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इति वनौषधिवर्गः
अथ सिंहादि वर्गः
सिंहः. (6) - सिंह (पुं) , मृगेन्द्र (पुं) , पञ्चास्य (पुं) , हर्यक्ष (पुं) , केसरिन् (पुं) , हरि (पुं)
सिंहो मृगेन्द्रः पञ्चास्यो हर्यक्षः केसरी हरिः॥ २.४.४३७ ॥
सिंहः. (6) - सिंह (पुं) , मृगेन्द्र (पुं) , पञ्चास्य (पुं) , हर्यक्ष (पुं) , केसरिन् (पुं) , हरि (पुं)
सिंहः. (4) - कण्ठीरव (पुं) , मृगारिपु (पुं) , मृगदृष्टि (पुं) , मृगाशन (पुं)
कण्टीरवो मृगारिपुर्मृगदृष्टिर्मृगाशनः॥ २.४.४३८ ॥
सिंहः. (4) - कण्ठीरव (पुं) , मृगारिपु (पुं) , मृगदृष्टि (पुं) , मृगाशन (पुं)
सिंहः. (4) - पुण्डरीक (पुं) , पञ्चनख (पुं) , चित्रकाय (पुं) , मृगद्विष् (पुं)
पुण्डरीकः पञ्चनखचित्रकायमृगद्विषः॥ २.४.४३९ ॥
सिंहः. (4) - पुण्डरीक (पुं) , पञ्चनख (पुं) , चित्रकाय (पुं) , मृगद्विष् (पुं)
व्याघ्रः. (3) - शार्दूल (पुं) , द्वीपिन् (पुं) , व्याघ्र (पुं) तरक्षुः. (2) - तरक्षु (पुं) , मृगादन (पुं)
शार्दूलद्वीपिनौ व्याघ्रे तरक्षुस्तु मृगादनः ९९०॥ २.४.४४० ॥
व्याघ्रः. (3) - शार्दूल (पुं) , द्वीपिन् (पुं) , व्याघ्र (पुं) तरक्षुः. (2) - तरक्षु (पुं) , मृगादन (पुं)
वराहः. (7) - वराह (पुं) , सूकर (पुं) , घृष्टि (पुं) , कोल (पुं) , पोत्रिन् (पुं) , किरि (पुं) , किटि (पुं)
वराहः सूकरो घृष्टिः कोलः पोत्री किरिः किटिः॥ २.४.४४१ ॥
वराहः. (7) - वराह (पुं) , सूकर (पुं) , घृष्टि (पुं) , कोल (पुं) , पोत्रिन् (पुं) , किरि (पुं) , किटि (पुं)
वराहः. (5) - दंष्ट्रिन् (पुं) , घोणिन् (पुं) , स्तब्धरोमन् (पुं) , क्रोड (पुं) , भूदार (पुं)
दंष्ट्री घोणी स्तब्धरोमा क्रोडो भूदार इत्यपि॥ २.४.४४२ ॥
वराहः. (5) - दंष्ट्रिन् (पुं) , घोणिन् (पुं) , स्तब्धरोमन् (पुं) , क्रोड (पुं) , भूदार (पुं)
वानरः. (5) - कपि (पुं) , प्लवङ्ग (पुं) , प्लवग (पुं) , शाखामृग (पुं) , वलीमुख (पुं)
कपिप्लवंगप्लवगशाखामृगवलीमुखाः॥ २.४.४४३ ॥
वानरः. (5) - कपि (पुं) , प्लवङ्ग (पुं) , प्लवग (पुं) , शाखामृग (पुं) , वलीमुख (पुं)
वानरः. (4) - मर्कट (पुं) , वानर (पुं) , कीश (पुं) , वनौकस् (पुं) भल्लूकः. (1) - भल्लुक (पुं)
मर्कटो वानरः कीशो वनौका अथ भल्लुके॥ २.४.४४४ ॥
वानरः. (4) - मर्कट (पुं) , वानर (पुं) , कीश (पुं) , वनौकस् (पुं) भल्लूकः. (1) - भल्लुक (पुं)
भल्लूकः. (3) - ऋक्षाच्छ (पुं) , भल्ल (पुं) , भालूक (पुं) गण्डकः. (3) - गण्डक (पुं) , खड्ग (पुं) , खड्गिन् (पुं)
ऋक्षाच्छभल्लभल्लूका गण्डके खड्गखड्गिनौ॥ २.४.४४५ ॥
भल्लूकः. (3) - ऋक्षाच्छ (पुं) , भल्ल (पुं) , भालूक (पुं) गण्डकः. (3) - गण्डक (पुं) , खड्ग (पुं) , खड्गिन् (पुं)
महिषः. (5) - लुलाय (पुं) , महिष (पुं) , वाहद्विषत् (पुं) , कासर (पुं) , सैरिभ (पुं)
लुलायो महिषो वाहाद्विषत्कासरसैरिभाः॥ २.४.४४६ ॥
महिषः. (5) - लुलाय (पुं) , महिष (पुं) , वाहद्विषत् (पुं) , कासर (पुं) , सैरिभ (पुं)
जम्भूकः. (4) - शिवा (स्त्री) , भूरिमाय (पुं) , गोमायु (पुं) , मृगधूर्तक (पुं)
स्त्रियां शिवा भूरिमायगोमायुमृगधूर्तकाः॥ २.४.४४७ ॥
जम्भूकः. (4) - शिवा (स्त्री) , भूरिमाय (पुं) , गोमायु (पुं) , मृगधूर्तक (पुं)
जम्भूकः. (6) - शृगाल (पुं) , वञ्चक (पुं) , क्रोष्टु (पुं) , फेरु (पुं) , फेरव (पुं) , जम्बुक (पुं)
शृगालवञ्चकक्रोष्टुफेरुफेरवजम्बुकाः॥ २.४.४४८ ॥
जम्भूकः. (6) - शृगाल (पुं) , वञ्चक (पुं) , क्रोष्टु (पुं) , फेरु (पुं) , फेरव (पुं) , जम्बुक (पुं)
मार्जारः. (5) - ओतु (पुं) , बिडाल (पुं) , मार्जार (पुं) , वृषदंशक (पुं) , आखुभुज् (पुं)
ओतुर्बिडालो मार्जारो वृषदंशक आखुभुक्॥ २.४.४४९ ॥
मार्जारः. (5) - ओतु (पुं) , बिडाल (पुं) , मार्जार (पुं) , वृषदंशक (पुं) , आखुभुज् (पुं)
कृष्णसर्पात् गोधायाम् जातः. (4) - गौधार (पुं) , गौधेर (पुं) , गौधेय (पुं) , गोधिकात्मज (पुं)
त्रयो गौधेरगौधारगौधेया गोधिकात्मजे १०००॥ २.४.४५० ॥
कृष्णसर्पात् गोधायाम् जातः. (4) - गौधार (पुं) , गौधेर (पुं) , गौधेय (पुं) , गोधिकात्मज (पुं)
शल्यः. (2) - श्वाविध् (पुं) , शल्य (पुं) शल्यरोमाणि. (3) - शलली (स्त्री) , शलल (नपुं) , शल (नपुं)
श्वावित्तु शल्यस्तल्लोम्नि शलली शललं शलम्॥ २.४.४५१ ॥
शल्यः. (2) - श्वाविध् (पुं) , शल्य (पुं) शल्यरोमाणि. (3) - शलली (स्त्री) , शलल (नपुं) , शल (नपुं)
समीरमृगः. (2) - वातप्रमी (पुं) , वातमृग (पुं) वृकः. (3) - कोक (पुं) , ईहामृग (पुं) , वृक (पुं)
वातप्रमीर्वातमृगः कोकस्त्वीहामृगो वृकः॥ २.४.४५२ ॥
समीरमृगः. (2) - वातप्रमी (पुं) , वातमृग (पुं) वृकः. (3) - कोक (पुं) , ईहामृग (पुं) , वृक (पुं)
हरिणः. (5) - मृग (पुं) , कुरङ्ग (पुं) , वातायु (पुं) , हरिण (पुं) , अजिनयोनि (पुं)
मृगे कुरङ्गवातायुहरिणाजिनयोनयः॥ २.४.४५३ ॥
हरिणः. (5) - मृग (पुं) , कुरङ्ग (पुं) , वातायु (पुं) , हरिण (पुं) , अजिनयोनि (पुं)
एण्याः अजिनादिः. (1) - ऐणेय (वि) एणस्याजिनादिः. (1) - ऐण (वि)
ऐणेयमेण्याश्चर्माध्यमेणस्यैणमुभे त्रिषु॥ २.४.४५४ ॥
एण्याः अजिनादिः. (1) - ऐणेय (वि) एणस्याजिनादिः. (1) - ऐण (वि)
अजिनजातीयमृगः. (5) - कदली (स्त्री) , कन्दली (स्त्री) , चीन (पुं) , चमूरु (पुं) , प्रियक (पुं)
कदली कन्दली चीनश्चमूरुप्रियकावपि॥ २.४.४५५ ॥
अजिनजातीयमृगः. (5) - कदली (स्त्री) , कन्दली (स्त्री) , चीन (पुं) , चमूरु (पुं) , प्रियक (पुं)
अजिनजातीयमृगः. (3) - समूरु (पुं) , हरिण (पुं) , अमी (पुं)
समूरुश्चेति हरिणा अमी अजिनयोनयः॥ २.४.४५६ ॥
अजिनजातीयमृगः. (3) - समूरु (पुं) , हरिण (पुं) , अमी (पुं)
मृगभेदः. (6) - कृष्णसार (पुं) , रुरु (पुं) , न्यङ्कु (पुं) , रङ्कु (पुं) , शम्बर (पुं) , रौहिष (पुं)
कृष्णसाररुरुन्यङ्कुरङ्कुशम्बररौहिषाः॥ २.४.४५७ ॥
मृगभेदः. (6) - कृष्णसार (पुं) , रुरु (पुं) , न्यङ्कु (पुं) , रङ्कु (पुं) , शम्बर (पुं) , रौहिष (पुं)
मृगभेदः. (7) - गोकर्ण (पुं) , पृषत (पुं) , एण (पुं) , ऋश्य (पुं) , रोहित (पुं) , चमर (पुं) , मृग (पुं)
गोकर्णपृषतैणर्श्यरोहिताश्चमरो मृगाः॥ २.४.४५८ ॥
मृगभेदः. (7) - गोकर्ण (पुं) , पृषत (पुं) , एण (पुं) , ऋश्य (पुं) , रोहित (पुं) , चमर (पुं) , मृग (पुं)
मृगभेदः. (5) - गन्धर्व (पुं) , शरभ (पुं) , राम (पुं) , सृमर (पुं) , गवय (पुं) शशः. (1) - शश (पुं)
गन्धर्वः शरभो रामः सृमरो गवयः शशः॥ २.४.४५९ ॥
मृगभेदः. (5) - गन्धर्व (पुं) , शरभ (पुं) , राम (पुं) , सृमर (पुं) , गवय (पुं) शशः. (1) - शश (पुं)
पशुः. (1) - पशु (पुं)
इत्यादयो मृगेन्द्राद्या गवाद्याः पशुजातयः॥ २.४.४६० ॥
पशुः. (1) - पशु (पुं)
मूषकः. (5) - अधोगन्तृ (पुं) , खनक (पुं) , वृक (पुं) , पुन्ध्वज (पुं) , उन्दुर (पुं)
अधोगन्ता तु खनको वृकः पुंध्वज उन्दुरः॥ २.४.४६१ ॥
मूषकः. (5) - अधोगन्तृ (पुं) , खनक (पुं) , वृक (पुं) , पुन्ध्वज (पुं) , उन्दुर (पुं)
मूषकः. (3) - उन्दुरु (पुं) , मूषक (पुं) , आखु (पुं) स्वल्पमूषकजातिः. (2) - गिरिका (स्त्री) , बालमूषिका (स्त्री)
उन्दुरुर्मूषकोऽप्याखुर्गिरिका बालमूषिका॥ २.४.४६२ ॥
मूषकः. (3) - उन्दुरु (पुं) , मूषक (पुं) , आखु (पुं) स्वल्पमूषकजातिः. (2) - गिरिका (स्त्री) , बालमूषिका (स्त्री)
चुचुन्दरी गन्धमूषी दीर्घदेही तु मूषिका॥ २.४.४६३ ॥
सरटः कृकलासः स्यान्मुसली गृहगोधिका॥ २.४.४६४ ॥
ऊर्णनाभः. (4) - लूता (स्त्री) , तन्तुवाय (पुं) , ऊर्णनाभ (पुं) , मर्कटक (पुं)
लूता स्त्री तन्तुवायोर्णनाभमर्कटकाः समाः॥ २.४.४६५ ॥
ऊर्णनाभः. (4) - लूता (स्त्री) , तन्तुवाय (पुं) , ऊर्णनाभ (पुं) , मर्कटक (पुं)
कृमिः. (2) - नीलङ्गु (पुं) , कृमि (पुं) कर्णजलौका. (2) - कर्णजलौका (स्त्री) , शतपदी (स्त्री)
नीलङ्गुस्तु कृमिः कर्णजलौकाः शतपद्युभे॥ २.४.४६६ ॥
कृमिः. (2) - नीलङ्गु (पुं) , कृमि (पुं) कर्णजलौका. (2) - कर्णजलौका (स्त्री) , शतपदी (स्त्री)
ऊर्णादिभक्षककृमिविशेषः. (2) - वृश्चिक (पुं) , शूककीट (पुं) वृश्चिकः. (3) - अलि (पुं) , द्रुण (पुं) , वृश्चिक (पुं)
वृश्चिकः शूककीटः स्यादलिद्रुणौ तु वृश्चिके॥ २.४.४६७ ॥
ऊर्णादिभक्षककृमिविशेषः. (2) - वृश्चिक (पुं) , शूककीट (पुं) वृश्चिकः. (3) - अलि (पुं) , द्रुण (पुं) , वृश्चिक (पुं)
कपोतः. (3) - पारावत (पुं) , कलरव (पुं) , कपोत (पुं) श्येनः. (1) - शशादन (पुं)
पारावतः कलरवः कपोतोऽथ शशादनः॥ २.४.४६८ ॥
कपोतः. (3) - पारावत (पुं) , कलरव (पुं) , कपोत (पुं) श्येनः. (1) - शशादन (पुं)
श्येनः. (2) - पत्रिन् (पुं) , श्येन (पुं) उलूकः. (3) - उलूक (पुं) , वायसाराति (पुं) , पेचक (पुं)
पत्री श्येन उलूकस्तु वायसारातिपेचकौ॥ २.४.४६९ ॥
श्येनः. (2) - पत्रिन् (पुं) , श्येन (पुं) उलूकः. (3) - उलूक (पुं) , वायसाराति (पुं) , पेचक (पुं)
उलूकः. (5) - दिवान्ध (पुं) , कौशिक (पुं) , घूक (पुं) , दिवाभीत (पुं) , निशाटन (पुं)
दिवान्धः कौशिको घूको दिवाभीतो निशाटनः॥ २.४.४७० ॥
उलूकः. (5) - दिवान्ध (पुं) , कौशिक (पुं) , घूक (पुं) , दिवाभीत (पुं) , निशाटन (पुं)
भरद्वाजपक्षी. (2) - व्याघ्राट (पुं) , भरद्वाज (पुं) खञ्जनः. (2) - खञ्जरीट (पुं) , खञ्जन (पुं)
व्याघ्राटः स्याद्भरद्वाजः खञ्जरीटस्तु खञ्जनः॥ २.४.४७१ ॥
भरद्वाजपक्षी. (2) - व्याघ्राट (पुं) , भरद्वाज (पुं) खञ्जनः. (2) - खञ्जरीट (पुं) , खञ्जन (पुं)
कङ्कः. (2) - लोहपृष्ठ (पुं) , कङ्क (पुं) चाषः. (2) - चाष (पुं) , किकीदिवि (पुं)
लोहपृष्ठस्तु कङ्कः स्यादथ चाषः किकीदिविः॥ २.४.४७२ ॥
कङ्कः. (2) - लोहपृष्ठ (पुं) , कङ्क (पुं) चाषः. (2) - चाष (पुं) , किकीदिवि (पुं)
भृङ्गः. (3) - कलिङ्ग (पुं) , भृङ्ग (पुं) , धूम्याट (पुं) काष्ठकुट्टः. (1) - शतपत्रक (पुं)
कलिङ्गभृङ्गधूम्याटा अथ स्याच्छतपत्रकः ॥ २.४.४७३ ॥
भृङ्गः. (3) - कलिङ्ग (पुं) , भृङ्ग (पुं) , धूम्याट (पुं) काष्ठकुट्टः. (1) - शतपत्रक (पुं)
काष्ठकुट्टः. (1) - दार्वाघाट (पुं) चातकपक्षी. (3) - शारङ्ग (पुं) , स्तोकक (पुं) , चातक (पुं)
दार्वाघाटोऽथ सारङ्गः स्तोककश्चातकः समाः॥ २.४.४७४ ॥
काष्ठकुट्टः. (1) - दार्वाघाट (पुं) चातकपक्षी. (3) - शारङ्ग (पुं) , स्तोकक (पुं) , चातक (पुं)
कुक्कुटः. (4) - कृकवाकु (पुं) , ताम्रचूड (पुं) , कुक्कुट (पुं) , चारणायुध (पुं)
कृकवाकुस्ताम्रचूडः कुक्कुटश्चरणायुधः॥ २.४.४७५ ॥
कुक्कुटः. (4) - कृकवाकु (पुं) , ताम्रचूड (पुं) , कुक्कुट (पुं) , चारणायुध (पुं)
चटकः. (2) - चटक (पुं) , कलविङ्क (पुं) चटकस्त्री. (1) - चटका (स्त्री)
चटकः कलविङ्कः स्यात्तस्य स्त्री चटका तयोः॥ २.४.४७६ ॥
चटकः. (2) - चटक (पुं) , कलविङ्क (पुं) चटकस्त्री. (1) - चटका (स्त्री)
चटकपुमपत्यम्. (1) - चाटकैर (पुं) चटकस्त्र्यपत्यम्. (1) - चटका (स्त्री)
पुमपत्ये चाटकैरः स्त्र्यपत्ये चटकैव सा॥ २.४.४७७ ॥
चटकपुमपत्यम्. (1) - चाटकैर (पुं) चटकस्त्र्यपत्यम्. (1) - चटका (स्त्री)
अशुभवादिपक्षिविशेषः. (2) - कर्करेटु (पुं) , करेटु (पुं) अशुभपक्षिभेदः. (2) - कृकण (पुं) , क्रकर (पुं)
कर्करेटुः करेटुः स्यात्कृकणक्रकरौ समौ॥ २.४.४७८ ॥
अशुभवादिपक्षिविशेषः. (2) - कर्करेटु (पुं) , करेटु (पुं) अशुभपक्षिभेदः. (2) - कृकण (पुं) , क्रकर (पुं)
कोकिलः. (4) - वनप्रिय (पुं) , परभृत (पुं) , कोकिल (पुं) , पिक (पुं)
वनप्रियः परभृतः कोकिलः पिक इत्यपि॥ २.४.४७९ ॥
कोकिलः. (4) - वनप्रिय (पुं) , परभृत (पुं) , कोकिल (पुं) , पिक (पुं)
काकः. (5) - काक (पुं) , करट (पुं) , अरिष्ट (पुं) , बलिपुष्ट (पुं) , सकृत्प्रज (पुं)
काके तु करटारिष्टबलिपुष्टसकृत्प्रजाः॥ २.४.४८० ॥
काकः. (5) - काक (पुं) , करट (पुं) , अरिष्ट (पुं) , बलिपुष्ट (पुं) , सकृत्प्रज (पुं)
काकः. (5) - ध्वाङ्क्ष (पुं) , आत्मघोष (पुं) , परभृत् (पुं) , बलिभुज् (पुं) , वायस (पुं)
ध्वाङ्क्षात्मघोषपरभृद्बलिभुग्वायसा अपि॥ २.४.४८१ ॥
काकः. (5) - ध्वाङ्क्ष (पुं) , आत्मघोष (पुं) , परभृत् (पुं) , बलिभुज् (पुं) , वायस (पुं)
काकः. (3) - चिरञ्जीविन् (पुं) , एकदृष्टि (पुं) , मौकलि (पुं)
स एव च चिरञ्जीवी चैकदृष्टिश्च मौकुलिः॥ २.४.४८२ ॥
काकः. (3) - चिरञ्जीविन् (पुं) , एकदृष्टि (पुं) , मौकलि (पुं)
काकभेदः. (2) - द्रोणकाक (पुं) , काकोल (पुं) कालकण्ठकः. (2) - दात्यूह (पुं) , कालकण्ठक (पुं)
द्रोणकाकस्तु काकोलो दात्यूहः कालकण्ठकः॥ २.४.४८३ ॥
काकभेदः. (2) - द्रोणकाक (पुं) , काकोल (पुं) कालकण्ठकः. (2) - दात्यूह (पुं) , कालकण्ठक (पुं)
चिल्लः. (2) - आतायिन् (पुं) , चिल्ल (पुं) गृध्रः. (2) - दाक्षाय्य (पुं) , गृध्र (पुं) शुकः. (2) - कीर (पुं) , शुक (पुं)
आतापिचिल्लौ दाक्षाय्यगृध्रौ कीरशुकौ समौ ॥ २.४.४८४ ॥
चिल्लः. (2) - आतायिन् (पुं) , चिल्ल (पुं) गृध्रः. (2) - दाक्षाय्य (पुं) , गृध्र (पुं) शुकः. (2) - कीर (पुं) , शुक (पुं)
क्रौञ्चः. (2) - क्रुञ्च् (पुं) , क्रौञ्च (पुं) बकः. (2) - बक (पुं) , कह्व (पुं) सारसः. (2) - पुष्कराह्व (पुं) , सारस (पुं)
क्रुङ्क्रौञ्चोऽथ बकः कह्वः पुष्कराह्वस्तु सारसः॥ २.४.४८५ ॥
क्रौञ्चः. (2) - क्रुञ्च् (पुं) , क्रौञ्च (पुं) बकः. (2) - बक (पुं) , कह्व (पुं) सारसः. (2) - पुष्कराह्व (पुं) , सारस (पुं)
चक्रवाकः. (4) - कोक (पुं) , चक्र (पुं) , चक्रवाक (पुं) , रथाङ्गाह्वय (पुं)
कोकश्चक्रश्चक्रवाको रथाङ्गाह्वयनामकः॥ २.४.४८६ ॥
चक्रवाकः. (4) - कोक (पुं) , चक्र (पुं) , चक्रवाक (पुं) , रथाङ्गाह्वय (पुं)
कलहंसः. (2) - कादम्ब (पुं) , कलहंस (पुं) कुररः. (2) - उत्क्रोश (पुं) , कुरर (पुं)
कादम्बः कलहंसः स्यादुत्क्रोशकुररौ समौ॥ २.४.४८७ ॥
कलहंसः. (2) - कादम्ब (पुं) , कलहंस (पुं) कुररः. (2) - उत्क्रोश (पुं) , कुरर (पुं)
हंसः. (4) - हंस (पुं) , श्वेतगरुत् (पुं) , चक्राङ्ग (पुं) , मानसौकस् (पुं)
हंसास्तु श्वेतगरुतश्चक्राङ्गा मानसौकसः॥ २.४.४८८ ॥
हंसः. (4) - हंस (पुं) , श्वेतगरुत् (पुं) , चक्राङ्ग (पुं) , मानसौकस् (पुं)
राजहंसः. (1) - राजहंस (पुं)
राजहंसास्तु ते चञ्चुचरणैर्लोहितैः सिताः॥ २.४.४८९ ॥
राजहंसः. (1) - राजहंस (पुं)
हंसभेदः. (1) - मल्लिकाक्ष (पुं) कृष्णचङ्चुचरणहंसः. (1) - धार्तराष्ट्र (पुं)
मलिनैर्मल्लिकाक्षास्ते धार्तराष्ट्राः सितेतरैः॥ २.४.४९० ॥
हंसभेदः. (1) - मल्लिकाक्ष (पुं) कृष्णचङ्चुचरणहंसः. (1) - धार्तराष्ट्र (पुं)
आडिः. (3) - शरारि (स्त्री) , आटि (स्त्री) , आडि (स्त्री) बकभेदः. (2) - बलाका (स्त्री) , बिसकण्ठिका (स्त्री)
शरारिराटिराडिश्च बलाका बिसकण्ठिका॥ २.४.४९१ ॥
आडिः. (3) - शरारि (स्त्री) , आटि (स्त्री) , आडि (स्त्री) बकभेदः. (2) - बलाका (स्त्री) , बिसकण्ठिका (स्त्री)
हंसस्त्री. (1) - वरटा (स्त्री) सारसस्त्री. (1) - लक्ष्मणा (स्त्री)
हंसस्य योषिद्वरटा सारसस्य तु लक्ष्मणा॥ २.४.४९२ ॥
हंसस्त्री. (1) - वरटा (स्त्री) सारसस्त्री. (1) - लक्ष्मणा (स्त्री)
जतुका. (2) - जतुका (स्त्री) , अजिनपत्रा (स्त्री) तैलपायिका. (2) - परोष्णी (स्त्री) , तैलपायिका (स्त्री)
जतुकाजिनपत्रा स्यात्परोष्णी तैलपायिका॥ २.४.४९३ ॥
जतुका. (2) - जतुका (स्त्री) , अजिनपत्रा (स्त्री) तैलपायिका. (2) - परोष्णी (स्त्री) , तैलपायिका (स्त्री)
मक्षिका. (3) - वर्वणा (स्त्री) , मक्षिका (स्त्री) , नीला (स्त्री) मधुमक्षिका. (2) - सरघा (स्त्री) , मधुमक्षिका (स्त्री)
वर्वणा मक्षिका नीला सरघा मधुमक्षिका ॥ २.४.४९४ ॥
मक्षिका. (3) - वर्वणा (स्त्री) , मक्षिका (स्त्री) , नीला (स्त्री) मधुमक्षिका. (2) - सरघा (स्त्री) , मधुमक्षिका (स्त्री)
मधुमक्षिकाविशेषः. (2) - पतङ्गिका (स्त्री) , पुत्तिका (स्त्री) वनमक्षिका. (2) - दंश (पुं) , वनमक्षिका (स्त्री)
पतङ्गिका पुत्तिका स्याद्दंशस्तु वनमक्षिका॥ २.४.४९५ ॥
मधुमक्षिकाविशेषः. (2) - पतङ्गिका (स्त्री) , पुत्तिका (स्त्री) वनमक्षिका. (2) - दंश (पुं) , वनमक्षिका (स्त्री)
मक्षिकाल्पजातिः. (1) - दंशी (स्त्री) वरटा. (2) - गन्धोली (स्त्री) , वरटा (स्त्री-पुं)
दंशी तज्जातिरल्पा स्याद्गन्धोली वरटा द्वयोः॥ २.४.४९६ ॥
मक्षिकाल्पजातिः. (1) - दंशी (स्त्री) वरटा. (2) - गन्धोली (स्त्री) , वरटा (स्त्री-पुं)
झिल्लिका. (4) - भृङ्गारी (स्त्री) , झीरुका (स्त्री) , चीरी (स्त्री) , झिल्लिका (स्त्री)
भृङ्गारी झीरुका चीरी झिल्लिका च समा इमाः॥ २.४.४९७ ॥
झिल्लिका. (4) - भृङ्गारी (स्त्री) , झीरुका (स्त्री) , चीरी (स्त्री) , झिल्लिका (स्त्री)
पतङ्गः. (2) - पतङ्ग (पुं) , शलभ (पुं) खद्योतः. (2) - खद्योत (पुं) , ज्योतिरिङ्गण (पुं)
समौ पतङ्गशलभौ खध्योतो ज्योतिरिङ्गणः॥ २.४.४९८ ॥
पतङ्गः. (2) - पतङ्ग (पुं) , शलभ (पुं) खद्योतः. (2) - खद्योत (पुं) , ज्योतिरिङ्गण (पुं)
भ्रमरः. (5) - मधुव्रत (पुं) , मधुकर (पुं) , मधुलिह (पुं) , मधुप (पुं) , अलिन् (पुं)
मधुव्रतो मधुकरो मधुलिण्मधुपालिनः॥ २.४.४९९ ॥
भ्रमरः. (5) - मधुव्रत (पुं) , मधुकर (पुं) , मधुलिह (पुं) , मधुप (पुं) , अलिन् (पुं)
भ्रमरः. (6) - द्विरेफ (पुं) , पुष्पलिह् (पुं) , भृङ्ग (पुं) , षट्पद (पुं) , भ्रमर (पुं) , अलि (पुं)
द्विरेफपुष्पलिड् भृङ्ग षट्पद भ्रमरालयः॥ २.४.५०० ॥
भ्रमरः. (6) - द्विरेफ (पुं) , पुष्पलिह् (पुं) , भृङ्ग (पुं) , षट्पद (पुं) , भ्रमर (पुं) , अलि (पुं)
मयूरः. (5) - मयूर (पुं) , बर्हिण (पुं) , बर्हिन् (पुं) , नीलकण्ठ (पुं) , भुजङ्गभुज् (पुं)
मयूरो बर्हिणो बर्ही नीलकण्ठो भुजंगभुक्॥ २.४.५०१ ॥
मयूरः. (5) - मयूर (पुं) , बर्हिण (पुं) , बर्हिन् (पुं) , नीलकण्ठ (पुं) , भुजङ्गभुज् (पुं)
मयूरः. (4) - शिखावल (पुं) , शिखिन् (पुं) , केकिन् (पुं) , मेघनादानुलासिन् (पुं)
शिखावलः शिखी केकी मेघनादानुलास्यपि॥ २.४.५०२ ॥
मयूरः. (4) - शिखावल (पुं) , शिखिन् (पुं) , केकिन् (पुं) , मेघनादानुलासिन् (पुं)
मयूरवाणिः. (1) - केका (स्त्री) पिच्छस्थचन्द्राकृतिः. (2) - चन्द्रक (पुं) , मेचक (पुं)
केका वाणी मयूरस्य समौ चन्द्रकमेचकौ॥ २.४.५०३ ॥
मयूरवाणिः. (1) - केका (स्त्री) पिच्छस्थचन्द्राकृतिः. (2) - चन्द्रक (पुं) , मेचक (पुं)
मयूरशिखा. (2) - शिखा (स्त्री) , चूडा (स्त्री) मयूरपिच्छः. (2) - शिखण्ड (पुं) , पिच्छबर्ह (नपुं)
शिखा चूडा शिखण्डस्तु पिच्छबर्हे नपुंसके॥ २.४.५०४ ॥
मयूरशिखा. (2) - शिखा (स्त्री) , चूडा (स्त्री) मयूरपिच्छः. (2) - शिखण्ड (पुं) , पिच्छबर्ह (नपुं)
पक्षी. (5) - खग (पुं) , विहङ्ग (पुं) , विहग (पुं) , विहङ्गम (पुं) , विहायस् (पुं)
खगे विहङ्गविहगविहङ्गमविहायसः॥ २.४.५०५ ॥
पक्षी. (5) - खग (पुं) , विहङ्ग (पुं) , विहग (पुं) , विहङ्गम (पुं) , विहायस् (पुं)
पक्षी. (6) - शकुन्ति (पुं) , पक्षिन् (पुं) , शकुनि (पुं) , शकुन्त (पुं) , शकुन (पुं) , द्विज (पुं)
शकुन्तिपक्षिशकुनिशकुन्तशकुनद्विजाः॥ २.४.५०६ ॥
पक्षी. (6) - शकुन्ति (पुं) , पक्षिन् (पुं) , शकुनि (पुं) , शकुन्त (पुं) , शकुन (पुं) , द्विज (पुं)
पक्षी. (6) - पतत्रिन् (पुं) , पत्रिन् (पुं) , पतग (पुं) , पतत् (पुं) , पत्ररथ (पुं) , अण्डज (पुं)
पतत्रिपत्रिपतगपतत्पत्ररथाण्डजाः॥ २.४.५०७ ॥
पक्षी. (6) - पतत्रिन् (पुं) , पत्रिन् (पुं) , पतग (पुं) , पतत् (पुं) , पत्ररथ (पुं) , अण्डज (पुं)
पक्षी. (6) - नगौकस् (पुं) , वाजिन् (पुं) , विकिर (पुं) , वि (पुं) , विष्किर (पुं) , पतत्रि (पुं)
नगौकोवाजिविकिरविविष्किरपतत्रयः॥ २.४.५०८ ॥
पक्षी. (6) - नगौकस् (पुं) , वाजिन् (पुं) , विकिर (पुं) , वि (पुं) , विष्किर (पुं) , पतत्रि (पुं)
पक्षी. (4) - नीडोद्भव (पुं) , गरुत्मत् (पुं) , पित्सन्त् (पुं) , नभसङ्गम (पुं)
नीडोद्भवाः गरुत्मन्तः पित्सन्तो नभसंगमाः॥ २.४.५०९ ॥
पक्षी. (4) - नीडोद्भव (पुं) , गरुत्मत् (पुं) , पित्सन्त् (पुं) , नभसङ्गम (पुं)
पक्षिजातिविशेषः. (4) - हारीत (पुं) , मद्गु (पुं) , कारण्डव (पुं) , प्लव (पुं)
तेषां विशेषा हारीतो मद्गुः कारण्डवः प्लवः॥ २.४.५१० ॥
पक्षिजातिविशेषः. (4) - हारीत (पुं) , मद्गु (पुं) , कारण्डव (पुं) , प्लव (पुं)
पक्षिजातिविशेषः. (5) - तित्तिरि (पुं) , कुक्कुभ (पुं) , लाव (पुं) , जीवञ्जीव (पुं) , कोरक (पुं)
तित्तिरिः कुक्कुभो लावो जीवञ्जीवश्च कोरकः॥ २.४.५११ ॥
पक्षिजातिविशेषः. (5) - तित्तिरि (पुं) , कुक्कुभ (पुं) , लाव (पुं) , जीवञ्जीव (पुं) , कोरक (पुं)
पक्षिजातिविशेषः. (4) - कोयष्टिक (पुं) , टिट्टिभक (पुं) , वर्तक (पुं) , वर्तिक (पुं)
कोयष्टिकष् टिट्टिभको वर्तको वर्तिकादयः॥ २.४.५१२ ॥
पक्षिजातिविशेषः. (4) - कोयष्टिक (पुं) , टिट्टिभक (पुं) , वर्तक (पुं) , वर्तिक (पुं)
पक्षिपक्षः. (6) - गरुत् (पुं) , पक्ष (पुं) , छद (पुं-नपुं) , पत्र (नपुं) , पतत्र (नपुं) , तनूरुह (नपुं)
गरुत्पक्षच्छदाः पत्रं पतत्रं च तनूरुहम्॥ २.४.५१३ ॥
पक्षिपक्षः. (6) - गरुत् (पुं) , पक्ष (पुं) , छद (पुं-नपुं) , पत्र (नपुं) , पतत्र (नपुं) , तनूरुह (नपुं)
पक्षमूलम्. (2) - पक्षति (स्त्री) , पक्षमूल (नपुं) पक्षिणा तुण्डः. (2) - चञ्चु (स्त्री) , त्रोटि (स्त्री)
स्त्री पक्षतिः पक्षमूलं चञ्चुस्त्रोटिरुभे स्त्रियौ॥ २.४.५१४ ॥
पक्षमूलम्. (2) - पक्षति (स्त्री) , पक्षमूल (नपुं) पक्षिणा तुण्डः. (2) - चञ्चु (स्त्री) , त्रोटि (स्त्री)
पक्षिगतिविशेषः. (3) - प्रडीन (नपुं) , उड्डीन (नपुं) , सण्डीन (नपुं)
प्रडीनोड्डीनसँडीनान्येताः खगगतिक्रियाः॥ २.४.५१५ ॥
पक्षिगतिविशेषः. (3) - प्रडीन (नपुं) , उड्डीन (नपुं) , सण्डीन (नपुं)
अण्डम्. (3) - पेशी (स्त्री) , कोश (पुं-नपुं) , अण्ड (नपुं) पक्षिवासः. (2) - कुलाय (पुं) , नीड (पुं-नपुं)
पेशी कोशो द्विहीनेऽण्डं कुलायो नीडमस्त्रियाम्॥ २.४.५१६ ॥
अण्डम्. (3) - पेशी (स्त्री) , कोश (पुं-नपुं) , अण्ड (नपुं) पक्षिवासः. (2) - कुलाय (पुं) , नीड (पुं-नपुं)
शिशुः. (7) - पोत (पुं) , पाक (पुं) , अर्भक (पुं) , डिम्भ (पुं) , पृथुक (पुं) , शावक (पुं) , शिशु (पुं)
पोतः पाकोऽर्भको डिम्भः पृथुकः शावकः शिशुः॥ २.४.५१७ ॥
शिशुः. (7) - पोत (पुं) , पाक (पुं) , अर्भक (पुं) , डिम्भ (पुं) , पृथुक (पुं) , शावक (पुं) , शिशु (पुं)
स्त्रीपुरुषयुग्मम्. (3) - स्त्रीपुंस (पुं) , मिथुन (नपुं) , द्वन्द्व (नपुं) युग्मम्. (3) - युग्म (नपुं) , युगल (नपुं) , युग (नपुं)
स्त्रीपुंसौ मिथुनं द्वन्द्वं युग्मं तु युगुलं युगम्॥ २.४.५१८ ॥
स्त्रीपुरुषयुग्मम्. (3) - स्त्रीपुंस (पुं) , मिथुन (नपुं) , द्वन्द्व (नपुं) युग्मम्. (3) - युग्म (नपुं) , युगल (नपुं) , युग (नपुं)
समूहः. (6) - समूह (पुं) , निवह (पुं) , व्यूह (पुं) , सन्दोह (पुं) , विसर (पुं) , व्रज (पुं)
समूहे निवहव्यूहसंदोहविसरव्रजाः॥ २.४.५१९ ॥
समूहः. (6) - समूह (पुं) , निवह (पुं) , व्यूह (पुं) , सन्दोह (पुं) , विसर (पुं) , व्रज (पुं)
समूहः. (7) - स्तोम (पुं) , ओघ (पुं) , निकर (पुं) , व्रात (पुं) , वार (पुं) , सङ्घात (पुं) , सञ्चय (पुं)
स्तोमौघनिकरत्रातवारसंघातसंचयाः॥ २.४.५२० ॥
समूहः. (7) - स्तोम (पुं) , ओघ (पुं) , निकर (पुं) , व्रात (पुं) , वार (पुं) , सङ्घात (पुं) , सञ्चय (पुं)
समूहः. (5) - समुदाय (पुं) , समुदय (पुं) , समवाय (पुं) , चय (पुं) , गण (पुं)
समुदायः समुदयः समवायश्च यो गणः॥ २.४.५२१ ॥
समूहः. (5) - समुदाय (पुं) , समुदय (पुं) , समवाय (पुं) , चय (पुं) , गण (पुं)
समूहः. (4) - संहति (स्त्री) , वृन्द (नपुं) , निकुरम्ब (नपुं) , कदम्बक (नपुं)
स्त्रियां तु संहतिर्वृन्दं निकुरम्बं कदम्बकम्॥ २.४.५२२ ॥
समूहः. (4) - संहति (स्त्री) , वृन्द (नपुं) , निकुरम्ब (नपुं) , कदम्बक (नपुं)
सजातीयैः प्राणिभिरप्राणिभिर्वा समूहः. (1) - वर्ग (पुं) जन्तुसमूहः. (2) - सङ्घ (पुं) , सार्थ (पुं)
वृन्दभेदाः समैर्वर्गः संघसार्थौ तु जन्तुभिः॥ २.४.५२३ ॥
सजातीयैः प्राणिभिरप्राणिभिर्वा समूहः. (1) - वर्ग (पुं) जन्तुसमूहः. (2) - सङ्घ (पुं) , सार्थ (पुं)
सजातीयसमूहः. (1) - कुल (नपुं) सजातीयतिरश्चां समूहः. (1) - यूथ (पुं-नपुं)
सजातीयैः कुलं यूथं तिरश्चां पुंनपुंसकम्॥ २.४.५२४ ॥
सजातीयसमूहः. (1) - कुल (नपुं) सजातीयतिरश्चां समूहः. (1) - यूथ (पुं-नपुं)
पशुसङ्घः. (1) - समज (पुं) पशुभिन्नसङ्घः. (1) - समाज (पुं)
पशूनां समजोऽन्येषां समाजोऽथ सधर्मिणाम्॥ २.४.५२५ ॥
पशुसङ्घः. (1) - समज (पुं) पशुभिन्नसङ्घः. (1) - समाज (पुं)
एकधर्मवतां समूहः. (1) - निकाय (पुं) धान्यादिराशिः. (4) - पुञ्ज (पुं) , राशि (स्त्री-पुं) , उत्कर (पुं) , कूट (पुं-नपुं)
स्यान्निकायः पुञ्जराशी तूत्करः कूटमस्त्रियाम्॥ २.४.५२६ ॥
एकधर्मवतां समूहः. (1) - निकाय (पुं) धान्यादिराशिः. (4) - पुञ्ज (पुं) , राशि (स्त्री-पुं) , उत्कर (पुं) , कूट (पुं-नपुं)
कपोतगणः. (1) - कापोत (नपुं) शुकगणः. (1) - शौक (नपुं) मयूरगणः. (1) - मायूर (नपुं) तित्तिरिगणः. (1) - तैत्तिर (नपुं)
कापोतशौकमायूरतैत्तिरादीनि तद्गणे॥ २.४.५२७ ॥
कपोतगणः. (1) - कापोत (नपुं) शुकगणः. (1) - शौक (नपुं) मयूरगणः. (1) - मायूर (नपुं) तित्तिरिगणः. (1) - तैत्तिर (नपुं)
गृहासक्तपक्षिमृगाः. (2) - छेक (पुं) , गृह्यक (पुं)
गृहासक्ताः पक्षिमृगाश्छेकास्ते गृह्यकाश्च ते ॥ २.४.५२८ ॥
गृहासक्तपक्षिमृगाः. (2) - छेक (पुं) , गृह्यक (पुं)
इति सिंहादिवर्गः

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