कर्णिका तालपत्रं स्यात्कुण्डलं कर्णवेष्टनम्॥ २.५.७३६ ॥
कर्णाभरणम्. (4) - कर्णिका (स्त्री) , तालपत्र (नपुं) , कुण्डल (नपुं) , कर्णवेष्टन (नपुं)
कण्ठाभरणम्. (2) - ग्रैवेयक (नपुं) , कण्ठभूषा (स्त्री) लम्बमानकण्ठभूषणम्. (2) - लम्बन (नपुं) , ललन्तिका (स्त्री)
ग्रैवेयकं कण्ठभूषा लम्बनं स्याल्ललन्तिका॥ २.५.७३७ ॥
कण्ठाभरणम्. (2) - ग्रैवेयक (नपुं) , कण्ठभूषा (स्त्री) लम्बमानकण्ठभूषणम्. (2) - लम्बन (नपुं) , ललन्तिका (स्त्री)
सुवर्णलम्बकण्ठिका. (1) - प्रालम्बिका (स्त्री) मौक्तिकमाला. (1) - उरःसूत्रिका (स्त्री)
स्वर्णैः प्रालम्बिकाऽथोरःसूत्रिका मौक्तिकैः कृता॥ २.५.७३८ ॥
सुवर्णलम्बकण्ठिका. (1) - प्रालम्बिका (स्त्री) मौक्तिकमाला. (1) - उरःसूत्रिका (स्त्री)
मौक्तिकमाला. (2) - हार (पुं) , मुक्तावली (स्त्री) शतलतिकाहारः. (1) - देवच्छन्द (पुं)
हारो मुक्तावली देवच्छन्दोऽसौ शतयष्टिका॥ २.५.७३९ ॥
मौक्तिकमाला. (2) - हार (पुं) , मुक्तावली (स्त्री) शतलतिकाहारः. (1) - देवच्छन्द (पुं)
द्वात्रिंश्ल्लतिकाहारः. (1) - गुत्स (पुं) चतुर्विंशतिलतिकाहारः. (1) - गुत्सार्ध (पुं) चतुर्लतिकाहारः. (1) - गोस्तन (पुं)
हारभेदा यष्टिभेदाद्गुच्छगुच्छार्धगोस्तनाः॥ २.५.७४० ॥
द्वात्रिंश्ल्लतिकाहारः. (1) - गुत्स (पुं) चतुर्विंशतिलतिकाहारः. (1) - गुत्सार्ध (पुं) चतुर्लतिकाहारः. (1) - गोस्तन (पुं)
द्वादशलतिकाहारः. (1) - अर्धहार (पुं) दशलतिकाहारः. (1) - माणवक (पुं) एकलतिकाहारः. (1) - एकावली (स्त्री)
अर्धहारो माणवक एकावल्येकयष्टिका॥ २.५.७४१ ॥
द्वादशलतिकाहारः. (1) - अर्धहार (पुं) दशलतिकाहारः. (1) - माणवक (पुं) एकलतिकाहारः. (1) - एकावली (स्त्री)
सप्तविंशतिमुक्ताभिः कृता माला. (1) - नक्षत्रमाला (स्त्री)
सैव नक्षत्रमाला स्यात्सप्तविंशतिमौक्तिकैः॥ २.५.७४२ ॥
सप्तविंशतिमुक्ताभिः कृता माला. (1) - नक्षत्रमाला (स्त्री)
करवलयः. (4) - आवापक (पुं) , पारिहार्य (पुं) , कटक (पुं-नपुं) , वलय (पुं-नपुं)
आवापकः पारिहार्यः कटको वलयोऽस्त्रियाम्॥ २.५.७४३ ॥
करवलयः. (4) - आवापक (पुं) , पारिहार्य (पुं) , कटक (पुं-नपुं) , वलय (पुं-नपुं)
प्रगण्डाभूषणम्. (2) - केयूर (पुं-नपुं) , अङ्गद (पुं-नपुं) अङ्गुलीभूषणम्. (2) - अङ्गुलीयक (पुं-नपुं) , ऊर्मिका (स्त्री)
केयूरमङ्गदं तुल्ये अङ्गुलीयकमूर्मिका॥ २.५.७४४ ॥
प्रगण्डाभूषणम्. (2) - केयूर (पुं-नपुं) , अङ्गद (पुं-नपुं) अङ्गुलीभूषणम्. (2) - अङ्गुलीयक (पुं-नपुं) , ऊर्मिका (स्त्री)
मुद्रिताङ्गुली. (1) - अङ्गुलिमुद्रा (स्त्री) मणिबन्धभूषणम्. (2) - कङ्कण (नपुं) , करभूषण (नपुं)
साक्षराङ्गुलिमुद्रा स्यात्कङ्कणं करभूषणम्॥ २.५.७४५ ॥
मुद्रिताङ्गुली. (1) - अङ्गुलिमुद्रा (स्त्री) मणिबन्धभूषणम्. (2) - कङ्कण (नपुं) , करभूषण (नपुं)
स्त्रीकटीभूषणम्. (4) - मेखला (स्त्री) , काञ्ची (स्त्री) , सप्तकी (स्त्री) , रशना (स्त्री)
स्त्रीकट्यां मेखला काञ्ची सप्तकी रशना तथा॥ २.५.७४६ ॥
स्त्रीकटीभूषणम्. (4) - मेखला (स्त्री) , काञ्ची (स्त्री) , सप्तकी (स्त्री) , रशना (स्त्री)
स्त्रीकटीभूषणम्. (1) - सारसन (नपुं) पुंस्कटीभूषणम्. (1) - शृङ्खल (वि)
क्लीबे सारसनं चाथ पुंस्कट्यां शृङ्खलं त्रिषु॥ २.५.७४७ ॥
स्त्रीकटीभूषणम्. (1) - सारसन (नपुं) पुंस्कटीभूषणम्. (1) - शृङ्खल (वि)
नूपुरः. (4) - पादाङ्गद (नपुं) , तुलाकोटि (पुं) , मञ्जीर (पुं-नपुं) , नूपुर (पुं-नपुं)
पादाङ्गदं तुलाकोटिर्मञ्जीरो नूपुरोऽस्त्रियाम्॥ २.५.७४८ ॥
नूपुरः. (4) - पादाङ्गद (नपुं) , तुलाकोटि (पुं) , मञ्जीर (पुं-नपुं) , नूपुर (पुं-नपुं)
मणियुक्तनूपुरः. (2) - हंसक (पुं) , पादकटक (पुं) किङ्किणी. (2) - किङ्किणी (स्त्री) , क्षुद्रघण्टिका (स्त्री)
हंसकः पादकटकः किङ्किणी क्षुद्रघण्टिका॥ २.५.७४९ ॥
मणियुक्तनूपुरः. (2) - हंसक (पुं) , पादकटक (पुं) किङ्किणी. (2) - किङ्किणी (स्त्री) , क्षुद्रघण्टिका (स्त्री)
वस्त्रयोनिः. (4) - त्वच् (स्त्री) , फल (नपुं) , कृमि (पुं) , रोमन् (नपुं)
त्वक्फलकृमिरोमाणि वस्त्रयोनिर्दश त्रिषु॥ २.५.७५० ॥
वस्त्रयोनिः. (4) - त्वच् (स्त्री) , फल (नपुं) , कृमि (पुं) , रोमन् (नपुं)
क्षौमवस्त्रम्. (1) - वाल्क (वि) कार्पासवस्त्रम्. (3) - फाल (वि) , कार्पास (वि) , बादर (वि)
वाल्कं क्षौमादि फालं तु कार्पासं बादरं च तत्॥ २.५.७५१ ॥
क्षौमवस्त्रम्. (1) - वाल्क (वि) कार्पासवस्त्रम्. (3) - फाल (वि) , कार्पास (वि) , बादर (वि)
कृमिकोशोत्थवस्त्रम्. (1) - कौशेय (वि) मृगरोमजवस्त्रम्. (1) - राङ्कव (वि)
कौशेयं कृमिकोशोत्थं राङ्कवं मृगरोमजम्॥ २.५.७५२ ॥
कृमिकोशोत्थवस्त्रम्. (1) - कौशेय (वि) मृगरोमजवस्त्रम्. (1) - राङ्कव (वि)
छेदभोगक्षालनरहितवस्त्रम्. (4) - अनाहत (वि) , निष्प्रवाणि (वि) , तन्त्रक (वि) , नवाम्बर (नपुं)
अनाहतं निष्प्रवाणि तन्त्रकं च नवाम्बरे॥ २.५.७५३ ॥
छेदभोगक्षालनरहितवस्त्रम्. (4) - अनाहत (वि) , निष्प्रवाणि (वि) , तन्त्रक (वि) , नवाम्बर (नपुं)
धौतवस्त्रयुगम्. (1) - उद्गमनीय (नपुं)
तस्यादुद्गमनीयं यद्धौतयोर्वस्त्रयोर्युगम्॥ २.५.७५४ ॥
धौतवस्त्रयुगम्. (1) - उद्गमनीय (नपुं)
धौतकौशेयम्. (2) - पत्रोर्ण (नपुं) , धौतकौशेय (नपुं) बहुमूल्यवस्त्रम्. (1) - बहुमूल्य (नपुं) बहुमूल्यवस्तु. (1) - महाधन (नपुं)
पत्रोर्णं धौतकौशेयं बहुमूल्यं महाधनम्॥ २.५.७५५ ॥
धौतकौशेयम्. (2) - पत्रोर्ण (नपुं) , धौतकौशेय (नपुं) बहुमूल्यवस्त्रम्. (1) - बहुमूल्य (नपुं) बहुमूल्यवस्तु. (1) - महाधन (नपुं)
पट्टवस्त्रम्. (2) - क्षौम (पुं-नपुं) , दुकूल (नपुं) आच्छादितवस्त्रम्. (2) - निवीत (वि) , प्रावृत (वि)
क्षौमं दुकूलं स्याद्द्वे तु निवीतं प्रावृतं त्रिषु॥ २.५.७५६ ॥
पट्टवस्त्रम्. (2) - क्षौम (पुं-नपुं) , दुकूल (नपुं) आच्छादितवस्त्रम्. (2) - निवीत (वि) , प्रावृत (वि)
वस्त्रान्तावयवः. (2) - दशा (स्त्री-पुं) , वस्ति (स्त्री-पुं)
स्त्रियां बहुत्वे वस्त्रस्य दशाः स्युर्वस्तयोर्द्वयोः॥ २.५.७५७ ॥
वस्त्रान्तावयवः. (2) - दशा (स्त्री-पुं) , वस्ति (स्त्री-पुं)
दैर्घ्यम्. (3) - दैर्घ्य (नपुं) , आयाम (पुं) , आनाह (पुं) विस्तारः. (2) - परिणाह (पुं) , विशालता (स्त्री)
दैर्घ्यमायाम आरोहः परिणाहो विशालता॥ २.५.७५८ ॥
दैर्घ्यम्. (3) - दैर्घ्य (नपुं) , आयाम (पुं) , आनाह (पुं) विस्तारः. (2) - परिणाह (पुं) , विशालता (स्त्री)
जीर्णवस्त्रम्. (2) - पटच्चर (नपुं) , जीर्णवस्त्र (नपुं) जीर्णवस्त्रखण्डः. (2) - नक्तक (पुं) , कर्पट (पुं)
पटच्चरं जीर्णवस्त्रं समौ नक्तककर्पटौ॥ २.५.७५९ ॥
जीर्णवस्त्रम्. (2) - पटच्चर (नपुं) , जीर्णवस्त्र (नपुं) जीर्णवस्त्रखण्डः. (2) - नक्तक (पुं) , कर्पट (पुं)
वस्त्रम्. (6) - वस्त्र (नपुं) , आच्छादन (नपुं) , वास (नपुं) , चेल (नपुं) , वसन (नपुं) , अंशुक (नपुं)
वस्त्रमाच्छादनं वासश्चैलं वसनमंशुकम्॥ २.५.७६० ॥
वस्त्रम्. (6) - वस्त्र (नपुं) , आच्छादन (नपुं) , वास (नपुं) , चेल (नपुं) , वसन (नपुं) , अंशुक (नपुं)
शोभनवस्त्रम्. (2) - सुचेलक (पुं) , पट (पुं-नपुं) स्थूलपटः. (2) - वराशि (पुं) , स्थूलशाटक (पुं)
सुचेलकः पटोऽस्त्री स्याद्वराशिः स्थूलशाटकः॥ २.५.७६१ ॥
शोभनवस्त्रम्. (2) - सुचेलक (पुं) , पट (पुं-नपुं) स्थूलपटः. (2) - वराशि (पुं) , स्थूलशाटक (पुं)
स्त्रीपिधानपटः. (2) - निचोल (वि) , प्रच्छदपट (पुं) कम्बलः. (2) - रल्लक (पुं) , कम्बल (पुं)
निचोलः प्रच्छदपटः समौ रल्लककम्बलौ॥ २.५.७६२ ॥
स्त्रीपिधानपटः. (2) - निचोल (वि) , प्रच्छदपट (पुं) कम्बलः. (2) - रल्लक (पुं) , कम्बल (पुं)
परिधानम्. (4) - अन्तरीय (नपुं) , उपसङ्ख्यान (नपुं) , परिधान (नपुं) , अधोम्शुक (नपुं)
अन्तरीयोपसंव्यानपरिधानान्यधोंशुके॥ २.५.७६३ ॥
परिधानम्. (4) - अन्तरीय (नपुं) , उपसङ्ख्यान (नपुं) , परिधान (नपुं) , अधोम्शुक (नपुं)
उपरिवस्त्रम्. (3) - प्रावार (पुं) , उत्तरासङ्ग (पुं) , बृहतिका (स्त्री)
द्वौ प्रावारोत्तरासङ्गौ समौ बृहतिका तथा॥ २.५.७६४ ॥
उपरिवस्त्रम्. (3) - प्रावार (पुं) , उत्तरासङ्ग (पुं) , बृहतिका (स्त्री)
उपरिवस्त्रम्. (2) - सङ्ख्यान (नपुं) , उत्तरीय (नपुं) स्त्रीणां कञ्चुलिशाख्यम्. (2) - चोल (पुं) , कूर्पासक (पुं-नपुं)
संव्यानमुत्तरीयं च चोलः कूर्पासकोऽस्त्रियाम्॥ २.५.७६५ ॥
उपरिवस्त्रम्. (2) - सङ्ख्यान (नपुं) , उत्तरीय (नपुं) स्त्रीणां कञ्चुलिशाख्यम्. (2) - चोल (पुं) , कूर्पासक (पुं-नपुं)
प्रावरणः. (1) - नीशार (पुं)
नीशारः स्यात्प्रावरणे हिमाऽनिलनिवारणे॥ २.५.७६६ ॥
प्रावरणः. (1) - नीशार (पुं)
अर्धोरुपिधायकवस्त्रम्. (2) - अर्धोरुक (नपुं) , चण्डातक (नपुं)
अर्धोरुकं वरस्त्रीणां स्याच्छण्डातकमस्त्रियाम्॥ २.५.७६७ ॥
अर्धोरुपिधायकवस्त्रम्. (2) - अर्धोरुक (नपुं) , चण्डातक (नपुं)
पादाग्रपर्यन्तलम्बमानवस्त्रम्. (1) - आप्रपदीन (वि)
स्यात् त्रिष्वाप्रपदीनं तत्प्राप्नोत्याप्रपदं हि यत्॥ २.५.७६८ ॥
पादाग्रपर्यन्तलम्बमानवस्त्रम्. (1) - आप्रपदीन (वि)
वितानम्. (2) - वितान (पुं-नपुं) , उल्लोच (पुं) वस्त्रगेहम्. (2) - दूष्य (नपुं) , वस्त्रवेश्मन् (नपुं)
अस्त्री वितानमुल्लोचो दूष्याद्यं वस्त्रवेश्मनि॥ २.५.७६९ ॥
वितानम्. (2) - वितान (पुं-नपुं) , उल्लोच (पुं) वस्त्रगेहम्. (2) - दूष्य (नपुं) , वस्त्रवेश्मन् (नपुं)
जवनिका. (3) - प्रतिसीरा (स्त्री) , जवनिका (स्त्री) , तिरस्करिणी (स्त्री)
प्रतिसीरा जवनिका स्यात्तिरस्करिणी च सा॥ २.५.७७० ॥
जवनिका. (3) - प्रतिसीरा (स्त्री) , जवनिका (स्त्री) , तिरस्करिणी (स्त्री)
शरीरशोभाककर्मः. (2) - परिकर्मन् (नपुं) , अङ्गसंस्कार (पुं) प्रोञ्चनादिनाङ्गनिर्मलीकरणम्. (3) - मार्ष्टि (स्त्री) , मार्जना (स्त्री) , मृजा (स्त्री)
परिकर्माङ्गसंस्कारः स्यान्मार्ष्टिर्मार्जना मृजा॥ २.५.७७१ ॥
शरीरशोभाककर्मः. (2) - परिकर्मन् (नपुं) , अङ्गसंस्कार (पुं) प्रोञ्चनादिनाङ्गनिर्मलीकरणम्. (3) - मार्ष्टि (स्त्री) , मार्जना (स्त्री) , मृजा (स्त्री)
उद्वर्तनद्रव्येणाङ्गनिर्मलीकरणम्. (2) - उद्वर्तन (नपुं) , उत्सादन (नपुं) स्नानम्. (2) - आप्लाव (पुं) , आप्लव (पुं)
उद्वर्तनोत्सादने द्वे समे आप्लाव आप्लवः॥ २.५.७७२ ॥
उद्वर्तनद्रव्येणाङ्गनिर्मलीकरणम्. (2) - उद्वर्तन (नपुं) , उत्सादन (नपुं) स्नानम्. (2) - आप्लाव (पुं) , आप्लव (पुं)
स्नानम्. (1) - स्नान (नपुं) चन्दनादिना देहविलेपनम्. (3) - चर्चा (स्त्री) , चार्चिक्य (नपुं) , स्थासक (पुं) गतगन्धस्य प्रयत्नेनोद्बोधनम्. (1) - प्रबोधन (नपुं)
स्नानं चर्चा तु चार्चिक्यं स्थासकोऽथ प्रबोधनम्॥ २.५.७७३ ॥
स्नानम्. (1) - स्नान (नपुं) चन्दनादिना देहविलेपनम्. (3) - चर्चा (स्त्री) , चार्चिक्य (नपुं) , स्थासक (पुं) गतगन्धस्य प्रयत्नेनोद्बोधनम्. (1) - प्रबोधन (नपुं)
गतगन्धस्य प्रयत्नेनोद्बोधनम्. (1) - अनुबोध (पुं) कस्तूरिकादिना कपोलादौ रचिततिलकविशेषः. (2) - पत्रलेखा (स्त्री) , पत्राङ्गुलि (स्त्री)
अनुबोधः पत्रलेखा पत्राङ्गुलिरिमे समे॥ २.५.७७४ ॥
गतगन्धस्य प्रयत्नेनोद्बोधनम्. (1) - अनुबोध (पुं) कस्तूरिकादिना कपोलादौ रचिततिलकविशेषः. (2) - पत्रलेखा (स्त्री) , पत्राङ्गुलि (स्त्री)
ललाटकृततिलकम्. (4) - तमालपत्र (नपुं) , तिलक (पुं-नपुं) , चित्रक (नपुं) , विशेषक (पुं-नपुं)
तमालपत्रतिलकचित्रकाणि विशेषकम्॥ २.५.७७५ ॥
ललाटकृततिलकम्. (4) - तमालपत्र (नपुं) , तिलक (पुं-नपुं) , चित्रक (नपुं) , विशेषक (पुं-नपुं)
कुङ्कुमम्. (1) - कुङ्कुम (नपुं)
द्वितीयं च तुरीयं च न स्त्रियामथ कुङ्कुमम्॥ २.५.७७६ ॥
कुङ्कुमम्. (1) - कुङ्कुम (नपुं)
कुङ्कुमम्. (5) - काश्मीरजन्मन् (नपुं) , अग्निशिख (नपुं) , वर (नपुं) , बाह्लीक (नपुं) , पीतन (नपुं)
काश्मीरजन्माग्निशिखं वरं बाह्लीकपीतने॥ २.५.७७७ ॥
कुङ्कुमम्. (5) - काश्मीरजन्मन् (नपुं) , अग्निशिख (नपुं) , वर (नपुं) , बाह्लीक (नपुं) , पीतन (नपुं)
कुङ्कुमम्. (5) - रक्त (नपुं) , सङ्कोच (नपुं) , पिशुन (नपुं) , धीरन् (नपुं) , लोहितचन्दन (नपुं)
रक्तसंकोचपिशुनं धीरं लोहितचन्दनम्॥ २.५.७७८ ॥
कुङ्कुमम्. (5) - रक्त (नपुं) , सङ्कोच (नपुं) , पिशुन (नपुं) , धीरन् (नपुं) , लोहितचन्दन (नपुं)
लाक्षा. (6) - लाक्षा (स्त्री) , राक्षा (स्त्री) , जतु (नपुं) , याव (पुं) , अलक्त (पुं) , द्रुमामय (पुं)
लाक्षा राक्षा जतु क्लीबे यावोऽलक्तो द्रुमामयः॥ २.५.७७९ ॥
लाक्षा. (6) - लाक्षा (स्त्री) , राक्षा (स्त्री) , जतु (नपुं) , याव (पुं) , अलक्त (पुं) , द्रुमामय (पुं)
लवङ्गम्. (3) - लवङ्ग (नपुं) , देवकुसुम (नपुं) , श्रीसंज्ञ (नपुं) सुगन्धद्रव्यभेदः. (1) - जायक (नपुं)
लवङ्गं देवकुसुमं श्रीसंज्ञमथ जायकम्॥ २.५.७८० ॥
लवङ्गम्. (3) - लवङ्ग (नपुं) , देवकुसुम (नपुं) , श्रीसंज्ञ (नपुं) सुगन्धद्रव्यभेदः. (1) - जायक (नपुं)
सुगन्धद्रव्यभेदः. (2) - कालीयक (नपुं) , कालानुसार्य (नपुं) अगरु. (1) - समार्थक (वि)
कालीयकं च कालानुसार्यं चाथ समार्थकम्॥ २.५.७८१ ॥
सुगन्धद्रव्यभेदः. (2) - कालीयक (नपुं) , कालानुसार्य (नपुं) अगरु. (1) - समार्थक (वि)
अगरु. (6) - वंशका (नपुं) , अगुरु (नपुं) , राजार्ह (नपुं) , लोह (नपुं) , कृमिज (नपुं) , जोङ्गक (नपुं)
वंशिकागुरुराजार्हलोहकृमिजजोङ्गकम्॥ २.५.७८२ ॥
अगरु. (6) - वंशका (नपुं) , अगुरु (नपुं) , राजार्ह (नपुं) , लोह (नपुं) , कृमिज (नपुं) , जोङ्गक (नपुं)
कालागुरु. (2) - कालागुरु (नपुं) , अगुरु (नपुं) मङ्गल्या. (2) - मङ्गल्या (नपुं) , मल्लिगन्धि (नपुं)
कालागुर्वगुरु स्यात्तु मङ्गल्या मल्लिगन्धि यत्॥ २.५.७८३ ॥
कालागुरु. (2) - कालागुरु (नपुं) , अगुरु (नपुं) मङ्गल्या. (2) - मङ्गल्या (नपुं) , मल्लिगन्धि (नपुं)
रालः. (4) - यक्षधूप (पुं) , सर्जरस (पुं) , राल (पुं) , सर्वरस (पुं)
यक्षधूपः सर्जरसो रालसर्वरसावपि॥ २.५.७८४ ॥
रालः. (4) - यक्षधूप (पुं) , सर्जरस (पुं) , राल (पुं) , सर्वरस (पुं)
रालः. (1) - बहुरूप (पुं) दशाङ्गादिधूपः. (2) - वृकधूप (पुं) , कृत्रिमधूपक (पुं)
बहुरूपोऽप्यथ वृकधूपकृत्रिमधूपकौ॥ २.५.७८५ ॥
रालः. (1) - बहुरूप (पुं) दशाङ्गादिधूपः. (2) - वृकधूप (पुं) , कृत्रिमधूपक (पुं)
सिल्हाख्यगन्धद्रव्यम्. (4) - तुरुष्क (पुं) , पिण्डक (पुं) , सिल्ह (पुं) , यावन (पुं) सरलद्रवः. (1) - पायस (पुं)
तुरुष्कः पिण्डकः सिह्लो यावनोऽप्यथ पायसः॥ २.५.७८६ ॥
सिल्हाख्यगन्धद्रव्यम्. (4) - तुरुष्क (पुं) , पिण्डक (पुं) , सिल्ह (पुं) , यावन (पुं) सरलद्रवः. (1) - पायस (पुं)
सरलद्रवः. (4) - श्रीवास (पुं) , वृकधूप (पुं) , श्रीवेष्ट (पुं) , सरलद्रव (पुं)
श्रीवासो वृकधूपोऽपि श्रीवेष्टसरलद्रवौ॥ २.५.७८७ ॥
सरलद्रवः. (4) - श्रीवास (पुं) , वृकधूप (पुं) , श्रीवेष्ट (पुं) , सरलद्रव (पुं)
कस्तूरी. (3) - मृगनाभि (पुं) , मृगमद (पुं) , कस्तूरी (स्त्री) फलकर्पूरः. (1) - कोलक (नपुं)
मृगनाभिर्मृगमदः कस्तूरी चाथ कोलकम्॥ २.५.७८८ ॥
कस्तूरी. (3) - मृगनाभि (पुं) , मृगमद (पुं) , कस्तूरी (स्त्री) फलकर्पूरः. (1) - कोलक (नपुं)
फलकर्पूरः. (2) - कक्कोलक (नपुं) , कोशफल (नपुं) कर्पूरम्. (1) - कर्पूर (पुं-नपुं)
कङ्कोलकं कोशफलमथ कर्पूरमस्त्रियाम्॥ २.५.७८९ ॥
फलकर्पूरः. (2) - कक्कोलक (नपुं) , कोशफल (नपुं) कर्पूरम्. (1) - कर्पूर (पुं-नपुं)
कर्पूरम्. (4) - घनसार (पुं) , चन्द्रसंज्ञ (पुं) , सिताभ्र (पुं) , हिमवालुका (स्त्री)
घनसारश्चन्द्रसंज्ञः सिताभ्रो हिमवालुका ॥
कर्पूरम्. (4) - घनसार (पुं) , चन्द्रसंज्ञ (पुं) , सिताभ्र (पुं) , हिमवालुका (स्त्री)
चन्दनः. (4) - गन्धसार (पुं) , मलयज (पुं) , भद्रश्री (स्त्री) , चन्दन (पुं-नपुं)
गन्धसारो मलयजो भद्रश्रीश्चन्दनोऽस्त्रिया ॥
चन्दनः. (4) - गन्धसार (पुं) , मलयज (पुं) , भद्रश्री (स्त्री) , चन्दन (पुं-नपुं)
चन्दनविशेषः. (3) - तैलपर्णिक (नपुं) , गोशीर्ष (नपुं) , हरिचन्दन (पुं-नपुं)
तैलपर्णिकगोशीर्षे हरिचन्दनमस्त्रियाम्॥ २.५.७९० ॥
चन्दनविशेषः. (3) - तैलपर्णिक (नपुं) , गोशीर्ष (नपुं) , हरिचन्दन (पुं-नपुं)
रक्तचन्दनः. (4) - तिलपर्णी (स्त्री) , पत्राङ्ग (नपुं) , रञ्जन (नपुं) , रक्तचन्दन (नपुं)
तिलपर्णी तु पत्राङ्गं रञ्जनं रक्तचन्दनम्॥ २.५.७९१ ॥
रक्तचन्दनः. (4) - तिलपर्णी (स्त्री) , पत्राङ्ग (नपुं) , रञ्जन (नपुं) , रक्तचन्दन (नपुं)
रक्तचन्दनः. (1) - कुचन्दन (नपुं) जातीफलम्. (2) - जातीकोश (नपुं) , जातीफल (नपुं)
कुचन्दनं चाथ जातीकोशजातीफले समे॥ २.५.७९२ ॥
रक्तचन्दनः. (1) - कुचन्दन (नपुं) जातीफलम्. (2) - जातीकोश (नपुं) , जातीफल (नपुं)
लेपविशेषः. (1) - यक्षकर्दम (पुं)
कर्पूरागुरुकस्तूरीकक्कोलैर्यक्षकर्दमः॥ २.५.७९३ ॥
लेपविशेषः. (1) - यक्षकर्दम (पुं)
गात्रानुलेपयोग्यसुगन्धिद्रव्यम्. (4) - गात्रानुलेपनी (स्त्री) , वर्ति (स्त्री) , वर्णक (नपुं) , विलेपन (नपुं)
गात्रानुलेपनी वर्तिर्वर्णकं स्याद्विलेपनम्॥ २.५.७९४ ॥
गात्रानुलेपयोग्यसुगन्धिद्रव्यम्. (4) - गात्रानुलेपनी (स्त्री) , वर्ति (स्त्री) , वर्णक (नपुं) , विलेपन (नपुं)
पटवासादिक्षोदचूर्णाः. (2) - चूर्ण (नपुं) , वासयोग (पुं) द्रव्यभावितवस्तु. (2) - भावित (वि) , वासित (वि)
चूर्णानि वासयोगाः स्युर्भावितं वासितं त्रिषु॥ २.५.७९५ ॥
पटवासादिक्षोदचूर्णाः. (2) - चूर्ण (नपुं) , वासयोग (पुं) द्रव्यभावितवस्तु. (2) - भावित (वि) , वासित (वि)
गन्धपुष्पोपचारः. (1) - अधिवासन (नपुं)
संस्कारो गन्धमाल्याद्यैर्यः स्यात्तदधिवासनम्॥ २.५.७९६ ॥
गन्धपुष्पोपचारः. (1) - अधिवासन (नपुं)
मूर्ध्निधृतकुसुमावलिः. (3) - माल्य (नपुं) , माला (स्त्री) , स्रज् (स्त्री) केशमध्यगर्भमाला. (1) - गर्भक (पुं)
माल्यं मालास्रजौ मूर्ध्नि केशमध्ये तु गर्भकः॥ २.५.७९७ ॥
मूर्ध्निधृतकुसुमावलिः. (3) - माल्य (नपुं) , माला (स्त्री) , स्रज् (स्त्री) केशमध्यगर्भमाला. (1) - गर्भक (पुं)
शिखायां लम्बमानपुष्पमाला. (1) - प्रभ्रष्टक (नपुं) ललाटधृतपुष्पमाला. (1) - ललामक (नपुं)
प्रभ्रष्तकं शिखालम्बि पुरोन्यस्तं ललामकम्॥ २.५.७९८ ॥
शिखायां लम्बमानपुष्पमाला. (1) - प्रभ्रष्टक (नपुं) ललाटधृतपुष्पमाला. (1) - ललामक (नपुं)
कण्ठे ऋजुलम्बमानपुष्पमाला. (1) - प्रालम्ब (नपुं) यज्ञोपवीतवर्त्तियग्धृतपुष्पमाला. (1) - वैकक्षिक (नपुं)
प्रालम्बमृजुलम्बि स्यात्कण्ठाद्वैकक्षिकं तु तत्॥ २.५.७९९ ॥
कण्ठे ऋजुलम्बमानपुष्पमाला. (1) - प्रालम्ब (नपुं) यज्ञोपवीतवर्त्तियग्धृतपुष्पमाला. (1) - वैकक्षिक (नपुं)
शिखास्थमाल्यम्. (2) - आपीड (पुं) , शेखर (पुं)
यत्तिर्यक् क्षिप्तमुरसि शिखास्वापीडशेखरौ॥ २.५.८०० ॥
शिखास्थमाल्यम्. (2) - आपीड (पुं) , शेखर (पुं)
माल्यादिरचना. (2) - रचना (स्त्री) , परिस्पन्द (पुं) सर्वोपचारपरिपूर्णता. (2) - आभोग (पुं) , परिपूर्णता (स्त्री)
रचना स्यात्परिस्यन्द आभोगः परिपूर्णता॥ २.५.८०१ ॥
माल्यादिरचना. (2) - रचना (स्त्री) , परिस्पन्द (पुं) सर्वोपचारपरिपूर्णता. (2) - आभोग (पुं) , परिपूर्णता (स्त्री)
शिरोनिधानम्. (2) - उपधान (नपुं) , उपबर्ह (पुं) शय्या. (2) - शय्या (स्त्री) , शयनीय (नपुं)
उपधानं तूपबर्हः शय्यायां शयनीयवत्॥ २.५.८०२ ॥
शिरोनिधानम्. (2) - उपधान (नपुं) , उपबर्ह (पुं) शय्या. (2) - शय्या (स्त्री) , शयनीय (नपुं)
शय्या. (1) - शयन (नपुं) पर्यङ्कः. (4) - मञ्च (पुं) , पर्यङ्क (पुं) , पल्यङ्क (पुं) , खट्वा (स्त्री)
शयनं मञ्चपर्यङ्कपल्यङ्काः खट्व्या समाः॥ २.५.८०३ ॥
शय्या. (1) - शयन (नपुं) पर्यङ्कः. (4) - मञ्च (पुं) , पर्यङ्क (पुं) , पल्यङ्क (पुं) , खट्वा (स्त्री)
कन्दुकः. (2) - गेन्दुक (पुं) , कन्दुक (पुं) दीपः. (2) - दीप (पुं) , प्रदीप (पुं) आसनम्. (2) - पीठ (नपुं) , आसन (नपुं)
गेन्दुकः कन्दुको दीपः प्रदीपः पीठमासनम्॥ २.५.८०४ ॥
कन्दुकः. (2) - गेन्दुक (पुं) , कन्दुक (पुं) दीपः. (2) - दीप (पुं) , प्रदीप (पुं) आसनम्. (2) - पीठ (नपुं) , आसन (नपुं)
सम्पुटः. (2) - समुद्गक (पुं) , सम्पुटक (पुं) प्रतिग्राहः. (2) - प्रतिग्राह (पुं) , पतद्ग्रह (पुं)
समुद्गकः संपुटकः प्रतिग्राहः पतद्ग्रहः॥ २.५.८०५ ॥
सम्पुटः. (2) - समुद्गक (पुं) , सम्पुटक (पुं) प्रतिग्राहः. (2) - प्रतिग्राह (पुं) , पतद्ग्रह (पुं)
केशमार्जनी. (2) - प्रसाधनी (स्त्री) , कङ्कतिका (स्त्री) पटवासकचूर्णः. (2) - पिष्टात (पुं) , पटवासक (पुं)
प्रसाधनी कङ्कतिका पिष्टातः पटवासकः॥ २.५.८०६ ॥
केशमार्जनी. (2) - प्रसाधनी (स्त्री) , कङ्कतिका (स्त्री) पटवासकचूर्णः. (2) - पिष्टात (पुं) , पटवासक (पुं)
दर्पणः. (3) - दर्पण (पुं-नपुं) , मुकुर (पुं) , आदर्श (पुं) व्यजनम्. (2) - व्यजन (नपुं) , तालवृन्तक (नपुं)
दर्पणे मुकुरादर्शौ व्यजनं तालवृन्तकम् ॥ २.५.८०७ ॥
दर्पणः. (3) - दर्पण (पुं-नपुं) , मुकुर (पुं) , आदर्श (पुं) व्यजनम्. (2) - व्यजन (नपुं) , तालवृन्तक (नपुं)
इति मनुष्यवर्गः

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