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इति शैलवर्गः
अथ वनौषधिवर्गः
वनम्. (6) - अटवी (स्त्री) , अरण्य (नपुं) , विपिन (नपुं) , गहन (नपुं) , कानन (नपुं) , वन (नपुं)
अटव्यरण्यं विपिनं गहनं काननं वनम् ॥ २.४.९९ ॥
वनम्. (6) - अटवी (स्त्री) , अरण्य (नपुं) , विपिन (नपुं) , गहन (नपुं) , कानन (नपुं) , वन (नपुं)
महावनम्. (2) - महारण्य (नपुं) , अरण्यानी (स्त्री) ; गृहोपवनम्. (2) - गृहाराम (पुं) , निष्कुट (पुं)
महारण्यमरण्यानी गृहारामास्तु निष्कुटाः॥ २.४.१०० ॥
महावनम्. (2) - महारण्य (नपुं) , अरण्यानी (स्त्री) ; गृहोपवनम्. (2) - गृहाराम (पुं) , निष्कुट (पुं)
कृत्रिमवृक्षसमूहः. (2) - आराम (पुं) , उपवन (नपुं)
आरामः स्यादुपवनं कृत्रिमं वनमेव यत्॥ २.४.१०१ ॥
कृत्रिमवृक्षसमूहः. (2) - आराम (पुं) , उपवन (नपुं)
गणिकामात्यादिगृहोपवनम्. (1) - वृक्षवाटिका (स्त्री)
अमात्यगणिकागेहोपवने वृक्षवाटिका॥ २.४.१०२ ॥
गणिकामात्यादिगृहोपवनम्. (1) - वृक्षवाटिका (स्त्री)
सर्वोपभोग्यवनम्. (2) - आक्रीड (पुं) , उद्यान (नपुं)
पुमानाक्रीड उद्यानं राज्ञः साधारणं वनम्॥ २.४.१०३ ॥
सर्वोपभोग्यवनम्. (2) - आक्रीड (पुं) , उद्यान (नपुं)
अन्तःपुरोद्यानम्. (1) - प्रमदवन (नपुं)
स्यादेतदेव प्रमदवनमन्तःपुरोचितम्॥ २.४.१०४ ॥
अन्तःपुरोद्यानम्. (1) - प्रमदवन (नपुं)
पङ्क्तिः. (5) - वीथि (स्त्री) , आलि (स्त्री) , आवलि (स्त्री) , पङ्क्ति (स्त्री) , श्रेणी (स्त्री) ; पङ्क्त्यपङ्तिसाधारणी. (2) - लेखा (स्त्री) , राजि (स्त्री)
वीथ्यालिरावलिः पङ्क्तिः श्रेणी लेखास्तु राजयः॥ २.४.१०५ ॥
पङ्क्तिः. (5) - वीथि (स्त्री) , आलि (स्त्री) , आवलि (स्त्री) , पङ्क्ति (स्त्री) , श्रेणी (स्त्री) ; पङ्क्त्यपङ्तिसाधारणी. (2) - लेखा (स्त्री) , राजि (स्त्री)
वनसमूहः. (1) - वन्या (स्त्री) ; नूतनाङ्कुरः. (2) - अङ्कुर (पुं) , अभिनवोद्भिद् (पुं)
वन्या वनसमूहे स्यादङ्कुरोऽभिनवोद्भिदि॥ २.४.१०६ ॥
वनसमूहः. (1) - वन्या (स्त्री) ; नूतनाङ्कुरः. (2) - अङ्कुर (पुं) , अभिनवोद्भिद् (पुं)
वृक्षः. (6) - वृक्ष (पुं) , महीरुह (पुं) , शाखिन् (पुं) , विटपिन् (पुं) , पादप (पुं) , तरु (पुं)
वृक्षो महीरुहः शाखी विटपी पादपस्तरुः॥ २.४.१०७ ॥
वृक्षः. (6) - वृक्ष (पुं) , महीरुह (पुं) , शाखिन् (पुं) , विटपिन् (पुं) , पादप (पुं) , तरु (पुं)
वृक्षः. (6) - अनोकह (पुं) , कुट (पुं) , शाल (पुं) , पलाशिन् (पुं) , द्रुद्रुम (पुं) , अगम (पुं)
अनोकहः कुटः शालः पलाशी द्रुद्रुमागमाः॥ २.४.१०८ ॥
वृक्षः. (6) - अनोकह (पुं) , कुट (पुं) , शाल (पुं) , पलाशिन् (पुं) , द्रुद्रुम (पुं) , अगम (पुं)
पुष्पाज्जातफलयुक्तवृक्षः. (1) - वानस्पत्य (पुं) ; विनापुष्पं फलितवृक्षः. (1) - वनस्पति (पुं)
वानस्पत्यः फलैः पुष्पात्तैरपुष्पाद्वनस्पतिः॥ २.४.१०९ ॥
पुष्पाज्जातफलयुक्तवृक्षः. (1) - वानस्पत्य (पुं) ; विनापुष्पं फलितवृक्षः. (1) - वनस्पति (पुं)
फलपाकान्तसस्याः. (1) - ओषधि (स्त्री) ; यथाकालम् फलधरः. (2) - अवन्ध्य (वि) , फलेग्रहि (वि)
ओषध्यः फलपाकान्ताः स्युरवन्ध्यह् फलेग्रहिः॥ २.४.११० ॥
फलपाकान्तसस्याः. (1) - ओषधि (स्त्री) ; यथाकालम् फलधरः. (2) - अवन्ध्य (वि) , फलेग्रहि (वि)
ऋतावपि फलरहितसस्यः. (3) - वन्ध्य (वि) , अफल (वि) , अवकेशिन् (वि) ; फलसहितवृक्षः. (3) - फलवत् (वि) , फलिन् (वि) , फली (वि)
वन्ध्योऽफलोऽवकेशी च फलवान्फलिनः फली॥ २.४.१११ ॥
ऋतावपि फलरहितसस्यः. (3) - वन्ध्य (वि) , अफल (वि) , अवकेशिन् (वि) ; फलसहितवृक्षः. (3) - फलवत् (वि) , फलिन् (वि) , फली (वि)
प्रफुल्लितवृक्षः. (6) - प्रफुल्ल (वि) , उत्फुल्ल (वि) , सम्फुल्ल (वि) , व्याकोश (वि) , विकच (वि) , स्फुट (वि)
प्रफुल्लोत्फुल्लसंफुल्लव्याकोशविकचस्फुटाः॥ २.४.११२ ॥
प्रफुल्लितवृक्षः. (6) - प्रफुल्ल (वि) , उत्फुल्ल (वि) , सम्फुल्ल (वि) , व्याकोश (वि) , विकच (वि) , स्फुट (वि)
प्रफुल्लितवृक्षः. (2) - फुल्ल (वि) , विकसित (वि)
फुल्लश्चैते विकसिते स्युरवन्ध्यादयस्त्रिषु॥ २.४.११३ ॥
प्रफुल्लितवृक्षः. (2) - फुल्ल (वि) , विकसित (वि)
शाखापत्ररहिततरुः. (3) - स्थाणु (पुं-नपुं) , ध्रुव (पुं) , शङ्कु (पुं) ; सूक्ष्मशाखामूलयुतवृक्षः. (1) - क्षुप (पुं)
स्थाणुर्वा ना ध्रुवः शङ्कुर्ह्रस्वशाखाशिफः क्षुपः॥ २.४.११४ ॥
शाखापत्ररहिततरुः. (3) - स्थाणु (पुं-नपुं) , ध्रुव (पुं) , शङ्कु (पुं) ; सूक्ष्मशाखामूलयुतवृक्षः. (1) - क्षुप (पुं)
स्कन्धरहितवृक्षः. (2) - स्तम्ब (पुं) , गुल्म (पुं) ; लता. (3) - वल्ली (स्त्री) , व्रतति (स्त्री) , लता (स्त्री)
अप्रकाण्डे स्तम्बगुल्मौ वल्ली तु व्रततिर्लता॥ २.४.११५ ॥
स्कन्धरहितवृक्षः. (2) - स्तम्ब (पुं) , गुल्म (पुं) ; लता. (3) - वल्ली (स्त्री) , व्रतति (स्त्री) , लता (स्त्री)
शाखादिभिर्विस्तृतवल्ली. (3) - वीरुध् (स्त्री) , गुल्मिनी (स्त्री) , उलप (पुं)
लता प्रतानिनी वीरुद्गुल्मिन्युलप इत्यपि॥ २.४.११६ ॥
शाखादिभिर्विस्तृतवल्ली. (3) - वीरुध् (स्त्री) , गुल्मिनी (स्त्री) , उलप (पुं)
वृक्षादिदैर्घ्यः. (3) - उच्छ्राय (पुं) , उत्सेध (पुं) , उच्छ्रय (पुं)
नगाद्यारोह उच्छ्राय उत्सेधश्चोच्छ्रयश्च सः॥ २.४.११७ ॥
वृक्षादिदैर्घ्यः. (3) - उच्छ्राय (पुं) , उत्सेध (पुं) , उच्छ्रय (पुं)
वृक्षमूलमारभ्य शाखावधिभागः. (2) - प्रकाण्ड (पुं-नपुं) , स्कन्ध (पुं)
अस्त्री प्रकाण्डः स्कन्धः स्यान्मूलाच्छाखावधिस्तरोः॥ २.४.११८ ॥
वृक्षमूलमारभ्य शाखावधिभागः. (2) - प्रकाण्ड (पुं-नपुं) , स्कन्ध (पुं)
शाखा. (2) - शाखा (स्त्री) , लता (स्त्री) ; प्रधानशाखा. (2) - स्कन्धशाखा (स्त्री) , शाला (स्त्री) ; तरुमूलम्. (2) - शिफा (स्त्री) , जटा (स्त्री)
समे शाखालते स्कन्धशाखाशाले शिफाजटे॥ २.४.११९ ॥
शाखा. (2) - शाखा (स्त्री) , लता (स्त्री) ; प्रधानशाखा. (2) - स्कन्धशाखा (स्त्री) , शाला (स्त्री) ; तरुमूलम्. (2) - शिफा (स्त्री) , जटा (स्त्री)
शाखामूलम्. (1) - अवरोह (पुं) ; वृक्षमूलादग्रपर्यन्तं गता लता. (1) - अवरोह (पुं)
शाखाशिफावरोहः स्यान्मूलाच्चाग्रं गता लता॥ २.४.१२० ॥
शाखामूलम्. (1) - अवरोह (पुं) ; वृक्षमूलादग्रपर्यन्तं गता लता. (1) - अवरोह (पुं)
शिखरम्. (3) - शिरस् (पुं-नपुं) , अग्र (नपुं) , शिखर (पुं-नपुं) ; मूलमात्रम्. (3) - मूल (नपुं) , बुध्न (पुं) , अङ्घ्रिनामक (पुं)
शिरोग्रं शिखरं वा ना मूलं बुध्नोऽङ्घ्रिनामकः॥ २.४.१२१ ॥
शिखरम्. (3) - शिरस् (पुं-नपुं) , अग्र (नपुं) , शिखर (पुं-नपुं) ; मूलमात्रम्. (3) - मूल (नपुं) , बुध्न (पुं) , अङ्घ्रिनामक (पुं)
वृक्षकोमलत्वक्. (3) - सार (पुं) , मज्जन् (पुं) , नरि (पुं) ; वृक्षत्वक्. (3) - त्वच् (स्त्री) , वल्क (पुं-नपुं) , वल्कल (पुं-नपुं)
सारो मज्जा नरि त्वक्स्त्री वल्कं वल्कलमस्त्रियाम्॥ २.४.१२२ ॥
वृक्षकोमलत्वक्. (3) - सार (पुं) , मज्जन् (पुं) , नरि (पुं) ; वृक्षत्वक्. (3) - त्वच् (स्त्री) , वल्क (पुं-नपुं) , वल्कल (पुं-नपुं)
काष्ठम्. (2) - काष्ठ (नपुं) , दारु (पुं-नपुं) ; अग्निसन्दीपनकाष्ठम्. (3) - इन्धन (नपुं) , एध (पुं) , इध्म (नपुं) ; यागादौ हूयमानकाष्ठम्. (2) - एध (पुं) , समित् (स्त्री)
काष्ठं दार्विन्धनं त्वेध इध्ममेधः समित्स्त्रियाम्॥ २.४.१२३ ॥
काष्ठम्. (2) - काष्ठ (नपुं) , दारु (पुं-नपुं) ; अग्निसन्दीपनकाष्ठम्. (3) - इन्धन (नपुं) , एध (पुं) , इध्म (नपुं) ; यागादौ हूयमानकाष्ठम्. (2) - एध (पुं) , समित् (स्त्री)
वृक्षादिरन्ध्रः. (2) - निष्कुह (पुं) , कोटर (पुं-नपुं) ; मञ्जरिः. (2) - वल्लरि (स्त्री) , मञ्जरि (स्त्री)
निष्कुहः कोटरं वा ना वल्लरिर्मञ्जरिः स्त्रियौ॥ २.४.१२४ ॥
वृक्षादिरन्ध्रः. (2) - निष्कुह (पुं) , कोटर (पुं-नपुं) ; मञ्जरिः. (2) - वल्लरि (स्त्री) , मञ्जरि (स्त्री)
पत्रम्. (6) - पत्र (नपुं) , पलाश (नपुं) , छदन (नपुं) , दल (नपुं) , पर्ण (नपुं) , छद (पुं)
पत्रं पलाशं छदनं दलं पर्णं छदः पुमान्॥ २.४.१२५ ॥
पत्रम्. (6) - पत्र (नपुं) , पलाश (नपुं) , छदन (नपुं) , दल (नपुं) , पर्ण (नपुं) , छद (पुं)
नूतनपत्रम्. (2) - पल्लव (पुं-नपुं) , किसलय (पुं-नपुं) ; वृक्षविस्तारः. (2) - विस्तार (पुं) , विटप (पुं-नपुं)
पल्लवोऽस्त्री किसलयं विस्तारो विटपोऽस्त्रियाम्॥ २.४.१२६ ॥
नूतनपत्रम्. (2) - पल्लव (पुं-नपुं) , किसलय (पुं-नपुं) ; वृक्षविस्तारः. (2) - विस्तार (पुं) , विटप (पुं-नपुं)
वृक्षफलम्. (2) - फल (नपुं) , सस्य (नपुं) ; पुष्पादिबन्धनम्. (2) - वृन्त (नपुं) , प्रसवबन्धन (नपुं)
वृक्षादीनां फलं सस्यं वृन्तं प्रसवबन्धनम्॥ २.४.१२७ ॥
वृक्षफलम्. (2) - फल (नपुं) , सस्य (नपुं) ; पुष्पादिबन्धनम्. (2) - वृन्त (नपुं) , प्रसवबन्धन (नपुं)
अपक्वफलम्. (1) - शलाटु (वि) ; शुष्कफलम्. (1) - वान (वि)
आमे फले शलाटुः स्याच्छुष्के वानमुभे त्रिषु॥ २.४.१२८ ॥
अपक्वफलम्. (1) - शलाटु (वि) ; शुष्कफलम्. (1) - वान (वि)
नूतनकलिका. (2) - क्षारक (पुं) , जालक (नपुं) ; अविकसितपुष्पम्. (2) - कलिका (स्त्री) , कोरक (पुं)
क्षारको जालकं क्लीबे कलिका कोरकः पुमान्॥ २.४.१२९ ॥
नूतनकलिका. (2) - क्षारक (पुं) , जालक (नपुं) ; अविकसितपुष्पम्. (2) - कलिका (स्त्री) , कोरक (पुं)
विकासोन्मुखपुष्पम्. (2) - गुच्छक (पुं) , स्तबक (पुं) ; ईषद्विकासोन्मुखपुष्पम्. (2) - कुट्मल (पुं-नपुं) , मुकुल (पुं-नपुं)
स्याद्गुच्छकस्तु स्तबकः कुङ्मलो मुकुलोऽस्त्रियाम्॥ २.४.१३० ॥
विकासोन्मुखपुष्पम्. (2) - गुच्छक (पुं) , स्तबक (पुं) ; ईषद्विकासोन्मुखपुष्पम्. (2) - कुट्मल (पुं-नपुं) , मुकुल (पुं-नपुं)
पुष्पम्. (5) - सुमनस् (स्त्री) , पुष्प (नपुं) , प्रसून (नपुं) , कुसुम (नपुं) , सुम (नपुं)
स्त्रियः सुमनसः पुष्पं प्रसूनं कुसुमं सुमम्॥ २.४.१३१ ॥
पुष्पम्. (5) - सुमनस् (स्त्री) , पुष्प (नपुं) , प्रसून (नपुं) , कुसुम (नपुं) , सुम (नपुं)
पुष्पमधुः. (2) - मकरन्द (पुं) , पुष्परस (पुं) ; पुष्परेणुः. (2) - पराग (पुं) , सुमनोरज (नपुं)
मकरन्दः पुष्परसः परागः सुमनोरजः॥ २.४.१३२ ॥
पुष्पमधुः. (2) - मकरन्द (पुं) , पुष्परस (पुं) ; पुष्परेणुः. (2) - पराग (पुं) , सुमनोरज (नपुं)
हरीतक्याः फलम्. (1) - हरीतकी (स्त्री)
द्विहीनं प्रसवे सर्वं हरीतक्यादयः स्त्रियाम्॥ २.४.१३३ ॥
हरीतक्याः फलम्. (1) - हरीतकी (स्त्री)
अश्वत्थस्य फलम्. (1) - आश्वत्थ (नपुं) ; वेणोः फलम्. (1) - वैणव (नपुं) ; प्लक्षस्य फलम्. (1) - प्लाक्ष (नपुं) ; न्यग्रोधस्य फलम्. (1) - नैयग्रोध (नपुं) ; इङ्गुद्याः फलम्. (1) - ऐङ्गुद (नपुं)
आश्वत्थवैणवप्लाक्षनैयग्रोधैङ्गुदम् फले॥ २.४.१३४ ॥
अश्वत्थस्य फलम्. (1) - आश्वत्थ (नपुं) ; वेणोः फलम्. (1) - वैणव (नपुं) ; प्लक्षस्य फलम्. (1) - प्लाक्ष (नपुं) ; न्यग्रोधस्य फलम्. (1) - नैयग्रोध (नपुं) ; इङ्गुद्याः फलम्. (1) - ऐङ्गुद (नपुं)
बृहत्याः फलम्. (1) - बार्हत (नपुं) ; जम्बूफलम्. (3) - जम्बू (स्त्री) , जम्बु (नपुं) , जाम्बव (नपुं)
बार्हतं च फले जम्ब्वा जम्बूः स्त्री जम्बु जाम्बवम्॥ २.४.१३५ ॥
बृहत्याः फलम्. (1) - बार्हत (नपुं) ; जम्बूफलम्. (3) - जम्बू (स्त्री) , जम्बु (नपुं) , जाम्बव (नपुं)
पुष्पे जातीप्रभृतयः स्वलिङ्गाः व्रीहयः फले॥ २.४.१३६ ॥
पाटलकुसुमः. (1) - पाटला (स्त्री-नपुं)
विदार्याद्यास्तु मूलेऽपि पुष्पे क्लीबेऽपि पाटला॥ २.४.१३७ ॥
पाटलकुसुमः. (1) - पाटला (स्त्री-नपुं)
पिप्पलवृक्षः. (4) - बोधिद्रुम (पुं) , चलदल (पुं) , पिप्पल (पुं) , कुञ्जराशन (पुं)
बोधिद्रुमश्चलदलः पिप्पलः कुञ्जराशनः॥ २.४.१३८ ॥
पिप्पलवृक्षः. (4) - बोधिद्रुम (पुं) , चलदल (पुं) , पिप्पल (पुं) , कुञ्जराशन (पुं)
पिप्पलवृक्षः. (1) - अश्वत्थ (पुं) ; कपित्थः. (4) - कपित्थ (पुं) , दधित्थ (पुं) , ग्राहिन् (पुं) , मन्मथ (पुं)
अश्वत्थेऽथ कपित्थे स्युर्दधित्थग्राहिमन्मथाः॥ २.४.१३९ ॥
पिप्पलवृक्षः. (1) - अश्वत्थ (पुं) ; कपित्थः. (4) - कपित्थ (पुं) , दधित्थ (पुं) , ग्राहिन् (पुं) , मन्मथ (पुं)
कपित्थः. (3) - दधिफल (पुं) , पुष्पफल (पुं) , दन्तशठ (पुं)
तस्मिन्दधिफलः पुष्पफलदन्तशठावपि॥ २.४.१४० ॥
कपित्थः. (3) - दधिफल (पुं) , पुष्पफल (पुं) , दन्तशठ (पुं)
उदुम्बरः. (4) - उदुम्बर (पुं) , जन्तुफल (पुं) , यज्ञाङ्ग (पुं) , हेमदुग्धक (पुं)
उदुम्बरो जन्तुफलो यज्ञाङ्गो हेमदुग्धकः॥ २.४.१४१ ॥
उदुम्बरः. (4) - उदुम्बर (पुं) , जन्तुफल (पुं) , यज्ञाङ्ग (पुं) , हेमदुग्धक (पुं)
कोविदारः. (4) - कोविदार (पुं) , चमरिक (पुं) , कुद्दाल (पुं) , युगपत्रक (पुं)
कोविदारे चमरिकः कुद्दालो युगपत्रकः॥ २.४.१४२ ॥
कोविदारः. (4) - कोविदार (पुं) , चमरिक (पुं) , कुद्दाल (पुं) , युगपत्रक (पुं)
सप्तपर्णः. (4) - सप्तपर्ण (पुं) , विशालत्वच् (पुं) , शारद (पुं) , विषमच्छद (पुं)
सप्तपर्णो विशालत्वक् शारदो विषमच्छदः॥ २.४.१४३ ॥
सप्तपर्णः. (4) - सप्तपर्ण (पुं) , विशालत्वच् (पुं) , शारद (पुं) , विषमच्छद (पुं)
राजवृक्षः. (4) - आरग्वध (पुं) , राजवृक्ष (पुं) , सम्पाक (पुं) , चतुरङ्गुल (पुं)
आरग्वधे राजवृक्षशम्पाकचतुरङ्गुलाः॥ २.४.१४४ ॥
राजवृक्षः. (4) - आरग्वध (पुं) , राजवृक्ष (पुं) , सम्पाक (पुं) , चतुरङ्गुल (पुं)
राजवृक्षः. (4) - आरेवत (पुं) , व्याधिघात (पुं) , कृतमाल (पुं) , सुवर्णक (पुं)
आरेवतव्याधिघातकृतमालसुवर्णकाः॥ २.४.१४५ ॥
राजवृक्षः. (4) - आरेवत (पुं) , व्याधिघात (पुं) , कृतमाल (पुं) , सुवर्णक (पुं)
जम्भीरः. (5) - जम्बीर (पुं) , दन्तशठ (पुं) , जम्भ (पुं) , जम्भीर (पुं) , जम्भल (पुं)
स्युर्जम्बीरे दन्तशठजम्भजम्भीरजम्भलाः॥ २.४.१४६ ॥
जम्भीरः. (5) - जम्बीर (पुं) , दन्तशठ (पुं) , जम्भ (पुं) , जम्भीर (पुं) , जम्भल (पुं)
वरणः. (5) - वरुण (पुं) , वरण (पुं) , सेतु (पुं) , तिक्तशाक (पुं) , कुमारक (पुं)
वरुणो वरणः सेतुस्तिक्तशाकः कुमारकः॥ २.४.१४७ ॥
वरणः. (5) - वरुण (पुं) , वरण (पुं) , सेतु (पुं) , तिक्तशाक (पुं) , कुमारक (पुं)
पुन्नागः. (5) - पुंनाग (पुं) , पुरुष (पुं) , तुङ्ग (पुं) , केसर (पुं) , देववल्लभ (पुं)
पुंनागे पुरुषस्तुङ्गः केसरो देववल्लभः॥ २.४.१४८ ॥
पुन्नागः. (5) - पुंनाग (पुं) , पुरुष (पुं) , तुङ्ग (पुं) , केसर (पुं) , देववल्लभ (पुं)
निम्बतरुः-वकायिनी. (4) - पारिभद्र (पुं) , निम्बतरु (पुं) , मन्दार (पुं) , पारिजातक (पुं)
पारिभद्रे निम्बतरुर्मन्दारः पारिजातकः॥ २.४.१४९ ॥
निम्बतरुः-वकायिनी. (4) - पारिभद्र (पुं) , निम्बतरु (पुं) , मन्दार (पुं) , पारिजातक (पुं)
तिनिशः. (5) - तिनिश (पुं) , स्यन्दन (पुं) , नेमिन् (पुं) , रथद्रु (पुं) , अतिमुक्तक (पुं)
तिनिशे स्यन्दनो नेमी रथद्रुरतिमुक्तकः॥ २.४.१५० ॥
तिनिशः. (5) - तिनिश (पुं) , स्यन्दन (पुं) , नेमिन् (पुं) , रथद्रु (पुं) , अतिमुक्तक (पुं)
तिनिशः. (2) - वञ्जुल (पुं) , चित्रकृत् (पुं) , आम्रातकः-अम्बाडा. (2) - पीतन (पुं) , कपीतन (पुं)
वञ्जुलश्चित्रकृच्चाथ द्वौ पीतनकपीतनौ॥ २.४.१५१ ॥
तिनिशः. (2) - वञ्जुल (पुं) , चित्रकृत् (पुं) , आम्रातकः-अम्बाडा. (2) - पीतन (पुं) , कपीतन (पुं)
आम्रातकः-अम्बाडा. (1) - आम्रातक (पुं) , मधूकः. (3) - मधूक (पुं) , गुडपुष्प (पुं) , मधुद्रुम (पुं)
आम्रातके मधूके तु गुडपुष्पमधुद्रुमौ॥ २.४.१५२ ॥
आम्रातकः-अम्बाडा. (1) - आम्रातक (पुं) , मधूकः. (3) - मधूक (पुं) , गुडपुष्प (पुं) , मधुद्रुम (पुं)
मधूकः. (2) - वानप्रस्थ (पुं) , मधुष्ठील (पुं) ; जलजमधूकः. (1) - मधूलक (पुं)
वानप्रस्थमधुष्ठीलौ जलजेऽत्र मधूलकः॥ २.४.१५३ ॥
मधूकः. (2) - वानप्रस्थ (पुं) , मधुष्ठील (पुं) ; जलजमधूकः. (1) - मधूलक (पुं)
पीलुः. (3) - पीलु (पुं) , गुडफल (पुं) , स्रंसिन् (पुं)
पीलौ गुडफलः स्रंसी तस्मिंस्तु गिरिसम्भवे॥ २.४.१५४ ॥
पीलुः. (3) - पीलु (पुं) , गुडफल (पुं) , स्रंसिन् (पुं)
पर्वतपीलुः. (2) - अक्षोट (पुं) , कन्दराल (पुं) ; अङ्कोलः. (2) - अङ्कोट (पुं) , निकोचक (पुं)
अक्षोटकन्दरालौ द्वावङ्कोटे तु निकोचकः॥ २.४.१५५ ॥
पर्वतपीलुः. (2) - अक्षोट (पुं) , कन्दराल (पुं) ; अङ्कोलः. (2) - अङ्कोट (पुं) , निकोचक (पुं)
पलाशः. (4) - पलाश (पुं) , किंशुक (पुं) , पर्ण (पुं) , वातपोथ (पुं) ; वेतसः. (1) - वेतस (पुं)
पलाशे किंशुकः पर्णो वातपोतोऽथ वेतसे॥ २.४.१५६ ॥
पलाशः. (4) - पलाश (पुं) , किंशुक (पुं) , पर्ण (पुं) , वातपोथ (पुं) ; वेतसः. (1) - वेतस (पुं)
वेतसः. (5) - रथ (पुं) , अभ्रपुष्प (पुं) , शीत (पुं) , वानीर (पुं) , वञ्जुल (पुं) ; अम्बुवेतसः. (1) - विदुल (पुं)
रथाभ्रपुष्पविदुरशीतवानीरवञ्जुलाः॥ २.४.१५७ ॥
वेतसः. (5) - रथ (पुं) , अभ्रपुष्प (पुं) , शीत (पुं) , वानीर (पुं) , वञ्जुल (पुं) ; अम्बुवेतसः. (1) - विदुल (पुं)
अम्बुवेतसः. (3) - परिव्याध (पुं) , नादेयी (स्त्री) , अम्बुवेतस (पुं) ; वेतसः. (1) - विदुल (पुं)
द्वौ परिव्याधविदुलौ नादेयी चाम्बुवेतसे॥ २.४.१५८ ॥
अम्बुवेतसः. (3) - परिव्याध (पुं) , नादेयी (स्त्री) , अम्बुवेतस (पुं) ; वेतसः. (1) - विदुल (पुं)
शिग्रुः. (5) - शोभाञ्जन (पुं) , शिग्रु (पुं) , तीक्ष्णगन्धक (पुं) , आक्षीव (पुं) , मोचक (पुं)
शोभाञ्जने शिग्रुतीक्ष्णगन्धकाक्षीवमोचकाः॥ २.४.१५९ ॥
शिग्रुः. (5) - शोभाञ्जन (पुं) , शिग्रु (पुं) , तीक्ष्णगन्धक (पुं) , आक्षीव (पुं) , मोचक (पुं)
रक्तशिग्रुः. (1) - मधुशिग्रु (पुं) ; अरिष्टः-रीढा. (2) - अरिष्ट (पुं) , फेनिल (पुं)
रक्तोऽसौ मधुशिग्रुः स्यादरिष्टः फेनिलः समौ॥ २.४.१६० ॥
रक्तशिग्रुः. (1) - मधुशिग्रु (पुं) ; अरिष्टः-रीढा. (2) - अरिष्ट (पुं) , फेनिल (पुं)
बिल्ववृक्षः. (5) - बिल्व (पुं) , शाण्डिल्य (पुं) , शैलूष (पुं) , मालूर (पुं) , श्रीफल (पुं)
बिल्वे शाण्डिल्यशैलूषौ मालूरश्रीफलावपि॥ २.४.१६१ ॥
बिल्ववृक्षः. (5) - बिल्व (पुं) , शाण्डिल्य (पुं) , शैलूष (पुं) , मालूर (पुं) , श्रीफल (पुं)
प्लक्षः. (3) - प्लक्ष (पुं) , जटिन् (पुं) , पर्कटि (पुं) ; वटवृक्षः. (3) - न्यग्रोध (पुं) , बहुपाद् (पुं) , वट (पुं)
प्लक्षो जटी पर्कटी स्यान्न्यग्रोधो बहुपाद्वटः॥ २.४.१६२ ॥
प्लक्षः. (3) - प्लक्ष (पुं) , जटिन् (पुं) , पर्कटि (पुं) ; वटवृक्षः. (3) - न्यग्रोध (पुं) , बहुपाद् (पुं) , वट (पुं)
श्वेतलोध्रः. (6) - गालव (पुं) , शाबर (पुं) , लोध्र (पुं) , तिरीट (पुं) , तिल्व (पुं) , मार्जन (पुं)
गालवः शाबरो लोध्रस्तिरीटस्तिल्वमार्जनौ॥ २.४.१६३ ॥
श्वेतलोध्रः. (6) - गालव (पुं) , शाबर (पुं) , लोध्र (पुं) , तिरीट (पुं) , तिल्व (पुं) , मार्जन (पुं)
आम्रवृक्षः. (3) - आम्र (पुं) , चूत (पुं) , रसाल (पुं) ; अतिसुगन्धाम्रवृक्षः. (1) - सहकार (पुं)
आम्रश्चूतो रसालोऽसौ सहकारोऽतिसौरभः॥ २.४.१६४ ॥
आम्रवृक्षः. (3) - आम्र (पुं) , चूत (पुं) , रसाल (पुं) ; अतिसुगन्धाम्रवृक्षः. (1) - सहकार (पुं)
गुग्गुलुवृक्षः. (5) - कुम्भ (पुं) , उलूखलक (नपुं) , कौशिक (पुं) , गुग्गुलु (पुं) , पुर (पुं)
कुम्भोलूखलकं क्लीबे कौशिको गुग्गुलुः पुरः॥ २.४.१६५ ॥
गुग्गुलुवृक्षः. (5) - कुम्भ (पुं) , उलूखलक (नपुं) , कौशिक (पुं) , गुग्गुलु (पुं) , पुर (पुं)
शेलुवृक्षः. (5) - शेलु (पुं) , श्लेष्मातक (पुं) , शीत (पुं) , उद्दाल (पुं) , बहुवारक (पुं)
शेलुः श्लेष्मातकः शीत उद्दालो बहुवारकः॥ २.४.१६६ ॥
शेलुवृक्षः. (5) - शेलु (पुं) , श्लेष्मातक (पुं) , शीत (पुं) , उद्दाल (पुं) , बहुवारक (पुं)
प्रियालवृक्षः. (4) - राजादन (पुं-नपुं) , प्रियाल (पुं) , सन्नकद्रु (पुं) , धनुष्पट (पुं)
राजादनं प्रियालः स्यात्सन्नकद्रुर्धनुःपटः॥ २.४.१६७ ॥
प्रियालवृक्षः. (4) - राजादन (पुं-नपुं) , प्रियाल (पुं) , सन्नकद्रु (पुं) , धनुष्पट (पुं)
काश्मरीवृक्षः. (4) - गम्भारी (स्त्री) , सर्वतोभद्रा (स्त्री) , काश्मरी (स्त्री) , मधुपर्णिका (स्त्री)
गम्भारी सर्वतोभद्रा काश्मरी मधुपर्णिका॥ २.४.१६८ ॥
काश्मरीवृक्षः. (4) - गम्भारी (स्त्री) , सर्वतोभद्रा (स्त्री) , काश्मरी (स्त्री) , मधुपर्णिका (स्त्री)
काश्मरीवृक्षः. (3) - श्रीपर्णी (स्त्री) , भद्रपर्णी (स्त्री) , काश्मर्य (पुं)
श्रीपर्णी भद्रपर्णी च काश्मर्यश्चाप्यथ द्वयोः॥ २.४.१६९ ॥
काश्मरीवृक्षः. (3) - श्रीपर्णी (स्त्री) , भद्रपर्णी (स्त्री) , काश्मर्य (पुं)
बदरीवृक्षः. (3) - कर्कन्धू (स्त्री-पुं) , बदरी (स्त्री-पुं) , कोली (स्त्री-पुं) ; बदरीफलम्. (3) - कोल (नपुं) , कुवल (नपुं) , फेनिल (पुं)
कर्कन्धूर्बदरी कोलिः कोलं कुवलफेनिले॥ २.४.१७० ॥
बदरीवृक्षः. (3) - कर्कन्धू (स्त्री-पुं) , बदरी (स्त्री-पुं) , कोली (स्त्री-पुं) ; बदरीफलम्. (3) - कोल (नपुं) , कुवल (नपुं) , फेनिल (पुं)
बदरीफलम्. (3) - सौवीर (नपुं) , बदर (नपुं) , घोण्टा (स्त्री) ; विकङ्कतः. (1) - स्वादुकण्टक (पुं)
सौवीरं बदरं घोण्टाप्यथ स्यात्स्वादुकण्टकः॥ २.४.१७१ ॥
बदरीफलम्. (3) - सौवीर (नपुं) , बदर (नपुं) , घोण्टा (स्त्री) ; विकङ्कतः. (1) - स्वादुकण्टक (पुं)
विकङ्कतः. (4) - विकङ्कत (पुं) , श्रुवावृक्ष (पुं) , ग्रन्थिल (पुं) , व्याघ्रपाद् (पुं)
विकङ्कतः सुवावृक्षो ग्रन्थिलो व्याघ्रपादपि॥ २.४.१७२ ॥
विकङ्कतः. (4) - विकङ्कत (पुं) , श्रुवावृक्ष (पुं) , ग्रन्थिल (पुं) , व्याघ्रपाद् (पुं)
नारङ्गी. (2) - ऐरावत (पुं) , नागरङ्ग (पुं) ; भूमिजम्बुका. (2) - नादेयी (स्त्री) , भूमिजम्बुका (स्त्री)
ऐरावतो नागरङ्गो नादेयी भूमिजम्बुका॥ २.४.१७३ ॥
नारङ्गी. (2) - ऐरावत (पुं) , नागरङ्ग (पुं) ; भूमिजम्बुका. (2) - नादेयी (स्त्री) , भूमिजम्बुका (स्त्री)
तिन्दुकः. (4) - तिन्दुक (पुं) , स्फूर्जक (पुं) , कालस्कन्ध (पुं) , शितिसारक (पुं)
तिन्दुकः स्फूर्जकः कालस्कन्धश्च शितिसारके॥ २.४.१७४ ॥
तिन्दुकः. (4) - तिन्दुक (पुं) , स्फूर्जक (पुं) , कालस्कन्ध (पुं) , शितिसारक (पुं)
कटुतिन्दुकः. (4) - काकेन्दु (पुं) , कुलक (पुं) , काकतिन्दुक (पुं) , काकपीलुक (पुं)
काकेन्दुः कुलकः काकतिन्दुकः काकपीलुके॥ २.४.१७५ ॥
कटुतिन्दुकः. (4) - काकेन्दु (पुं) , कुलक (पुं) , काकतिन्दुक (पुं) , काकपीलुक (पुं)
मुष्ककवृक्षः. (5) - गोलीढ (पुं) , झाटल (पुं) , घण्टापाटलि (स्त्री-पुं) , मोक्ष (पुं) , मुष्कक (पुं)
गोलीढो झाटलो घण्टापाटलिर्मोक्षमुष्ककौ॥ २.४.१७६ ॥
मुष्ककवृक्षः. (5) - गोलीढ (पुं) , झाटल (पुं) , घण्टापाटलि (स्त्री-पुं) , मोक्ष (पुं) , मुष्कक (पुं)
तिलकवृक्षः. (3) - तिलक (पुं) , क्षुरक (पुं) , श्रीमत् (पुं) ; झावुकः. (2) - पिचुल (पुं) , झावुक (पुं)
तिलकः क्षुरकः श्रीमान्समौ पिचुलझावुकौ॥ २.४.१७७ ॥
तिलकवृक्षः. (3) - तिलक (पुं) , क्षुरक (पुं) , श्रीमत् (पुं) ; झावुकः. (2) - पिचुल (पुं) , झावुक (पुं)
कुम्भी. (5) - श्रीपर्णिका (स्त्री) , कुमुदिका (स्त्री) , कुम्भी (स्त्री) , कैटर्य (पुं) , कट्फल (पुं)
श्रीपर्णिका कुमुदिका कुम्भी कैटर्यकट्फलौ॥ २.४.१७८ ॥
कुम्भी. (5) - श्रीपर्णिका (स्त्री) , कुमुदिका (स्त्री) , कुम्भी (स्त्री) , कैटर्य (पुं) , कट्फल (पुं)
रक्तलोध्रः. (4) - क्रमुक (पुं) , पट्टिकाख्य (पुं) , पट्टी (स्त्री) , लाक्षाप्रसादन (पुं)
क्रमुकः पट्टिकाख्यः स्यात्पट्टी लाक्षाप्रसादनः॥ २.४.१७९ ॥
रक्तलोध्रः. (4) - क्रमुक (पुं) , पट्टिकाख्य (पुं) , पट्टी (स्त्री) , लाक्षाप्रसादन (पुं)
पार्श्वपिप्पलः. (5) - नूद (पुं) , यूप (पुं) , क्रमुक (पुं) , ब्रह्मण्य (पुं) , ब्रह्मदारु (नपुं)
तूदस्तु यूपः क्रमुको ब्रह्मण्यो ब्रह्मदारु च॥ २.४.१८० ॥
पार्श्वपिप्पलः. (5) - नूद (पुं) , यूप (पुं) , क्रमुक (पुं) , ब्रह्मण्य (पुं) , ब्रह्मदारु (नपुं)
पार्श्वपिप्पलः. (1) - तूल (नपुं) ; कदम्बः. (4) - नीप (पुं) , प्रियक (पुं) , कदम्ब (पुं) , हलिप्रिय (पुं)
तूलं च नीपप्रियककदम्बास्तु हरिप्रियः॥ २.४.१८१ ॥
पार्श्वपिप्पलः. (1) - तूल (नपुं) ; कदम्बः. (4) - नीप (पुं) , प्रियक (पुं) , कदम्ब (पुं) , हलिप्रिय (पुं)
भल्लातकी. (4) - वीरवृक्ष (पुं) , अरुष्कर (पुं) , अग्निमुखी (स्त्री) , भल्लातकी (वि)
वीरवृक्षोऽरुष्करोऽग्निमुखी भल्लातकी त्रिषु॥ २.४.१८२ ॥
भल्लातकी. (4) - वीरवृक्ष (पुं) , अरुष्कर (पुं) , अग्निमुखी (स्त्री) , भल्लातकी (वि)
कपीतनवृक्षः. (4) - गर्दभाण्ड (पुं) , कन्दराल (पुं) , कपीतन (पुं) , सुपार्श्वक (पुं)
गर्दभाण्डे कन्दरालकपीतनसुपार्श्वकाः॥ २.४.१८३ ॥
कपीतनवृक्षः. (4) - गर्दभाण्ड (पुं) , कन्दराल (पुं) , कपीतन (पुं) , सुपार्श्वक (पुं)
कपीतनवृक्षः. (1) - प्लक्ष (पुं) ; अम्लिकावृक्षः. (3) - तिन्तिडी (स्त्री) , चिञ्चा (स्त्री) , अम्लिका (स्त्री) ; जीवकः. (1) - पीतसारक (पुं)
प्लक्षश्च तिन्तिडी चिञ्चाम्लिकाथो पीतसारके॥ २.४.१८४ ॥
कपीतनवृक्षः. (1) - प्लक्ष (पुं) ; अम्लिकावृक्षः. (3) - तिन्तिडी (स्त्री) , चिञ्चा (स्त्री) , अम्लिका (स्त्री) ; जीवकः. (1) - पीतसारक (पुं)
जीवकः. (5) - सर्जक (पुं) , असन (पुं) , बन्धूकपुष्प (पुं) , प्रियक (पुं) , जीवक (पुं)
सर्जकासनबन्धूकपुष्पप्रियकजीवकाः॥ २.४.१८५ ॥
जीवकः. (5) - सर्जक (पुं) , असन (पुं) , बन्धूकपुष्प (पुं) , प्रियक (पुं) , जीवक (पुं)
सालवृक्षः. (5) - साल (पुं) , सर्ज (पुं) , कार्श्य (पुं) , अश्वकर्णक (पुं) , सस्यसंवर (पुं)
साले तु सर्जकार्श्याश्वकर्णकाः सस्यसम्बरः॥ २.४.१८६ ॥
सालवृक्षः. (5) - साल (पुं) , सर्ज (पुं) , कार्श्य (पुं) , अश्वकर्णक (पुं) , सस्यसंवर (पुं)
अर्जुनवृक्षः. (5) - नदीसर्ज (पुं) , वीरतरु (पुं) , इन्द्रद्रु (पुं) , ककुभ (पुं) , अर्जुन (पुं)
नदीसर्जो वीरतरुरिन्द्रद्रुः ककुभोऽर्जुनः॥ २.४.१८७ ॥
अर्जुनवृक्षः. (5) - नदीसर्ज (पुं) , वीरतरु (पुं) , इन्द्रद्रु (पुं) , ककुभ (पुं) , अर्जुन (पुं)
क्षीरिका. (3) - राजादन (पुं-नपुं) , फलाध्यक्ष (पुं) , क्षीरिका (स्त्री)
राजादनः फलाध्यक्षः क्षीरिकायामथ द्वयोः॥ २.४.१८८ ॥
क्षीरिका. (3) - राजादन (पुं-नपुं) , फलाध्यक्ष (पुं) , क्षीरिका (स्त्री)
इङ्गुदी. (2) - इङ्गुदी (स्त्री) , तापसतरु (पुं) ; भूर्जवृक्षः. (3) - भूर्ज (पुं) , चर्मिन् (पुं) , मृदुत्वच् (पुं)
इङ्गुदी तापसतरुर्भूर्जे चर्मिमृदुत्वचौ॥ २.४.१८९ ॥
इङ्गुदी. (2) - इङ्गुदी (स्त्री) , तापसतरु (पुं) ; भूर्जवृक्षः. (3) - भूर्ज (पुं) , चर्मिन् (पुं) , मृदुत्वच् (पुं)
शाल्मलिः. (5) - पिच्छिला (स्त्री) , पूरणी (स्त्री) , मोचा (स्त्री) , स्थिरायुस् (पुं) , शाल्मलि (पुं)
पिच्छिला पूरणी मोचा स्थिरायुः शाल्मलिर्द्वयोः॥ २.४.१९० ॥
शाल्मलिः. (5) - पिच्छिला (स्त्री) , पूरणी (स्त्री) , मोचा (स्त्री) , स्थिरायुस् (पुं) , शाल्मलि (पुं)
शाल्मलीक्वाथः. (2) - पिच्छा (स्त्री) , शाल्मलीवेष्ट (पुं) ; कृष्णशाल्मलिः. (2) - रोचन (पुं) , कूटशाल्मलि (पुं)
पिच्छा तु शाल्मलीवेष्टे रोचनः कूटशाल्मलिः॥ २.४.१९१ ॥
शाल्मलीक्वाथः. (2) - पिच्छा (स्त्री) , शाल्मलीवेष्ट (पुं) ; कृष्णशाल्मलिः. (2) - रोचन (पुं) , कूटशाल्मलि (पुं)
करञ्जवृक्षः. (4) - चिरबिल्व (पुं) , नक्तमाल (पुं) , करज (पुं) , करञ्जक (पुं)
चिरबिल्वो नक्तमालः करजश्च करञ्जके॥ २.४.१९२ ॥
करञ्जवृक्षः. (4) - चिरबिल्व (पुं) , नक्तमाल (पुं) , करज (पुं) , करञ्जक (पुं)
कण्टकवत्करञ्जः. (4) - प्रकीर्य (पुं) , पूतिकरज (पुं) , पूतिक (पुं) , कलिमारक (पुं)
प्रकीर्यः पूतिकरजः पूतिकः कलिमारकः॥ २.४.१९३ ॥
कण्टकवत्करञ्जः. (4) - प्रकीर्य (पुं) , पूतिकरज (पुं) , पूतिक (पुं) , कलिमारक (पुं)
करञ्जभेदः. (3) - षड्ग्रन्था (स्त्री) , मर्कटी (स्त्री) , अङ्गारवल्लरी (स्त्री)
करञ्जभेदाः ष्ड्ग्रन्थो मर्कट्यङ्गारवल्लरी॥ २.४.१९४ ॥
करञ्जभेदः. (3) - षड्ग्रन्था (स्त्री) , मर्कटी (स्त्री) , अङ्गारवल्लरी (स्त्री)
रोहितकवृक्षः. (4) - रोहिन् (पुं) , रोहितक (पुं) , प्लीहशत्रु (पुं) , दाडिमपुष्पक (पुं)
रोही रोहितकः प्लीहशत्रुर्दाडिमपुष्पकः॥ २.४.१९५ ॥
रोहितकवृक्षः. (4) - रोहिन् (पुं) , रोहितक (पुं) , प्लीहशत्रु (पुं) , दाडिमपुष्पक (पुं)
खदिरः. (4) - गायत्री (स्त्री) , बालतनय (पुं) , खदिर (पुं) , दन्तधावन (पुं)
गायत्री बालतनयः खदिरो दन्तधावनः॥ २.४.१९६ ॥
खदिरः. (4) - गायत्री (स्त्री) , बालतनय (पुं) , खदिर (पुं) , दन्तधावन (पुं)
दुर्गन्धिखदिरः. (2) - अरिमेद (पुं) , विट्खदिर (पुं) ; श्वेतखदिरः. (1) - कदर (पुं)
अरिमेदो विट्खदिरे कदरः खदिरे सिते॥ २.४.१९७ ॥
दुर्गन्धिखदिरः. (2) - अरिमेद (पुं) , विट्खदिर (पुं) ; श्वेतखदिरः. (1) - कदर (पुं)
श्वेतखदिरः. (1) - सोमवल्क (पुं) ; एरण्डः. (2) - व्याघ्रपुच्छ (पुं) , गन्धर्वहस्तक (पुं)
सोमवल्कोऽप्यथ व्याघ्रपुच्छगन्धर्वहस्तकौ॥ २.४.१९८ ॥
श्वेतखदिरः. (1) - सोमवल्क (पुं) ; एरण्डः. (2) - व्याघ्रपुच्छ (पुं) , गन्धर्वहस्तक (पुं)
एरण्डः. (4) - एरण्ड (पुं) , उरुबूक (पुं) , रुचक (पुं) , चित्रक (पुं)
एरण्ड उरुबूकश्च रुचकश्चित्रकश्च सः॥ २.४.१९९ ॥
एरण्डः. (4) - एरण्ड (पुं) , उरुबूक (पुं) , रुचक (पुं) , चित्रक (पुं)
एरण्डः. (5) - चञ्चु (पुं) , पञ्चाङ्गुल (पुं) , मण्ड (पुं) , वर्धमान (पुं) , व्यडम्बक (पुं)
चञ्चुः पञ्चाङ्गुलो मण्डवर्धमानव्यडम्बकाः॥ २.४.२०० ॥
एरण्डः. (5) - चञ्चु (पुं) , पञ्चाङ्गुल (पुं) , मण्ड (पुं) , वर्धमान (पुं) , व्यडम्बक (पुं)
अल्पशमी. (1) - शमीर (पुं) ; शमीवृक्षः. (3) - शमी (स्त्री) , सक्तुफला (स्त्री) , शिवा (स्त्री)
अल्पा शमी शमीरः स्याच्छमी सक्तुफला शिवा॥ २.४.२०१ ॥
अल्पशमी. (1) - शमीर (पुं) ; शमीवृक्षः. (3) - शमी (स्त्री) , सक्तुफला (स्त्री) , शिवा (स्त्री)
मयनफलवृक्षः. (4) - पिण्डीतक (पुं) , मरुबक (पुं) , श्वसन (पुं) , करहाटक (पुं)
पिण्डीतको मरुबकः श्वसनः करहाटकः॥ २.४.२०२ ॥
मयनफलवृक्षः. (4) - पिण्डीतक (पुं) , मरुबक (पुं) , श्वसन (पुं) , करहाटक (पुं)
मयनफलवृक्षः. (2) - शल्य (पुं) , मदन (पुं) ; देवदारुवृक्षः. (2) - शक्रपादप (पुं) , पारिभद्रक (पुं)
शल्यश्च मदने शक्रपादपः पारिभद्रकः॥ २.४.२०३ ॥
मयनफलवृक्षः. (2) - शल्य (पुं) , मदन (पुं) ; देवदारुवृक्षः. (2) - शक्रपादप (पुं) , पारिभद्रक (पुं)
देवदारुवृक्षः. (4) - भद्रदारु (पुं-नपुं) , द्रुकिलिम (नपुं) , पीतदारु (नपुं) , दारु (नपुं)
भद्रदारु द्रुकिलिमं पीतदारु च दारु च॥ २.४.२०४ ॥
देवदारुवृक्षः. (4) - भद्रदारु (पुं-नपुं) , द्रुकिलिम (नपुं) , पीतदारु (नपुं) , दारु (नपुं)
देवदारुवृक्षः. (2) - पूतिकाष्ठ (नपुं) , देवदारु (पुं-नपुं)
पूतिकाष्ठं च सप्त स्युर्देवदारुण्यथ द्वयोः॥ २.४.२०५ ॥
देवदारुवृक्षः. (2) - पूतिकाष्ठ (नपुं) , देवदारु (पुं-नपुं)
पाटला. (5) - पाटलि (स्त्री-पुं) , पाटला (स्त्री) , अमोघा (स्त्री) , काचस्थाली (स्त्री) , फलेरुहा (स्त्री)
पाटलिः पाटलामोघा काचस्थाली फलेरुहा॥ २.४.२०६ ॥
पाटला. (5) - पाटलि (स्त्री-पुं) , पाटला (स्त्री) , अमोघा (स्त्री) , काचस्थाली (स्त्री) , फलेरुहा (स्त्री)
पाटला. (2) - कृष्णवृन्ता (स्त्री) , कुबेराक्षी (स्त्री) ; प्रियङ्गुवृक्षः. (2) - श्यामा (स्त्री) , महिलाह्वय (स्त्री)
कृष्णवृन्ता कुबेराक्षी श्यामा तु महिलाह्वया॥ २.४.२०७ ॥
पाटला. (2) - कृष्णवृन्ता (स्त्री) , कुबेराक्षी (स्त्री) ; प्रियङ्गुवृक्षः. (2) - श्यामा (स्त्री) , महिलाह्वय (स्त्री)
प्रियङ्गुवृक्षः. (6) - लता (स्त्री) , गोवन्दनी (स्त्री) , गुन्द्रा (स्त्री) , प्रियङ्गु (स्त्री) , फलिनी (स्त्री) , फली (स्त्री)
लता गोवन्दनी गुन्द्रा प्रियङ्गुः फलिनी फली॥ २.४.२०८ ॥
प्रियङ्गुवृक्षः. (6) - लता (स्त्री) , गोवन्दनी (स्त्री) , गुन्द्रा (स्त्री) , प्रियङ्गु (स्त्री) , फलिनी (स्त्री) , फली (स्त्री)
प्रियङ्गुवृक्षः. (4) - विष्वक्सेना (स्त्री) , गन्धफली (स्त्री) , कारम्भा (स्त्री) , प्रियक (पुं)
विष्वक्सेना गन्धफली कारम्भा प्रियकश्च सा॥ २.४.२०९ ॥
प्रियङ्गुवृक्षः. (4) - विष्वक्सेना (स्त्री) , गन्धफली (स्त्री) , कारम्भा (स्त्री) , प्रियक (पुं)
शोणकः. (5) - मण्डूकपर्ण (पुं) , पत्रोर्ण (पुं) , नट (पुं) , कट्वङ्ग (पुं) , टुण्टुक (पुं)
मण्डूकपर्णपत्रोर्णनटकट्वङ्गटुण्टुकाः॥ २.४.२१० ॥
शोणकः. (5) - मण्डूकपर्ण (पुं) , पत्रोर्ण (पुं) , नट (पुं) , कट्वङ्ग (पुं) , टुण्टुक (पुं)
शोणकः. (5) - स्योनाक (पुं) , शुकनास (पुं) , ऋक्ष (पुं) , दीर्घवृन्त (पुं) , कुटन्नट (पुं)
स्योनाकशुकनासर्क्षदीर्घवृन्तकुटन्नटाः॥ २.४.२११ ॥
शोणकः. (5) - स्योनाक (पुं) , शुकनास (पुं) , ऋक्ष (पुं) , दीर्घवृन्त (पुं) , कुटन्नट (पुं)
आमलकी. (2) - अमृता (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) ; विभीतकी. (1) - विभीतक (वि)
अमृता च वयःस्था च त्रिलिङ्गस्तु बिभीतकः॥ २.४.२१२ ॥
आमलकी. (2) - अमृता (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) ; विभीतकी. (1) - विभीतक (वि)
विभीतकी. (5) - अक्ष (पुं) , तुष (पुं) , कर्षफल (पुं) , भूतावास (पुं) , कलिद्रुम (पुं)
नाक्षस्तुषः कर्षफलो भूतावासः कलिद्रुमः॥ २.४.२१३ ॥
विभीतकी. (5) - अक्ष (पुं) , तुष (पुं) , कर्षफल (पुं) , भूतावास (पुं) , कलिद्रुम (पुं)
हरीतकी. (6) - अभया (स्त्री) , अव्यथा (स्त्री) , पथ्या (स्त्री) , कायस्था (स्त्री) , पूतना (स्त्री) , अमृता (स्त्री)
अभया त्वव्यथा पथ्या कायस्था पूतनामृता॥ २.४.२१४ ॥
हरीतकी. (6) - अभया (स्त्री) , अव्यथा (स्त्री) , पथ्या (स्त्री) , कायस्था (स्त्री) , पूतना (स्त्री) , अमृता (स्त्री)
हरीतकी. (5) - हरीतकी (स्त्री) , हैमवती (स्त्री) , चेतकी (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , शिवा (स्त्री)
करीतकी हैमवती चेतकी श्रेयसी शिवा॥ २.४.२१५ ॥
हरीतकी. (5) - हरीतकी (स्त्री) , हैमवती (स्त्री) , चेतकी (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , शिवा (स्त्री)
सरला. (3) - पीतद्रु (पुं) , सरल (पुं) , पूतिकाष्ठ (नपुं) ; कर्णिकारः. (1) - द्रुमोत्पल (पुं)
पीतद्रुः सरलः पूतिकाष्ठं चाथ द्रुमोत्पलः॥ २.४.२१६ ॥
सरला. (3) - पीतद्रु (पुं) , सरल (पुं) , पूतिकाष्ठ (नपुं) ; कर्णिकारः. (1) - द्रुमोत्पल (पुं)
कर्णिकारः. (2) - कर्णिकार (पुं) , परिव्याध (पुं) ; लिकुचः. (3) - लकुच (पुं) , लिकुच (पुं) , डहु (पुं)
कर्णिकारः परिव्याधो लकुचो लिकुचो डहुः॥ २.४.२१७ ॥
कर्णिकारः. (2) - कर्णिकार (पुं) , परिव्याध (पुं) ; लिकुचः. (3) - लकुच (पुं) , लिकुच (पुं) , डहु (पुं)
पनसवृक्षः. (2) - पनस (पुं) , कण्टकिफल (पुं) ; जलवेतसः. (3) - निचुल (पुं) , हिज्जल (पुं) , अम्बुज (पुं)
पनसः कण्टकिफलो निचुलो हिज्जलोऽम्बुजः॥ २.४.२१८ ॥
पनसवृक्षः. (2) - पनस (पुं) , कण्टकिफल (पुं) ; जलवेतसः. (3) - निचुल (पुं) , हिज्जल (पुं) , अम्बुज (पुं)
कदुम्बरी. (4) - काकोदुम्बरिका (स्त्री) , फल्गु (नपुं) , मलपू (स्त्री) , जघनेफला (स्त्री)
काकोदुम्बरिका फल्गुर्मलयूर्जघनेफला॥ २.४.२१९ ॥
कदुम्बरी. (4) - काकोदुम्बरिका (स्त्री) , फल्गु (नपुं) , मलपू (स्त्री) , जघनेफला (स्त्री)
निम्बः. (4) - अरिष्ट (पुं) , सर्वतोभद्र (पुं) , हिङ्गुनिर्यास (पुं) , मालक (पुं)
अरिष्टः सर्वतोभद्रहिङ्गुनिर्यासमालकाः॥ २.४.२२० ॥
निम्बः. (4) - अरिष्ट (पुं) , सर्वतोभद्र (पुं) , हिङ्गुनिर्यास (पुं) , मालक (पुं)
निम्बः. (2) - पिचुमन्द (पुं) , निम्ब (पुं) ; शिंशपा. (3) - पिच्छिल (वि) , अगुरु (नपुं) , शिंशपा (स्त्री)
पिचुमन्दश्च निम्बेऽथ पिच्छिलागुरुशिंशपा॥ २.४.२२१ ॥
निम्बः. (2) - पिचुमन्द (पुं) , निम्ब (पुं) ; शिंशपा. (3) - पिच्छिल (वि) , अगुरु (नपुं) , शिंशपा (स्त्री)
शुक्लसारशिंशपा. (2) - कपिला (स्त्री) , भस्मगर्भा (स्त्री) ; शिरीषः. (2) - शिरीष (पुं) , कपीतन (पुं)
कपिला भस्मगर्भा सा शिरीषस्तु कपीतनः॥ २.४.२२२ ॥
शुक्लसारशिंशपा. (2) - कपिला (स्त्री) , भस्मगर्भा (स्त्री) ; शिरीषः. (2) - शिरीष (पुं) , कपीतन (पुं)
शिरीषः. (1) - भण्डिल (पुं) ; चम्पकः. (3) - चाम्पेय (पुं) , चाम्पक (पुं) , हेमपुष्पक (पुं)
भण्डिलोऽप्यथ चाम्पेयश्चम्पको हेमपुष्पकः॥ २.४.२२३ ॥
शिरीषः. (1) - भण्डिल (पुं) ; चम्पकः. (3) - चाम्पेय (पुं) , चाम्पक (पुं) , हेमपुष्पक (पुं)
चम्पककलिका. (1) - गन्धफली (स्त्री) ; बकुलः. (1) - केसर (पुं-नपुं)
एतस्य कलिका गन्धफली स्यादथ केसरे॥ २.४.२२४ ॥
चम्पककलिका. (1) - गन्धफली (स्त्री) ; बकुलः. (1) - केसर (पुं-नपुं)
बकुलः. (1) - बकुल (पुं) ; अशोकः. (2) - वञ्जुल (पुं) , अशोक (पुं) ; दाडिमः. (2) - करक (पुं) , दाडिम (पुं)
बकुलो वञ्जुलोऽशोके समौ करकदाडिमौ॥ २.४.२२५ ॥
बकुलः. (1) - बकुल (पुं) ; अशोकः. (2) - वञ्जुल (पुं) , अशोक (पुं) ; दाडिमः. (2) - करक (पुं) , दाडिम (पुं)
चाम्पेयः. (4) - चाम्पेय (पुं) , केसर (पुं) , नागकेसर (पुं) , काञ्चनाह्वय (पुं)
चाम्पेयः केसरो नागकेसरः काञ्चनाह्वयः॥ २.४.२२६ ॥
चाम्पेयः. (4) - चाम्पेय (पुं) , केसर (पुं) , नागकेसर (पुं) , काञ्चनाह्वय (पुं)
अम्ब्वरणिः. (5) - जया (स्त्री) , जयन्ती (स्त्री) , तर्कारी (स्त्री) , नादेयी (स्त्री) , वैजयन्तिका (स्त्री)
जया जयन्ती तर्कारी नादेयी वैजयन्तिका॥ २.४.२२७ ॥
अम्ब्वरणिः. (5) - जया (स्त्री) , जयन्ती (स्त्री) , तर्कारी (स्त्री) , नादेयी (स्त्री) , वैजयन्तिका (स्त्री)
अरणिः. (4) - श्रीपर्ण (नपुं) , अग्निमन्थ (पुं) , कणिका (स्त्री) , गणिकारिका (स्त्री)
श्रीपर्णमग्निमन्थः स्यात्कणिका गणिकारिका॥ २.४.२२८ ॥
अरणिः. (4) - श्रीपर्ण (नपुं) , अग्निमन्थ (पुं) , कणिका (स्त्री) , गणिकारिका (स्त्री)
अरणिः. (1) - जय (पुं) ; कुटजः. (4) - कुटज (पुं) , शक्र (पुं) , वत्सक (पुं) , गिरिमल्लिका (स्त्री)
जयोऽथ कुटजः शक्रो वत्सको गिरिमल्लिका॥ २.४.२२९ ॥
अरणिः. (1) - जय (पुं) ; कुटजः. (4) - कुटज (पुं) , शक्र (पुं) , वत्सक (पुं) , गिरिमल्लिका (स्त्री)
कुटजबीजम्. (3) - कलिङ्ग (नपुं) , इन्द्रयव (नपुं) , भद्रयव (नपुं)
एतस्यैव कलिङ्गेन्द्रयवभद्रयवं फले॥ २.४.२३० ॥
कुटजबीजम्. (3) - कलिङ्ग (नपुं) , इन्द्रयव (नपुं) , भद्रयव (नपुं)
करमर्दकः. (4) - कृष्णपाकफल (पुं) , आविग्न (पुं) , सुषेण (पुं) , करमर्दक (पुं)
कृष्णपाकफलाविग्नसुषेणाः करमर्दके॥ २.४.२३१ ॥
करमर्दकः. (4) - कृष्णपाकफल (पुं) , आविग्न (पुं) , सुषेण (पुं) , करमर्दक (पुं)
तमालः. (3) - कालस्कन्ध (पुं) , तमाल (पुं) , तापिच्छ (पुं) ; सिन्दुवारः. (1) - सिन्दुक (पुं)
कालस्कन्धस्तमालः स्यात्तापिच्छोऽप्यथ सिन्दुके॥ २.४.२३२ ॥
तमालः. (3) - कालस्कन्ध (पुं) , तमाल (पुं) , तापिच्छ (पुं) ; सिन्दुवारः. (1) - सिन्दुक (पुं)
सिन्दुवारः. (4) - सिन्दुवार (पुं) , इन्द्रसुरस (पुं) , निर्गुण्डी (स्त्री) , इन्द्राणिका (स्त्री)
सिन्दुवारेन्द्रसुरसौ निर्गुण्डीन्द्राणिकेत्यपि॥ २.४.२३३ ॥
सिन्दुवारः. (4) - सिन्दुवार (पुं) , इन्द्रसुरस (पुं) , निर्गुण्डी (स्त्री) , इन्द्राणिका (स्त्री)
देवतालः. (5) - वेणी (स्त्री) , खरा (स्त्री) , गरी (स्त्री) , देवताड (पुं) , जीमूत (पुं)
वेणी गरा गरी देवताडो जीमूत इत्यपि॥ २.४.२३४ ॥
देवतालः. (5) - वेणी (स्त्री) , खरा (स्त्री) , गरी (स्त्री) , देवताड (पुं) , जीमूत (पुं)
हस्तिकर्णाभपत्रः. (2) - श्रीहस्तिनी (स्त्री) , भूरुण्डी (स्त्री) ; मल्लिका. (2) - तृणशून्य (नपुं) , मल्लिका (स्त्री)
श्रीहस्तिनी तु भूरुण्डी तृणशून्यं तु मल्लिका॥ २.४.२३५ ॥
हस्तिकर्णाभपत्रः. (2) - श्रीहस्तिनी (स्त्री) , भूरुण्डी (स्त्री) ; मल्लिका. (2) - तृणशून्य (नपुं) , मल्लिका (स्त्री)
मल्लिका. (2) - भूपदी (स्त्री) , शीतभीरु (पुं) ; वनमल्ली. (1) - आस्फोटा (स्त्री)
भूपदी शीतभीरुश्च सैवास्फोटा वनोद्भवा॥ २.४.२३६ ॥
मल्लिका. (2) - भूपदी (स्त्री) , शीतभीरु (पुं) ; वनमल्ली. (1) - आस्फोटा (स्त्री)
कृष्णनिर्गुण्डी. (4) - शेफालिका (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , निर्गुण्डी (स्त्री) , नीलिका (स्त्री)
शेफालिका तु सुवहा निर्गुण्डी नीलिका च सा॥ २.४.२३७ ॥
कृष्णनिर्गुण्डी. (4) - शेफालिका (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , निर्गुण्डी (स्त्री) , नीलिका (स्त्री)
श्वेतनिर्गुण्डी. (3) - सिता (स्त्री) , श्वेतसुरसा (स्त्री) , भूतवेशी (स्त्री) ; यूथिका. (1) - मागधी (स्त्री)
सितासौ श्वेतसुरसा भूतवेश्यथ मागधी॥ २.४.२३८ ॥
श्वेतनिर्गुण्डी. (3) - सिता (स्त्री) , श्वेतसुरसा (स्त्री) , भूतवेशी (स्त्री) ; यूथिका. (1) - मागधी (स्त्री)
यूथिका. (3) - गणिका (स्त्री) , यूथिका (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) ; पीतयूथिका. (1) - हेमपुष्पिका (स्त्री)
गणिका यूथिकाम्बष्ठा सा पीता हेमपुष्पिका॥ २.४.२३९ ॥
यूथिका. (3) - गणिका (स्त्री) , यूथिका (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) ; पीतयूथिका. (1) - हेमपुष्पिका (स्त्री)
कुन्दभेदः. (5) - अतिमुक्त (पुं) , पुण्ड्रक (पुं) , वासन्ती (स्त्री) , माधवी (स्त्री) , लता (स्त्री)
अतिमुक्तः पुण्ड्रकः स्याद्वासन्ती माधवी लता॥ २.४.२४० ॥
कुन्दभेदः. (5) - अतिमुक्त (पुं) , पुण्ड्रक (पुं) , वासन्ती (स्त्री) , माधवी (स्त्री) , लता (स्त्री)
मालती. (3) - सुमनस् (स्त्री) , मालती (स्त्री) , जाति (स्त्री) ; नवमालिका. (2) - सप्तला (स्त्री) , नवमालिका (स्त्री)
सुमना मालती जातिः सप्तला नवमालिका॥ २.४.२४१ ॥
मालती. (3) - सुमनस् (स्त्री) , मालती (स्त्री) , जाति (स्त्री) ; नवमालिका. (2) - सप्तला (स्त्री) , नवमालिका (स्त्री)
कुन्दम्. (2) - माध्य (पुं-नपुं) , कुन्द (पुं-नपुं) ; बन्धूकः. (3) - रक्तक (पुं) , बन्धूक (पुं) , बन्धुजीवक (पुं)
माध्यं कुन्दं रक्तकस्तु बन्धूको बन्धुजीवकः॥ २.४.२४२ ॥
कुन्दम्. (2) - माध्य (पुं-नपुं) , कुन्द (पुं-नपुं) ; बन्धूकः. (3) - रक्तक (पुं) , बन्धूक (पुं) , बन्धुजीवक (पुं)
कुमारी. (3) - सहा (स्त्री) , कुमारी (स्त्री) , तरणि (पुं) ; महासहा. (2) - अम्लान (पुं) , महासहा (स्त्री)
सहा कुमारी तरणिरम्लानस्तु महासहा॥ २.४.२४३ ॥
कुमारी. (3) - सहा (स्त्री) , कुमारी (स्त्री) , तरणि (पुं) ; महासहा. (2) - अम्लान (पुं) , महासहा (स्त्री)
रक्तमहासहा. (1) - कुरबक (पुं) ; पीतमहासहा. (1) - कुरण्टक (पुं)
तत्र शोणे कुरबकस्तत्र पीते कुरकण्टकः॥ २.४.२४४ ॥
रक्तमहासहा. (1) - कुरबक (पुं) ; पीतमहासहा. (1) - कुरण्टक (पुं)
नीलझिण्टिका. (5) - नीली (स्त्री) , झिण्टी (स्त्री) , बाणा (स्त्री-पुं) , दासी (स्त्री) , आर्तगल (पुं)
नीली झिण्टी द्वयोर्बाणा दासी चार्तगलश्च सा॥ २.४.२४५ ॥
नीलझिण्टिका. (5) - नीली (स्त्री) , झिण्टी (स्त्री) , बाणा (स्त्री-पुं) , दासी (स्त्री) , आर्तगल (पुं)
झिण्टीसामान्यम्. (2) - सैरेयक (पुं) , झिण्टी (स्त्री) ; रक्तझिण्टिका. (1) - कुरबक (पुं)
सैरेयकस्तु झिण्टी स्यात्तस्मिन्कुरबकोऽरुणे॥ २.४.२४६ ॥
झिण्टीसामान्यम्. (2) - सैरेयक (पुं) , झिण्टी (स्त्री) ; रक्तझिण्टिका. (1) - कुरबक (पुं)
पीतझिण्टिका. (2) - कुरण्टक (पुं) , सहचरी (स्त्री-पुं)
पीता कुरण्टको झिण्टी तस्मिन्सहचरी द्वयोः॥ २.४.२४७ ॥
पीतझिण्टिका. (2) - कुरण्टक (पुं) , सहचरी (स्त्री-पुं)
जपा. (2) - ओड्रपुष्प (नपुं) , जपापुष्प (नपुं) ; तिलपुष्पम्. (1) - वज्रपुष्प (नपुं)
ओण्ड्रपुष्पं जपापुष्पं वज्रपुष्पं तिलस्य यत्॥ २.४.२४८ ॥
जपा. (2) - ओड्रपुष्प (नपुं) , जपापुष्प (नपुं) ; तिलपुष्पम्. (1) - वज्रपुष्प (नपुं)
करवीरः. (4) - प्रतिहास (पुं) , शतप्रास (पुं) , चण्डात (पुं) , हयमारक (पुं)
प्रतिहासशतप्रासचण्डातहयमारकाः॥ २.४.२४९ ॥
करवीरः. (4) - प्रतिहास (पुं) , शतप्रास (पुं) , चण्डात (पुं) , हयमारक (पुं)
करवीरः. (1) - करवीर (पुं) ; करीरः. (3) - करीर (पुं) , क्रकर (पुं) , ग्रन्थिल (पुं)
करवीरे करीरे तु क्रकरग्रन्थिलावुभौ॥ २.४.२५० ॥
करवीरः. (1) - करवीर (पुं) ; करीरः. (3) - करीर (पुं) , क्रकर (पुं) , ग्रन्थिल (पुं)
धत्तूरः. (5) - उन्मत्त (पुं) , कितव (पुं) , धूर्त (पुं) , धत्तूर (पुं) , कनकाह्वय (पुं)
उन्मत्तः कितवो धूर्तो धत्तूरः कनकाह्वयः॥ २.४.२५१ ॥
धत्तूरः. (5) - उन्मत्त (पुं) , कितव (पुं) , धूर्त (पुं) , धत्तूर (पुं) , कनकाह्वय (पुं)
धत्तूरः. (2) - मातुल (पुं) , मदन (पुं) ; धत्तूरफलम्. (1) - मातुलपुत्रक (पुं)
मातुलो मदनश्चास्य फले मातुलपुत्रकः॥ २.४.२५२ ॥
धत्तूरः. (2) - मातुल (पुं) , मदन (पुं) ; धत्तूरफलम्. (1) - मातुलपुत्रक (पुं)
मातुलिङ्गकः. (4) - फलपूर (पुं) , बीजपूर (पुं) , रुचक (पुं) , मातुलुङ्गक (पुं)
फलपूरो बीजपूरो रुचको मातुलुङ्गके॥ २.४.२५३ ॥
मातुलिङ्गकः. (4) - फलपूर (पुं) , बीजपूर (पुं) , रुचक (पुं) , मातुलुङ्गक (पुं)
जम्बीरः. (4) - समीरण (पुं) , मरुबक (पुं) , प्रस्थपुष्प (पुं) , फणिज्जक (पुं)
समीरणो मरुबकः प्रस्थपुष्पः फणिज्जकः॥ २.४.२५४ ॥
जम्बीरः. (4) - समीरण (पुं) , मरुबक (पुं) , प्रस्थपुष्प (पुं) , फणिज्जक (पुं)
जम्बीरः. (1) - जम्बीर (पुं) ; पर्णासः. (3) - पर्णास (पुं) , कठिञ्जर (पुं) , कुठेरक (पुं)
जम्बीरोऽप्यथ पर्णासे कठिञ्जरकुठेरकौ॥ २.४.२५५ ॥
जम्बीरः. (1) - जम्बीर (पुं) ; पर्णासः. (3) - पर्णास (पुं) , कठिञ्जर (पुं) , कुठेरक (पुं)
श्वेतपर्णासः. (1) - अर्जक (पुं) ; चित्रकः. (3) - पाठिन् (पुं) , चित्रक (पुं) , वह्निसंज्ञक (पुं)
सितेऽर्जकोऽत्र पाठी तु चित्रको वह्निसंज्ञकः॥ २.४.२५६ ॥
श्वेतपर्णासः. (1) - अर्जक (पुं) ; चित्रकः. (3) - पाठिन् (पुं) , चित्रक (पुं) , वह्निसंज्ञक (पुं)
अर्कः. (5) - अर्काह्व (पुं) , वसुक (पुं) , आस्फोट (पुं) , गणरूप (पुं) , विकीरण (पुं)
अर्काह्ववसुकास्फोटगणरूपविकीरणाः॥ २.४.२५७ ॥
अर्कः. (5) - अर्काह्व (पुं) , वसुक (पुं) , आस्फोट (पुं) , गणरूप (पुं) , विकीरण (पुं)
अर्कः. (2) - मन्दार (पुं) , अर्कपर्ण (पुं) ; श्वेतार्कः. (2) - अलर्क (पुं) , प्रतापस (पुं)
मन्दारश्चार्कपर्णोऽत्र शुक्लेऽलर्कप्रतापसौ॥ २.४.२५८ ॥
अर्कः. (2) - मन्दार (पुं) , अर्कपर्ण (पुं) ; श्वेतार्कः. (2) - अलर्क (पुं) , प्रतापस (पुं)
बकपुष्पम्. (5) - शिवमल्ली (स्त्री) , पाशुपत (पुं) , एकाष्ठील (पुं) , बुक (पुं) , वसु (पुं)
शिवमल्ली पाशुपत एकाष्ठीलो बुको वसुः॥ २.४.२५९ ॥
बकपुष्पम्. (5) - शिवमल्ली (स्त्री) , पाशुपत (पुं) , एकाष्ठील (पुं) , बुक (पुं) , वसु (पुं)
वृक्षरुहा. (4) - वन्दा (स्त्री) , वृक्षादनी (स्त्री) , वृक्षरुहा (स्त्री) , जीवन्तिका (स्त्री)
वन्दा वृक्षादनी वृक्षरुहा जीवन्तिकेत्यपि॥ २.४.२६० ॥
वृक्षरुहा. (4) - वन्दा (स्त्री) , वृक्षादनी (स्त्री) , वृक्षरुहा (स्त्री) , जीवन्तिका (स्त्री)
गुडूची. (5) - वत्सादनी (स्त्री) , छिन्नरुहा (स्त्री) , गुडूची (स्त्री) , तन्त्रिका (स्त्री) , अमृता (स्त्री)
वत्सादनी छिन्नरुहा गुडूची तन्त्रिकामृता॥ २.४.२६१ ॥
गुडूची. (5) - वत्सादनी (स्त्री) , छिन्नरुहा (स्त्री) , गुडूची (स्त्री) , तन्त्रिका (स्त्री) , अमृता (स्त्री)
गुडूची. (4) - जीवन्तिका (स्त्री) , सोमवल्ली (स्त्री) , विशल्या (स्त्री) , मधुपर्णी (स्त्री)
जीवन्तिका सोमवल्ली विशल्या मधुपर्ण्यपि॥ २.४.२६२ ॥
गुडूची. (4) - जीवन्तिका (स्त्री) , सोमवल्ली (स्त्री) , विशल्या (स्त्री) , मधुपर्णी (स्त्री)
मूर्वा. (6) - मूर्वा (स्त्री) , देवी (स्त्री) , मधुरसा (स्त्री) , मोरटा (स्त्री) , तेजनी (स्त्री) , स्रवा (स्त्री)
मूर्वा देवी मधुरसा मोरटा तेजनी स्रवा॥ २.४.२६३ ॥
मूर्वा. (6) - मूर्वा (स्त्री) , देवी (स्त्री) , मधुरसा (स्त्री) , मोरटा (स्त्री) , तेजनी (स्त्री) , स्रवा (स्त्री)
मूर्वा. (4) - मधूलिका (स्त्री) , मधुश्रेणी (स्त्री) , गोकर्णी (स्त्री) , पीलुपर्णी (स्त्री)
मधूलिका मधुश्रेणी गोकर्णी पीलुपर्ण्यपि॥ २.४.२६४ ॥
मूर्वा. (4) - मधूलिका (स्त्री) , मधुश्रेणी (स्त्री) , गोकर्णी (स्त्री) , पीलुपर्णी (स्त्री)
पाटा. (6) - पाटा (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) , विद्धकर्णी (स्त्री) , स्थापनी (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , रसा (स्त्री)
पाटाम्बष्टा विद्धकर्न्णी स्थापनी श्रेयसी रसा॥ २.४.२६५ ॥
पाटा. (6) - पाटा (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) , विद्धकर्णी (स्त्री) , स्थापनी (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , रसा (स्त्री)
पाटा. (4) - एकाष्टीला (स्त्री) , पापचेली (स्त्री) , प्राचीना (स्त्री) , वनतिक्तका (स्त्री)
एकाष्टीला पापचेली प्राचीना वनतिक्तिका॥ २.४.२६६ ॥
पाटा. (4) - एकाष्टीला (स्त्री) , पापचेली (स्त्री) , प्राचीना (स्त्री) , वनतिक्तका (स्त्री)
कटुरोहिणी. (4) - कटु (स्त्री) , कटम्भरा (स्त्री) , अशोकरोहिणी (स्त्री) , कटुरोहिणी (स्त्री)
कटुः कटम्भराशोकरोहिणी कटुरोहिणी॥ २.४.२६७ ॥
कटुरोहिणी. (4) - कटु (स्त्री) , कटम्भरा (स्त्री) , अशोकरोहिणी (स्त्री) , कटुरोहिणी (स्त्री)
कटुरोहिणी. (4) - मत्स्यपित्ता (स्त्री) , कृष्णभेदी (स्त्री) , चक्राङ्गी (स्त्री) , शकुलादनी (स्त्री)
मत्स्यपित्ता कृष्णभेदी चक्राङ्गी शकुलादनी॥ २.४.२६८ ॥
कटुरोहिणी. (4) - मत्स्यपित्ता (स्त्री) , कृष्णभेदी (स्त्री) , चक्राङ्गी (स्त्री) , शकुलादनी (स्त्री)
मर्कटी. (5) - आत्मगुप्ता (स्त्री) , जहा (स्त्री) , अव्यण्डा (स्त्री) , कण्डूरा (स्त्री) , प्रावृषायणी (स्त्री)
आत्मगुप्ताजहाव्यण्डा कण्डूरा प्रावृषायणी॥ २.४.२६९ ॥
मर्कटी. (5) - आत्मगुप्ता (स्त्री) , जहा (स्त्री) , अव्यण्डा (स्त्री) , कण्डूरा (स्त्री) , प्रावृषायणी (स्त्री)
मर्कटी. (4) - ऋष्यप्रोक्ता (स्त्री) , शूकशिम्बि (स्त्री) , कपिकच्छू (स्त्री) , मर्कटी (स्त्री)
ऋष्यप्रोक्ता शूकशिम्बिः कपिकच्छुश्च मर्कटी॥ २.४.२७० ॥
मर्कटी. (4) - ऋष्यप्रोक्ता (स्त्री) , शूकशिम्बि (स्त्री) , कपिकच्छू (स्त्री) , मर्कटी (स्त्री)
मूषिकपर्णी. (6) - चित्रा (स्त्री) , उपचित्रा (स्त्री) , न्यग्रोधी (स्त्री) , द्रवन्ती (स्त्री) , शम्बरी (स्त्री) , वृषा (स्त्री)
चित्रोपचित्रा न्यग्रोधी द्रवन्ती शम्बरी वृशा॥ २.४.२७१ ॥
मूषिकपर्णी. (6) - चित्रा (स्त्री) , उपचित्रा (स्त्री) , न्यग्रोधी (स्त्री) , द्रवन्ती (स्त्री) , शम्बरी (स्त्री) , वृषा (स्त्री)
मूषिकपर्णी. (4) - प्रत्यक्श्रेणी (स्त्री) , सुतश्रेणी (स्त्री) , रण्डा (स्त्री) , मूषिकपर्णी (स्त्री)
प्रत्यक्ष्रेणी सुतश्रेणी रण्डा मूषिकपर्ण्यपि॥ २.४.२७२ ॥
मूषिकपर्णी. (4) - प्रत्यक्श्रेणी (स्त्री) , सुतश्रेणी (स्त्री) , रण्डा (स्त्री) , मूषिकपर्णी (स्त्री)
अपामार्गः. (4) - अपामार्ग (पुं) , शैखरिक (पुं) , धामार्गव (पुं) , मयूरक (पुं)
अपामार्गः शैखरिको धामार्गवमयूरकौ॥ २.४.२७३ ॥
अपामार्गः. (4) - अपामार्ग (पुं) , शैखरिक (पुं) , धामार्गव (पुं) , मयूरक (पुं)
अपामार्गः. (4) - प्रत्यक्पर्णी (स्त्री) , केशपर्णी (स्त्री) , किणिही (स्त्री) , खरमञ्जरी (स्त्री)
प्रत्यक्पर्णी केशपर्णी किणिही खरमञ्जरी॥ २.४.२७४ ॥
अपामार्गः. (4) - प्रत्यक्पर्णी (स्त्री) , केशपर्णी (स्त्री) , किणिही (स्त्री) , खरमञ्जरी (स्त्री)
भार्गी. (5) - हञ्जिका (स्त्री) , ब्राह्मणी (स्त्री) , पद्मा (स्त्री) , भार्गी (स्त्री) , ब्राह्मणयष्टिका (स्त्री)
हञ्जिका ब्राह्मणी पद्मा भर्गी ब्राह्मणयष्टिका॥ २.४.२७५ ॥
भार्गी. (5) - हञ्जिका (स्त्री) , ब्राह्मणी (स्त्री) , पद्मा (स्त्री) , भार्गी (स्त्री) , ब्राह्मणयष्टिका (स्त्री)
भार्गी. (4) - अङ्गारवल्ली (स्त्री) , बालेयशाक (पुं) , बर्बर (पुं) , वर्धक (पुं)
अङ्गारवल्ली बालेयशाकबर्बरवर्धकाः॥ २.४.२७६ ॥
भार्गी. (4) - अङ्गारवल्ली (स्त्री) , बालेयशाक (पुं) , बर्बर (पुं) , वर्धक (पुं)
मञ्जिष्टा. (5) - मञ्जिष्टा (स्त्री) , विकसा (स्त्री) , जिङ्गी (स्त्री) , समङ्गा (स्त्री) , कालमेषिका (स्त्री)
मञ्जिष्टा विकसा जिङ्गी समङ्गा कालमेषिका॥ २.४.२७७ ॥
मञ्जिष्टा. (5) - मञ्जिष्टा (स्त्री) , विकसा (स्त्री) , जिङ्गी (स्त्री) , समङ्गा (स्त्री) , कालमेषिका (स्त्री)
मञ्जिष्टा. (4) - मण्डूकपर्णी (स्त्री) , भण्डीरी (स्त्री) , भण्डी (स्त्री) , योजनवल्ली (स्त्री)
मण्डूकपर्णी मण्डीरी भण्डी योजनवल्ल्यपि॥ २.४.२७८ ॥
मञ्जिष्टा. (4) - मण्डूकपर्णी (स्त्री) , भण्डीरी (स्त्री) , भण्डी (स्त्री) , योजनवल्ली (स्त्री)
धन्वयासः. (5) - यास (पुं) , यवास (पुं) , दुःस्पर्श (पुं) , धन्वयास (पुं) , कुनाशक (पुं)
यासो यवासो दुःस्पर्शो धन्वयासः कुनाशकः॥ २.४.२७९ ॥
धन्वयासः. (5) - यास (पुं) , यवास (पुं) , दुःस्पर्श (पुं) , धन्वयास (पुं) , कुनाशक (पुं)
धन्वयासः. (5) - रोदनी (स्त्री) , कच्छु (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , समुद्रान्ता (स्त्री) , दुरालभा (स्त्री)
रोदनी कच्छुरानन्ता समुद्रान्ता दुरालभा॥ २.४.२८० ॥
धन्वयासः. (5) - रोदनी (स्त्री) , कच्छु (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , समुद्रान्ता (स्त्री) , दुरालभा (स्त्री)
सिंहिपुच्छी. (4) - पृश्निपर्णी (स्त्री) , पृथक्पर्णी (स्त्री) , चित्रपर्णी (स्त्री) , अङ्घ्रिवल्लिका (स्त्री)
पृश्निपर्णी पृथक्पर्णी चित्रपर्ण्यङ्घ्रिवल्लिका॥ २.४.२८१ ॥
सिंहिपुच्छी. (4) - पृश्निपर्णी (स्त्री) , पृथक्पर्णी (स्त्री) , चित्रपर्णी (स्त्री) , अङ्घ्रिवल्लिका (स्त्री)
सिंहिपुच्छी. (5) - क्रोष्टुविन्ना (स्त्री) , सिंहपुच्छी (स्त्री) , कलशी (स्त्री) , धावनी (स्त्री) , गुहा (स्त्री)
क्रोष्टुविन्ना सिंहपुच्छी कलशी धावनी गुहा॥ २.४.२८२ ॥
सिंहिपुच्छी. (5) - क्रोष्टुविन्ना (स्त्री) , सिंहपुच्छी (स्त्री) , कलशी (स्त्री) , धावनी (स्त्री) , गुहा (स्त्री)
कण्टकारिका. (5) - निदिग्धिका (स्त्री) , स्पृशी (स्त्री) , व्याघ्री (स्त्री) , बृहती (स्त्री) , कण्टकारिका (स्त्री)
निदिग्धिका स्पृशी व्याघ्री बृहती कण्टकारिका॥ २.४.२८३ ॥
कण्टकारिका. (5) - निदिग्धिका (स्त्री) , स्पृशी (स्त्री) , व्याघ्री (स्त्री) , बृहती (स्त्री) , कण्टकारिका (स्त्री)
कण्टकारिका. (5) - प्रचोदनी (स्त्री) , कुली (स्त्री) , क्षुद्रा (स्त्री) , दुःस्पर्शा (स्त्री) , राष्ट्रिका (स्त्री)
प्रचोदनी कुली क्षुद्रा दुःस्पर्शा राष्ट्रिकेत्यपि॥ २.४.२८४ ॥
कण्टकारिका. (5) - प्रचोदनी (स्त्री) , कुली (स्त्री) , क्षुद्रा (स्त्री) , दुःस्पर्शा (स्त्री) , राष्ट्रिका (स्त्री)
नीली. (5) - नीली (स्त्री) , काला (स्त्री) , क्लीतकिका (स्त्री) , ग्रामीणा (स्त्री) , मधुपर्णिका (स्त्री)
नीली काला क्लीतकिका ग्रामीणा मधुपर्णिका॥ २.४.२८५ ॥
नीली. (5) - नीली (स्त्री) , काला (स्त्री) , क्लीतकिका (स्त्री) , ग्रामीणा (स्त्री) , मधुपर्णिका (स्त्री)
नीली. (6) - रञ्जनी (स्त्री) , श्रीफली (स्त्री) , तुत्था (स्त्री) , द्रोणी (स्त्री) , दोला (स्त्री) , नीलिनी (स्त्री)
रञ्जनी श्रीफली तुत्था द्रोणी दोला च नीलिनी॥ २.४.२८६ ॥
नीली. (6) - रञ्जनी (स्त्री) , श्रीफली (स्त्री) , तुत्था (स्त्री) , द्रोणी (स्त्री) , दोला (स्त्री) , नीलिनी (स्त्री)
बाकुची. (4) - अवल्गुज (पुं) , सोमराजी (स्त्री) , सुवल्ली (स्त्री) , सोमवल्लिका (स्त्री)
अवल्गुजः सोमराजी सुवल्लिः सोमवल्लिका॥ २.४.२८७ ॥
बाकुची. (4) - अवल्गुज (पुं) , सोमराजी (स्त्री) , सुवल्ली (स्त्री) , सोमवल्लिका (स्त्री)
बाकुची. (4) - कालमेषी (स्त्री) , कृष्णफली (स्त्री) , बाकुची (स्त्री) , पूतिफली (स्त्री)
कालमेषी कृष्णफली बाकुची पूतिफल्यपि॥ २.४.२८८ ॥
बाकुची. (4) - कालमेषी (स्त्री) , कृष्णफली (स्त्री) , बाकुची (स्त्री) , पूतिफली (स्त्री)
पिप्पली. (6) - कृष्णा (स्त्री) , उपकुल्या (स्त्री) , वैदेही (स्त्री) , मागधी (स्त्री) , चपला (स्त्री) , कणा (स्त्री)
कृष्णोपकुल्या वैदेही मागधी चपला कणा॥ २.४.२८९ ॥
पिप्पली. (6) - कृष्णा (स्त्री) , उपकुल्या (स्त्री) , वैदेही (स्त्री) , मागधी (स्त्री) , चपला (स्त्री) , कणा (स्त्री)
पिप्पली. (4) - उषणा (स्त्री) , पिप्पली (स्त्री) , शौण्डी (स्त्री) , कोला (स्त्री) ; गजपिप्पली. (1) - करिपिप्पली (स्त्री)
उषणा पिप्पली शौण्डी कोलाथ करिपिप्पली॥ २.४.२९० ॥
पिप्पली. (4) - उषणा (स्त्री) , पिप्पली (स्त्री) , शौण्डी (स्त्री) , कोला (स्त्री) ; गजपिप्पली. (1) - करिपिप्पली (स्त्री)
गजपिप्पली. (4) - कपिवल्ली (स्त्री) , कोलवल्ली (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , वशिर (पुं)
कपिवल्ली कोलवल्ली श्रेयसी वशिरः पुमान्॥ २.४.२९१ ॥
गजपिप्पली. (4) - कपिवल्ली (स्त्री) , कोलवल्ली (स्त्री) , श्रेयसी (स्त्री) , वशिर (पुं)
चव्यम्. (2) - चव्य (नपुं) , चविका (स्त्री) ; काकचिञ्चा. (3) - काकचिञ्चा (स्त्री) , गुञ्जा (स्त्री) , कृष्णला (स्त्री)
चव्यं तु चविका काकचिञ्चीगुञ्जे तु कृष्णला॥ २.४.२९२ ॥
चव्यम्. (2) - चव्य (नपुं) , चविका (स्त्री) ; काकचिञ्चा. (3) - काकचिञ्चा (स्त्री) , गुञ्जा (स्त्री) , कृष्णला (स्त्री)
गोक्षुरकः. (4) - पलङ्कषा (स्त्री) , इक्षुगन्धा (स्त्री) , श्वदंष्ट्रा (स्त्री) , स्वादुकण्टक (पुं)
पलंकषा त्विक्षुगन्धा श्वदंष्ट्रा स्वादुकण्टकः॥ २.४.२९३ ॥
गोक्षुरकः. (4) - पलङ्कषा (स्त्री) , इक्षुगन्धा (स्त्री) , श्वदंष्ट्रा (स्त्री) , स्वादुकण्टक (पुं)
गोक्षुरकः. (3) - गोकण्टक (पुं) , गोक्षुरक (पुं) , वनशृङ्गाट (पुं)
गोकण्टको गोक्षुरको वनशृन्ङ्गाट इत्यपि॥ २.४.२९४ ॥
गोक्षुरकः. (3) - गोकण्टक (पुं) , गोक्षुरक (पुं) , वनशृङ्गाट (पुं)
अतिविषा. (6) - विश्वा (स्त्री) , विषा (स्त्री) , प्रतिविषा (स्त्री) , अतिविषा (स्त्री) , उपविषा (स्त्री) , अरुणा (स्त्री)
विश्वा विषा प्रतिविषातिविषोपविषारुणा॥ २.४.२९५ ॥
अतिविषा. (6) - विश्वा (स्त्री) , विषा (स्त्री) , प्रतिविषा (स्त्री) , अतिविषा (स्त्री) , उपविषा (स्त्री) , अरुणा (स्त्री)
अतिविषा. (2) - शृङ्गी (स्त्री) , महौषध (नपुं) ; दुग्धिका. (2) - क्षीरावी (स्त्री) , दुग्धिका (स्त्री)
शृन्गी महौषधं चाथ क्षीरावी दुग्धिका समे॥ २.४.२९६ ॥
अतिविषा. (2) - शृङ्गी (स्त्री) , महौषध (नपुं) ; दुग्धिका. (2) - क्षीरावी (स्त्री) , दुग्धिका (स्त्री)
शतावरी. (5) - शतमूली (स्त्री) , बहुसुता (स्त्री) , भीरु (स्त्री) , इन्दीवरी (स्त्री) , वरी (स्त्री)
शतमूली बहुसुताभीरूरिन्दीवरी वरी॥ २.४.२९७ ॥
शतावरी. (5) - शतमूली (स्त्री) , बहुसुता (स्त्री) , भीरु (स्त्री) , इन्दीवरी (स्त्री) , वरी (स्त्री)
शतावरी. (4) - ऋष्यप्रोक्ता (स्त्री) , भीरुपत्री (स्त्री) , नारायणी (स्त्री) , शतावरी (स्त्री)
ऋष्यप्रोक्ताभीरुपत्रीनारायण्यः शतावरी॥ २.४.२९८ ॥
शतावरी. (4) - ऋष्यप्रोक्ता (स्त्री) , भीरुपत्री (स्त्री) , नारायणी (स्त्री) , शतावरी (स्त्री)
शतावरी. (1) - अहेरु (स्त्री) ; दारुहरिद्रा. (3) - पीतद्रु (पुं) , कालीयक (पुं) , हरिद्रव (पुं)
अहेरुरथ पीतद्रुकालीयकहरिद्रवः॥ २.४.२९९ ॥
शतावरी. (1) - अहेरु (स्त्री) ; दारुहरिद्रा. (3) - पीतद्रु (पुं) , कालीयक (पुं) , हरिद्रव (पुं)
दारुहरिद्रा. (4) - दार्वी (स्त्री) , पचम्पचा (स्त्री) , दारुहरिद्रा (स्त्री) , पर्जनी (स्त्री)
दार्वी पचंपचा दारुहरिद्रा पर्जनीत्यपि॥ २.४.३०० ॥
दारुहरिद्रा. (4) - दार्वी (स्त्री) , पचम्पचा (स्त्री) , दारुहरिद्रा (स्त्री) , पर्जनी (स्त्री)
वचा. (5) - वचा (स्त्री) , उग्रगन्धा (स्त्री) , षड्ग्रन्था (स्त्री) , गोलोमी (स्त्री) , शतपर्विका (स्त्री)
वचोग्रगन्धा षड्ग्रन्था गोलोमी शतपर्विका॥ २.४.३०१ ॥
वचा. (5) - वचा (स्त्री) , उग्रगन्धा (स्त्री) , षड्ग्रन्था (स्त्री) , गोलोमी (स्त्री) , शतपर्विका (स्त्री)
श्वेतमूलवचा. (1) - हैमवती (स्त्री) ; वाशा. (3) - वैद्यमातृ (स्त्री) , सिंही (स्त्री) , वाशिका (स्त्री)
शुक्ला हैमवती वैध्यमातृसिंह्यौ तु वाशिका॥ २.४.३०२ ॥
श्वेतमूलवचा. (1) - हैमवती (स्त्री) ; वाशा. (3) - वैद्यमातृ (स्त्री) , सिंही (स्त्री) , वाशिका (स्त्री)
वाशा. (5) - वृष (पुं) , अटरूष (पुं) , सिंहास्य (पुं) , वासक (पुं) , वाजिदन्तक (पुं)
वृषोऽटरूषः सिंहास्यो वासको वाजिदन्तकः॥ २.४.३०३ ॥
वाशा. (5) - वृष (पुं) , अटरूष (पुं) , सिंहास्य (पुं) , वासक (पुं) , वाजिदन्तक (पुं)
विष्णुक्रान्ता. (4) - आस्फोटा (स्त्री) , गिरिकर्णी (स्त्री) , विष्णुक्रान्ता (स्त्री) , अपराजिता (स्त्री)
आस्फोटा गिरिकर्णी स्याद्विष्णुक्रान्तापराजिता॥ २.४.३०४ ॥
विष्णुक्रान्ता. (4) - आस्फोटा (स्त्री) , गिरिकर्णी (स्त्री) , विष्णुक्रान्ता (स्त्री) , अपराजिता (स्त्री)
इक्षुगन्धा. (5) - इक्षुगन्धा (स्त्री) , काण्डेक्षु (पुं) , कोकिलाक्ष (पुं) , इक्षुर (पुं) , क्षुर (पुं)
इक्षुगन्धा तु काण्डेक्षुकोकिलाक्षेक्षुरक्षुराः॥ २.४.३०५ ॥
इक्षुगन्धा. (5) - इक्षुगन्धा (स्त्री) , काण्डेक्षु (पुं) , कोकिलाक्ष (पुं) , इक्षुर (पुं) , क्षुर (पुं)
मधुरिका. (5) - शालेय (पुं) , शीतशिव (पुं) , छत्रा (स्त्री) , मधुरिका (स्त्री) , मिसि (स्त्री)
शालेयः स्याच्छीतशिवश्छत्रा मधुरिका मिसिः॥ २.४.३०६ ॥
मधुरिका. (5) - शालेय (पुं) , शीतशिव (पुं) , छत्रा (स्त्री) , मधुरिका (स्त्री) , मिसि (स्त्री)
मधुरिका. (1) - मिश्रेय (पुं) ; सीहुण्डः. (5) - सीहुण्ड (पुं) , वज्रद्रु (पुं) , स्नुक् (स्त्री) , स्नुही (स्त्री) , गुडा (स्त्री)
मिश्रेयाप्यथ सीहुण्डो वज्रः स्नुक्स्त्री स्नुही गुडा॥ २.४.३०७ ॥
मधुरिका. (1) - मिश्रेय (पुं) ; सीहुण्डः. (5) - सीहुण्ड (पुं) , वज्रद्रु (पुं) , स्नुक् (स्त्री) , स्नुही (स्त्री) , गुडा (स्त्री)
सीहुण्डः. (1) - समन्तदुग्धा (स्त्री) ; विडङ्गम्. (3) - वेल्ल (पुं-नपुं) , अमोघा (स्त्री) , चित्रतण्डुला (स्त्री)
समन्तदुग्धाथो वेल्लममोघा चित्रतण्डुला॥ २.४.३०८ ॥
सीहुण्डः. (1) - समन्तदुग्धा (स्त्री) ; विडङ्गम्. (3) - वेल्ल (पुं-नपुं) , अमोघा (स्त्री) , चित्रतण्डुला (स्त्री)
विडङ्गम्. (3) - तण्डुल (पुं) , कृमिघ्न (पुं) , विडङ्ग (पुं-नपुं)
तण्डुलश्च कृमिघ्नश्च विडङ्गं पुंनपुंसकम्॥ २.४.३०९ ॥
विडङ्गम्. (3) - तण्डुल (पुं) , कृमिघ्न (पुं) , विडङ्ग (पुं-नपुं)
बला. (2) - बला (स्त्री) , वाट्यालक (पुं) ; घण्टारवा. (2) - घण्टारवा (स्त्री) , शणपुष्पिका (स्त्री)
बला वाट्यालका घण्टारवा तु शणपुष्पिका॥ २.४.३१० ॥
बला. (2) - बला (स्त्री) , वाट्यालक (पुं) ; घण्टारवा. (2) - घण्टारवा (स्त्री) , शणपुष्पिका (स्त्री)
द्राक्षा. (5) - मृद्वीका (स्त्री) , गोस्तनी (स्त्री) , द्राक्षा (स्त्री) , स्वाद्वी (स्त्री) , मधुरसा (स्त्री)
मृद्वीका गोस्तनी द्राक्षा स्वाद्वी मधुरसेति च॥ २.४.३११ ॥
द्राक्षा. (5) - मृद्वीका (स्त्री) , गोस्तनी (स्त्री) , द्राक्षा (स्त्री) , स्वाद्वी (स्त्री) , मधुरसा (स्त्री)
शुक्लत्रिधारा. (5) - सर्वानुभूति (स्त्री) , सरला (स्त्री) , त्रिपुटा (स्त्री) , त्रिवृता (स्त्री) , त्रिवृत् (स्त्री)
सर्वानुभूतिः सरला त्रिपुटा त्रिवृता त्रिवृत्॥ २.४.३१२ ॥
शुक्लत्रिधारा. (5) - सर्वानुभूति (स्त्री) , सरला (स्त्री) , त्रिपुटा (स्त्री) , त्रिवृता (स्त्री) , त्रिवृत् (स्त्री)
शुक्लत्रिधारा. (2) - त्रिभण्डी (स्त्री) , रोचनी (स्त्री) ; श्यामत्रिधारा. (3) - श्यामा (स्त्री) , पालिन्दी (स्त्री) , सुषेणिका (स्त्री)
त्रिभण्डी रोचनी श्यामापालिन्ध्यौ तु सुषेणिका॥ २.४.३१३ ॥
शुक्लत्रिधारा. (2) - त्रिभण्डी (स्त्री) , रोचनी (स्त्री) ; श्यामत्रिधारा. (3) - श्यामा (स्त्री) , पालिन्दी (स्त्री) , सुषेणिका (स्त्री)
श्यामत्रिधारा. (4) - काला (स्त्री) , मसूरविदला (स्त्री) , अर्धचन्द्रा (स्त्री) , कालमेषिका (स्त्री)
काला मसूरविदलार्धचन्द्रा कालमेषिका॥ २.४.३१४ ॥
श्यामत्रिधारा. (4) - काला (स्त्री) , मसूरविदला (स्त्री) , अर्धचन्द्रा (स्त्री) , कालमेषिका (स्त्री)
यष्टिमधुकम्. (4) - मधुक (नपुं) , क्लीतक (नपुं) , यष्टिमधुक (नपुं) , मधुयष्टिका (स्त्री)
मधुकं क्लीतकं यष्टिमधुकं मधुयष्टिका॥ २.४.३१५ ॥
यष्टिमधुकम्. (4) - मधुक (नपुं) , क्लीतक (नपुं) , यष्टिमधुक (नपुं) , मधुयष्टिका (स्त्री)
कृष्णभूकूश्माण्डः. (5) - विदारी (स्त्री) , क्षीरशुक्ला (स्त्री) , इक्षुगन्धा (स्त्री) , क्रोष्ट्री (स्त्री) , सिता (स्त्री)
विदारी क्षीरशुक्लेक्षुगन्धा क्रोष्टी तु या सिता॥ २.४.३१६ ॥
कृष्णभूकूश्माण्डः. (5) - विदारी (स्त्री) , क्षीरशुक्ला (स्त्री) , इक्षुगन्धा (स्त्री) , क्रोष्ट्री (स्त्री) , सिता (स्त्री)
शुक्लभूकूश्माण्डः. (3) - क्षीरविदारी (स्त्री) , महाश्वेता (स्त्री) , ऋक्षगन्धिका (स्त्री)
अन्या क्षीरविदारी स्यान्महाश्वेतर्क्षगन्धिका॥ २.४.३१७ ॥
शुक्लभूकूश्माण्डः. (3) - क्षीरविदारी (स्त्री) , महाश्वेता (स्त्री) , ऋक्षगन्धिका (स्त्री)
जलपिप्पली. (4) - लाङ्गली (स्त्री) , शारदी (स्त्री) , तोयपिप्पली (स्त्री) , शकुलादनी (स्त्री)
लाङ्गली शारदी तोयपिप्पली शकुलादनी॥ २.४.३१८ ॥
जलपिप्पली. (4) - लाङ्गली (स्त्री) , शारदी (स्त्री) , तोयपिप्पली (स्त्री) , शकुलादनी (स्त्री)
कारवी. (5) - खराश्वा (स्त्री) , कारवी (स्त्री) , दीप्य (पुं) , मयूर (पुं) , लोचमस्तक (पुं)
खराश्वा कारवी दीप्यो मयूरो लोचमस्तकः॥ २.४.३१९ ॥
कारवी. (5) - खराश्वा (स्त्री) , कारवी (स्त्री) , दीप्य (पुं) , मयूर (पुं) , लोचमस्तक (पुं)
शारिवा. (5) - गोपी (स्त्री) , श्यामा (स्त्री) , शारिवा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , उत्पलशारिवा (स्त्री)
गोपी श्यामा शारिवा स्यादनन्तोत्पलशारिवा॥ २.४.३२० ॥
शारिवा. (5) - गोपी (स्त्री) , श्यामा (स्त्री) , शारिवा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , उत्पलशारिवा (स्त्री)
ऋद्ध्याख्यौषधिः. (4) - योग्य (नपुं) , ऋद्धि (स्त्री) , सिद्धि (स्त्री) , लक्ष्मी (स्त्री) ; वृद्ध्याख्यौषधिः. (2) - वृद्धि (स्त्री) , आह्वय (पुं)
योग्यमृद्धिः सिद्धिलक्ष्म्यौ वृद्धेरप्याह्वया इमे॥ २.४.३२१ ॥
ऋद्ध्याख्यौषधिः. (4) - योग्य (नपुं) , ऋद्धि (स्त्री) , सिद्धि (स्त्री) , लक्ष्मी (स्त्री) ; वृद्ध्याख्यौषधिः. (2) - वृद्धि (स्त्री) , आह्वय (पुं)
कदली. (5) - कदली (स्त्री) , वारणबुसा (स्त्री) , रम्भा (स्त्री) , मोचा (स्त्री) , अंशुमत्फला (स्त्री)
कदली वारणबुसा रम्भा मोचांशुमत्फला॥ २.४.३२२ ॥
कदली. (5) - कदली (स्त्री) , वारणबुसा (स्त्री) , रम्भा (स्त्री) , मोचा (स्त्री) , अंशुमत्फला (स्त्री)
कदली. (1) - काष्ठीला (स्त्री) ; काकमुद्गा. (3) - मुद्गपर्णी (स्त्री) , काकमुद्गा (स्त्री) , सहा (स्त्री)
काष्ठीला मुद्गपर्णी तु काकमुद्गा सहेत्यपि॥ २.४.३२३ ॥
कदली. (1) - काष्ठीला (स्त्री) ; काकमुद्गा. (3) - मुद्गपर्णी (स्त्री) , काकमुद्गा (स्त्री) , सहा (स्त्री)
भण्डाकी. (5) - वार्ताकी (स्त्री) , हिङ्गुली (स्त्री) , सिंही (स्त्री) , भण्डाकी (स्त्री) , दुष्प्रधर्षिणी (स्त्री)
वार्ताकी हिङ्गुली सिंही भण्टाकी दुष्प्रधर्षिणी॥ २.४.३२४ ॥
भण्डाकी. (5) - वार्ताकी (स्त्री) , हिङ्गुली (स्त्री) , सिंही (स्त्री) , भण्डाकी (स्त्री) , दुष्प्रधर्षिणी (स्त्री)
रास्ना. (5) - नाकुली (स्त्री) , सुरसा (स्त्री) , रास्ना (स्त्री) , सुगन्धा (स्त्री) , गन्धनाकुली (स्त्री)
नाकुली सुरसा रास्ना सुगन्धा गन्धनाकुली॥ २.४.३२५ ॥
रास्ना. (5) - नाकुली (स्त्री) , सुरसा (स्त्री) , रास्ना (स्त्री) , सुगन्धा (स्त्री) , गन्धनाकुली (स्त्री)
रास्ना. (4) - नकुलेष्टा (स्त्री) , भुजङ्गाक्षी (स्त्री) , छत्राकी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री)
नकुलेष्टा भुजंगाक्षी छत्राकी सुवहा च सा॥ २.४.३२६ ॥
रास्ना. (4) - नकुलेष्टा (स्त्री) , भुजङ्गाक्षी (स्त्री) , छत्राकी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री)
सालपर्णी. (5) - विदारिगन्धा (स्त्री) , अंशुमती (स्त्री) , सालपर्णी (स्त्री) , स्थिरा (स्त्री) , ध्रुवा (स्त्री)
विदारिगन्धांशुमती सालपर्णी स्थिरा ध्रुवा॥ २.४.३२७ ॥
सालपर्णी. (5) - विदारिगन्धा (स्त्री) , अंशुमती (स्त्री) , सालपर्णी (स्त्री) , स्थिरा (स्त्री) , ध्रुवा (स्त्री)
कार्पासी. (4) - तुण्डिकेरी (स्त्री) , समुद्रान्ता (स्त्री) , कार्पासी (स्त्री) , बदरा (स्त्री)
तुण्डिकेरी समुद्रान्ता कार्पासी बदरेति च॥ २.४.३२८ ॥
कार्पासी. (4) - तुण्डिकेरी (स्त्री) , समुद्रान्ता (स्त्री) , कार्पासी (स्त्री) , बदरा (स्त्री)
वनकार्पासी. (1) - भारद्वाजी (स्त्री) ; ऋषभाख्यौषधिः. (3) - शृङ्गी (स्त्री) , ऋषभ (पुं) , वृष (पुं)
भारद्वाजी तु सा वन्या शृङ्गी तु ऋषभो वृशः॥ २.४.३२९ ॥
वनकार्पासी. (1) - भारद्वाजी (स्त्री) ; ऋषभाख्यौषधिः. (3) - शृङ्गी (स्त्री) , ऋषभ (पुं) , वृष (पुं)
नागबला. (4) - गाङ्गेरुकी (स्त्री) , नागबला (स्त्री) , झषा (स्त्री) , ह्रस्वगवेधुका (स्त्री)
गाङ्गेरुकी नागबला झषा ह्रस्वगवेधुका॥ २.४.३३० ॥
नागबला. (4) - गाङ्गेरुकी (स्त्री) , नागबला (स्त्री) , झषा (स्त्री) , ह्रस्वगवेधुका (स्त्री)
घोषवल्ली. (2) - धामार्गव (पुं) , घोषक (पुं) ; पीतघोषवल्ली. (1) - महाजालिन् (स्त्री)
धामार्गवो घोशकः स्यान्महाजाली स पीतकः॥ २.४.३३१ ॥
घोषवल्ली. (2) - धामार्गव (पुं) , घोषक (पुं) ; पीतघोषवल्ली. (1) - महाजालिन् (स्त्री)
पटोलिका. (3) - ज्योत्स्नी (स्त्री) , पटोलिका (स्त्री) , जाली (स्त्री) ; भूमिजम्बुका. (2) - नादेयी (स्त्री) , भूमिजम्बुका (स्त्री)
ज्योत्स्नी पटोलिका जाली नादेयी भूमिजम्बुका॥ २.४.३३२ ॥
पटोलिका. (3) - ज्योत्स्नी (स्त्री) , पटोलिका (स्त्री) , जाली (स्त्री) ; भूमिजम्बुका. (2) - नादेयी (स्त्री) , भूमिजम्बुका (स्त्री)
लाङ्गलिकी. (2) - लाङ्गलिकी (स्त्री) , अग्निशिखा (स्त्री) ; काकजङ्घा. (2) - काकाङ्गी (स्त्री) , काकनासिका (स्त्री)
स्याल्लाङ्गलिक्यग्निशिखा काकाङ्गी काकनासिका॥ २.४.३३३ ॥
लाङ्गलिकी. (2) - लाङ्गलिकी (स्त्री) , अग्निशिखा (स्त्री) ; काकजङ्घा. (2) - काकाङ्गी (स्त्री) , काकनासिका (स्त्री)
हंसपदी. (2) - गोधापदी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) l मुसली. (2) - मुसली (स्त्री) , तालमूलिका (स्त्री)
गोधापदी तु सुवहा मुसली तालमूलिका॥ २.४.३३४ ॥
हंसपदी. (2) - गोधापदी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) l मुसली. (2) - मुसली (स्त्री) , तालमूलिका (स्त्री)
अजशृङ्गी. (2) - अजशृङ्गी (स्त्री) , विषाणी (स्त्री) ; गोजिह्वा. (2) - गोजिह्वा (स्त्री) , दार्विका (स्त्री)
अजशृङ्गी विषाणी स्याद्गोजिह्वादार्विके समे॥ २.४.३३५ ॥
अजशृङ्गी. (2) - अजशृङ्गी (स्त्री) , विषाणी (स्त्री) ; गोजिह्वा. (2) - गोजिह्वा (स्त्री) , दार्विका (स्त्री)
नागवल्ली. (3) - ताम्बूलवल्ली (स्त्री) , ताम्बूली (स्त्री) , नागवल्ली (स्त्री) ; हरेणुका. (1) - द्विजा (स्त्री)
ताम्बूलवल्ली तम्बूली नागवल्ल्यप्यथ द्विजा॥ २.४.३३६ ॥
नागवल्ली. (3) - ताम्बूलवल्ली (स्त्री) , ताम्बूली (स्त्री) , नागवल्ली (स्त्री) ; हरेणुका. (1) - द्विजा (स्त्री)
हरेणुका. (5) - हरेणू (स्त्री) , रेणुका (स्त्री) , कौन्ती (स्त्री) , कपिला (स्त्री) , भस्मगन्धिनी (स्त्री)
हरेणू रेणुका कौन्ती कपिला भस्मगन्धिनी॥ २.४.३३७ ॥
हरेणुका. (5) - हरेणू (स्त्री) , रेणुका (स्त्री) , कौन्ती (स्त्री) , कपिला (स्त्री) , भस्मगन्धिनी (स्त्री)
वालुकाख्यगन्धद्रव्यम्. (4) - एलावालुक (नपुं) , ऐलेय (नपुं) , सुगन्धि (पुं) , हरिवालुक (नपुं)
एलावालुकमैलेयं सुगन्धि हरिवालुकम्॥ २.४.३३८ ॥
वालुकाख्यगन्धद्रव्यम्. (4) - एलावालुक (नपुं) , ऐलेय (नपुं) , सुगन्धि (पुं) , हरिवालुक (नपुं)
वालुकाख्यगन्धद्रव्यम्. (1) - वालुक (नपुं) ; कुन्दुरुः. (4) - पालङ्क्या (स्त्री) , मुकुन्द (पुं) , कुन्द (पुं) , कुन्दुरु (पुं)
वालुकं चाथ पालङ्क्यां मुकुन्दः कुन्दकुन्दुरू॥ २.४.३३९ ॥
वालुकाख्यगन्धद्रव्यम्. (1) - वालुक (नपुं) ; कुन्दुरुः. (4) - पालङ्क्या (स्त्री) , मुकुन्द (पुं) , कुन्द (पुं) , कुन्दुरु (पुं)
ह्रीबेरम्. (5) - बाल (नपुं) , ह्रीबेर (नपुं) , बर्हिष्ठ (नपुं) , उदीच्य (नपुं) , केशाम्बुनाम (नपुं)
बालं ह्रीबेरबर्हिष्ठोदीच्यं केशाम्बुनाम च॥ २.४.३४० ॥
ह्रीबेरम्. (5) - बाल (नपुं) , ह्रीबेर (नपुं) , बर्हिष्ठ (नपुं) , उदीच्य (नपुं) , केशाम्बुनाम (नपुं)
शैलेयम्. (4) - कालानुसार्य (नपुं) , वृद्ध (नपुं) , अश्मपुष्प (नपुं) , शीतशिव (नपुं)
कालानुसार्यवृद्धाश्मपुष्पशीतशिवानि तु॥ २.४.३४१ ॥
शैलेयम्. (4) - कालानुसार्य (नपुं) , वृद्ध (नपुं) , अश्मपुष्प (नपुं) , शीतशिव (नपुं)
शैलेयम्. (1) - शैलेय (नपुं) ; मुराख्यसुगन्धिद्रव्यम्. (4) - तालपर्णी (स्त्री) , दैत्या (स्त्री) , गन्धकुटी (स्त्री) , मुरा (स्त्री)
शैलेयं तालपर्णी तु दैत्या गन्धकुटी मुरा॥ २.४.३४२ ॥
शैलेयम्. (1) - शैलेय (नपुं) ; मुराख्यसुगन्धिद्रव्यम्. (4) - तालपर्णी (स्त्री) , दैत्या (स्त्री) , गन्धकुटी (स्त्री) , मुरा (स्त्री)
मुराख्यसुगन्धिद्रव्यम्. (1) - गन्धिनी (स्त्री) ; सल्लकी. (4) - गजभक्ष्या (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , सुरभी (स्त्री) , रसा (स्त्री)
गन्धिनी गजभक्ष्या तु सुवहा सुरभी रसा॥ २.४.३४३ ॥
मुराख्यसुगन्धिद्रव्यम्. (1) - गन्धिनी (स्त्री) ; सल्लकी. (4) - गजभक्ष्या (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , सुरभी (स्त्री) , रसा (स्त्री)
सल्लकी. (4) - महेरणा (स्त्री) , कुन्दुरुकी (स्त्री) , सल्लकी (स्त्री) , ह्लादिनी (स्त्री)
महेरणा कुन्दुरुकी सल्लकी ह्लादिनीति च॥ २.४.३४४ ॥
सल्लकी. (4) - महेरणा (स्त्री) , कुन्दुरुकी (स्त्री) , सल्लकी (स्त्री) , ह्लादिनी (स्त्री)
धातकी. (4) - अग्निज्वाला (स्त्री) , सुभिक्षा (स्त्री) , धातकी (स्त्री) , धातुपुष्पिका (स्त्री)
अग्निज्वालासुभिक्षे तु धातकी धातुपुष्पिका॥ २.४.३४५ ॥
धातकी. (4) - अग्निज्वाला (स्त्री) , सुभिक्षा (स्त्री) , धातकी (स्त्री) , धातुपुष्पिका (स्त्री)
एला. (5) - पृथ्वीका (स्त्री) , चन्द्रबाला (स्त्री) , एला (स्त्री) , निष्कुटी (स्त्री) , बहुला (स्त्री)
पृथ्वीका चन्द्रवालैला निष्कुटिर्बहिलाथ सा॥ २.४.३४६ ॥
एला. (5) - पृथ्वीका (स्त्री) , चन्द्रबाला (स्त्री) , एला (स्त्री) , निष्कुटी (स्त्री) , बहुला (स्त्री)
सूक्ष्मेला. (5) - उपकुञ्चिका (स्त्री) , तुत्था (स्त्री) , कोरङ्गी (स्त्री) , त्रिपुटा (स्त्री) , त्रुटि (स्त्री)
सूक्ष्मोपकुञ्चिका तुत्था कोरङ्गी त्रिपुटा त्रुटिः॥ २.४.३४७ ॥
सूक्ष्मेला. (5) - उपकुञ्चिका (स्त्री) , तुत्था (स्त्री) , कोरङ्गी (स्त्री) , त्रिपुटा (स्त्री) , त्रुटि (स्त्री)
कुष्ठः. (6) - व्याधि (पुं) , कुष्ठ (नपुं) , पारिभाव्य (नपुं) , वाप्य (नपुं) , पाकल (नपुं) , उत्पल (नपुं)
व्याधिः कुष्टं पारिभाव्यं वाप्यं पाकलमुत्पलम्॥ २.४.३४८ ॥
कुष्ठः. (6) - व्याधि (पुं) , कुष्ठ (नपुं) , पारिभाव्य (नपुं) , वाप्य (नपुं) , पाकल (नपुं) , उत्पल (नपुं)
चोरवल्ली. (3) - शङ्खिनी (स्त्री) , चोरपुष्पी (स्त्री) , केशिनी (स्त्री) ; भूम्यामलकी. (1) - वितुन्नक (पुं)
शङ्खिनी चोरपुष्पी स्यात्केशिन्यथ वितुन्नकः॥ २.४.३४९ ॥
चोरवल्ली. (3) - शङ्खिनी (स्त्री) , चोरपुष्पी (स्त्री) , केशिनी (स्त्री) ; भूम्यामलकी. (1) - वितुन्नक (पुं)
भूम्यामलकी. (6) - झटा (स्त्री) , अमला (स्त्री) , अज्झटा (स्त्री) , ताली (स्त्री) , शिवा (स्त्री) , तामलकी (स्त्री)
झटामलाज्झटा ताली शिवा तामलकीति च॥ २.४.३५० ॥
भूम्यामलकी. (6) - झटा (स्त्री) , अमला (स्त्री) , अज्झटा (स्त्री) , ताली (स्त्री) , शिवा (स्त्री) , तामलकी (स्त्री)
पौण्डर्यम्. (2) - प्रपौण्डरीक (नपुं) , पौण्डर्य (नपुं) ; नन्दिवृक्षः. (2) - तुन्न (पुं) , कुबेरक (पुं)
प्रपौण्डरीकं पौण्डर्यमथ तुन्नः कुबेरकः॥ २.४.३५१ ॥
पौण्डर्यम्. (2) - प्रपौण्डरीक (नपुं) , पौण्डर्य (नपुं) ; नन्दिवृक्षः. (2) - तुन्न (पुं) , कुबेरक (पुं)
नन्दिवृक्षः. (4) - कुणि (पुं) , कच्छ (पुं) , कान्तलक (पुं) , नन्दिवृक्ष (पुं) ; चण्डा. (1) - राक्षसी (स्त्री)
कुणिः कच्छः कान्तलको नन्दिवृक्षोऽथ राक्षसी॥ २.४.३५२ ॥
नन्दिवृक्षः. (4) - कुणि (पुं) , कच्छ (पुं) , कान्तलक (पुं) , नन्दिवृक्ष (पुं) ; चण्डा. (1) - राक्षसी (स्त्री)
चण्डा. (5) - चण्डा (स्त्री) , धनहरी (स्त्री) , क्षेम (पुं) , दुष्पत्र (पुं) , गणहासक (पुं)
चण्डा धनहरी क्षेमदुष्पत्रगणहासकाः॥ २.४.३५३ ॥
चण्डा. (5) - चण्डा (स्त्री) , धनहरी (स्त्री) , क्षेम (पुं) , दुष्पत्र (पुं) , गणहासक (पुं)
व्याघ्रनखा. (4) - व्याडायुध (नपुं) , व्याघ्रनख (नपुं) , करज (नपुं) , चक्रकारक (नपुं)
व्याडायुधं व्याघ्रनखं करजं चक्रकारकम्॥ २.४.३५४ ॥
व्याघ्रनखा. (4) - व्याडायुध (नपुं) , व्याघ्रनख (नपुं) , करज (नपुं) , चक्रकारक (नपुं)
नलीनामकगन्धद्रव्यम्. (5) - शुषिरा (स्त्री) , विद्रुमलता (स्त्री) , कपोताङ्घ्रि (स्त्री) , नटी (स्त्री) , नली (स्त्री)
सुषिरा विद्रुमलता कपोताङ्घ्रिर्नटी नली॥ २.४.३५५ ॥
नलीनामकगन्धद्रव्यम्. (5) - शुषिरा (स्त्री) , विद्रुमलता (स्त्री) , कपोताङ्घ्रि (स्त्री) , नटी (स्त्री) , नली (स्त्री)
अञ्जनकेश्याख्यद्रव्यम्. (4) - धमनी (स्त्री) , अञ्जनकेशी (स्त्री) , हनु (स्त्री) , हट्टविलासिनी (स्त्री)
धमन्यञ्जनकेशी च हनुर्हट्टविलासिनी॥ २.४.३५६ ॥
अञ्जनकेश्याख्यद्रव्यम्. (4) - धमनी (स्त्री) , अञ्जनकेशी (स्त्री) , हनु (स्त्री) , हट्टविलासिनी (स्त्री)
नखाख्यगन्धद्रव्यम्. (5) - शुक्ति (स्त्री) , शङ्ख (पुं) , खुर (पुं) , कोलदल (नपुं) , नख (नपुं) ; तुवरिका. (1) - आढकी (स्त्री)
शुक्तिः शङ्खः खुरः कोलदलं नखमथाढकी॥ २.४.३५७ ॥
नखाख्यगन्धद्रव्यम्. (5) - शुक्ति (स्त्री) , शङ्ख (पुं) , खुर (पुं) , कोलदल (नपुं) , नख (नपुं) ; तुवरिका. (1) - आढकी (स्त्री)
तुवरिका. (5) - काक्षी (स्त्री) , मृत्स्ना (स्त्री) , तुवरिका (स्त्री) , मृत्तालक (नपुं) , सुराष्ट्रज (नपुं)
काक्षी मृत्स्ना तुवरिका मृत्तालकसुराष्ट्रजे॥ २.४.३५८ ॥
तुवरिका. (5) - काक्षी (स्त्री) , मृत्स्ना (स्त्री) , तुवरिका (स्त्री) , मृत्तालक (नपुं) , सुराष्ट्रज (नपुं)
कैवर्तीमुस्तकम्. (4) - कुटन्नट (नपुं) , दाशपुर (नपुं) , वानेय (नपुं) , परिपेलव (नपुं)
कुटन्नटं दाशपुरं वानेयं परिपेलवम्॥ २.४.३५९ ॥
कैवर्तीमुस्तकम्. (4) - कुटन्नट (नपुं) , दाशपुर (नपुं) , वानेय (नपुं) , परिपेलव (नपुं)
कैवर्तीमुस्तकम्. (4) - प्लव (नपुं) , गोपुर (नपुं) , गोनर्द (नपुं) , कैवर्तीमुस्तक (नपुं)
प्लवगोपुरगोनर्दकैवर्तीमुस्तकानि च॥ २.४.३६० ॥
कैवर्तीमुस्तकम्. (4) - प्लव (नपुं) , गोपुर (नपुं) , गोनर्द (नपुं) , कैवर्तीमुस्तक (नपुं)
ग्रन्थिपर्णम्. (5) - ग्रन्थिपर्ण (नपुं) , शुक (नपुं) , बर्हपुष्प (नपुं) , स्थौणेय (नपुं) , कुक्कुर (नपुं)
ग्रन्थिपर्णं शुकं बर्हं पुष्पं स्थौणेयकुक्कुरे॥ २.४.३६१ ॥
ग्रन्थिपर्णम्. (5) - ग्रन्थिपर्ण (नपुं) , शुक (नपुं) , बर्हपुष्प (नपुं) , स्थौणेय (नपुं) , कुक्कुर (नपुं)
स्पृक्का. (6) - मरुन्माला (स्त्री) , पिशुना (स्त्री) , स्पृक्का (स्त्री) , देवी (स्त्री) , लता (स्त्री) , लघु (पुं)
मरुन्माला तु पिशुना स्पृक्का देवी लता लघुः॥ २.४.३६२ ॥
स्पृक्का. (6) - मरुन्माला (स्त्री) , पिशुना (स्त्री) , स्पृक्का (स्त्री) , देवी (स्त्री) , लता (स्त्री) , लघु (पुं)
स्पृक्का. (4) - समुद्रान्ता (स्त्री) , वधू (स्त्री) , कोटिवर्षा (स्त्री) , लङ्कोपिक (स्त्री)
समुद्रान्ता वधूः कोटिवर्षा लङ्कोपिकेत्यपि॥ २.४.३६३ ॥
स्पृक्का. (4) - समुद्रान्ता (स्त्री) , वधू (स्त्री) , कोटिवर्षा (स्त्री) , लङ्कोपिक (स्त्री)
जटामांसी. (6) - तपस्विनी (स्त्री) , जटा (स्त्री) , मांसी (स्त्री) , जटिला (स्त्री) , लोमश (पुं) , मिसी (स्त्री)
तपस्विनी जटामांसी जटिला लोमशामिषी॥ २.४.३६४ ॥
जटामांसी. (6) - तपस्विनी (स्त्री) , जटा (स्त्री) , मांसी (स्त्री) , जटिला (स्त्री) , लोमश (पुं) , मिसी (स्त्री)
त्वक्पत्रम्. (6) - त्वक्पत्र (नपुं) , उत्कट (नपुं) , भृङ्ग (नपुं) , त्वच (नपुं) , चोच (नपुं) , वराङ्गक (नपुं)
त्वक्पत्रमुत्कटं भृङ्गं त्वचं चोचं वराङ्गकम्॥ २.४.३६५ ॥
त्वक्पत्रम्. (6) - त्वक्पत्र (नपुं) , उत्कट (नपुं) , भृङ्ग (नपुं) , त्वच (नपुं) , चोच (नपुं) , वराङ्गक (नपुं)
कर्चूरः. (4) - कर्चूरक (पुं) , द्राविडक (पुं) , काल्पक (पुं) , वेधमुख्यक (पुं)
कर्चूरको द्राविडकः काल्पको वेधमुख्यकः॥ २.४.३६६ ॥
कर्चूरः. (4) - कर्चूरक (पुं) , द्राविडक (पुं) , काल्पक (पुं) , वेधमुख्यक (पुं)
जातिमात्रविवक्षा. (1) - ओषधी (स्त्री)
ओषध्यो जातिमात्रे स्युरजातौ सर्वमौषधम्॥ २.४.३६७ ॥
जातिमात्रविवक्षा. (1) - ओषधी (स्त्री)
अल्पमारिषः. (2) - तण्डुलीय (पुं) , अल्पमारिष (पुं)
शाकाख्यं पत्रपुष्पादि तण्डुलीयोऽल्पमारिषः॥ २.४.३६८ ॥
अल्पमारिषः. (2) - तण्डुलीय (पुं) , अल्पमारिष (पुं)
अग्निशिखा. (5) - विशल्या (स्त्री) , अग्निशिखा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , फलिनी (स्त्री) , शक्रपुष्पिका (स्त्री)
विशल्याग्निशिखानन्ता फलिनी शक्रपुष्पिका॥ २.४.३६९ ॥
अग्निशिखा. (5) - विशल्या (स्त्री) , अग्निशिखा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री) , फलिनी (स्त्री) , शक्रपुष्पिका (स्त्री)
वृद्धदारकः. (4) - ऋक्षगन्धा (स्त्री) , छगलान्त्री (स्त्री) , आवेगी (स्त्री) , वृद्धदारक (पुं)
स्याद्दक्षगन्धा छगलान्त्रयावेगी वृद्धदारकः॥ २.४.३७० ॥
वृद्धदारकः. (4) - ऋक्षगन्धा (स्त्री) , छगलान्त्री (स्त्री) , आवेगी (स्त्री) , वृद्धदारक (पुं)
ब्रम्ही. (4) - ब्रम्ही (स्त्री) , मत्स्याक्षी (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) , सोमवल्लरी (स्त्री)
जुङ्गो ब्रह्मी तु मत्स्याक्षी वयःस्था सोमवल्लरी॥ २.४.३७१ ॥
ब्रम्ही. (4) - ब्रम्ही (स्त्री) , मत्स्याक्षी (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) , सोमवल्लरी (स्त्री)
स्वर्णक्षीरी. (4) - पटुपर्णी (स्त्री) , हैमवती (स्त्री) , स्वर्णक्षीरी (स्त्री) , हिमावती (स्त्री)
पटुपर्णी हैमवती स्वर्णक्षीरी हिमावती॥ २.४.३७२ ॥
स्वर्णक्षीरी. (4) - पटुपर्णी (स्त्री) , हैमवती (स्त्री) , स्वर्णक्षीरी (स्त्री) , हिमावती (स्त्री)
माषपर्णी. (4) - हयपुच्छी (स्त्री) , काम्बोजी (स्त्री) , माषपर्णी (स्त्री) , महासहा (स्त्री)
हयपुच्छी तु काम्बोजी माषपर्णी महासहा॥ २.४.३७३ ॥
माषपर्णी. (4) - हयपुच्छी (स्त्री) , काम्बोजी (स्त्री) , माषपर्णी (स्त्री) , महासहा (स्त्री)
तुण्डिकेरी. (4) - तुण्डिकेरी (स्त्री) , रक्तफला (स्त्री) , बिम्बिका (स्त्री) , पीलुपर्णी (स्त्री)
तुण्डिकेरी रक्तफला बिम्बिका पीलुपर्ण्यपि॥ २.४.३७४ ॥
तुण्डिकेरी. (4) - तुण्डिकेरी (स्त्री) , रक्तफला (स्त्री) , बिम्बिका (स्त्री) , पीलुपर्णी (स्त्री)
खरपुष्पा. (5) - बर्बरा (स्त्री) , कबरी (स्त्री) , तुङ्गी (स्त्री) , खरपुष्पा (स्त्री) , अजगन्धिका (स्त्री)
बर्बरा कबरी तुङ्गी खरपुष्पाजगन्धिका॥ २.४.३७५ ॥
खरपुष्पा. (5) - बर्बरा (स्त्री) , कबरी (स्त्री) , तुङ्गी (स्त्री) , खरपुष्पा (स्त्री) , अजगन्धिका (स्त्री)
एलापर्णी. (4) - एलापर्णी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , रास्ना (स्त्री) , युक्तरसा (स्त्री)
एलापर्णी तु सुवहा रास्ना युक्तरसा च सा॥ २.४.३७६ ॥
एलापर्णी. (4) - एलापर्णी (स्त्री) , सुवहा (स्त्री) , रास्ना (स्त्री) , युक्तरसा (स्त्री)
अम्ललोणिका. (5) - चाङ्गेरी (स्त्री) , चुक्रिका (स्त्री) , दन्तशठा (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) , अम्ललोणिका (स्त्री)
चाङ्गेरी चुक्रिका दन्तशटाम्बष्ठाम्ललोणिका॥ २.४.३७७ ॥
अम्ललोणिका. (5) - चाङ्गेरी (स्त्री) , चुक्रिका (स्त्री) , दन्तशठा (स्त्री) , अम्बष्ठा (स्त्री) , अम्ललोणिका (स्त्री)
अम्लवेतसः. (4) - सहस्रवेधिन् (पुं) , चुक्र (पुं) , अम्लवेतस (पुं) , शतवेधिन् (पुं)
सहस्रवेधी चुक्रोऽम्लवेतसः शतवेध्यपि॥ २.४.३७८ ॥
अम्लवेतसः. (4) - सहस्रवेधिन् (पुं) , चुक्र (पुं) , अम्लवेतस (पुं) , शतवेधिन् (पुं)
खदिरा. (4) - नमस्कारी (स्त्री) , गण्डकारी (स्त्री) , समङ्गा (स्त्री) , खदिरा (स्त्री)
नमस्कारी गण्डकारी समङ्गा खदिरेत्यपि॥ २.४.३७९ ॥
खदिरा. (4) - नमस्कारी (स्त्री) , गण्डकारी (स्त्री) , समङ्गा (स्त्री) , खदिरा (स्त्री)
जीवन्तिका. (5) - जीवन्ती (स्त्री) , जीवनी (स्त्री) , जीवा (स्त्री) , जीवनीया (स्त्री) , मधुस्रवा (स्त्री)
जीवन्ती जीवनी जीवा जीवनीया मधुस्रवा॥ २.४.३८० ॥
जीवन्तिका. (5) - जीवन्ती (स्त्री) , जीवनी (स्त्री) , जीवा (स्त्री) , जीवनीया (स्त्री) , मधुस्रवा (स्त्री)
जीवकः. (5) - कूर्चशीर्ष (पुं) , मधुरक (पुं) , शृङ्ग (पुं) , ह्रस्वाङ्ग (पुं) , जीवक (पुं)
कूर्चशीर्षो मधुरकः शृङ्गह्रस्वाङ्गजीवकाः॥ २.४.३८१ ॥
जीवकः. (5) - कूर्चशीर्ष (पुं) , मधुरक (पुं) , शृङ्ग (पुं) , ह्रस्वाङ्ग (पुं) , जीवक (पुं)
चिरायता. (3) - किराततिक्त (पुं) , भूनिम्ब (पुं) , अनार्यतिक्त (पुं) ; सप्तला. (1) - सप्तला (स्त्री)
किराततिक्तो भूनिम्बोऽनार्यतिक्तोऽथ सप्तला॥ २.४.३८२ ॥
चिरायता. (3) - किराततिक्त (पुं) , भूनिम्ब (पुं) , अनार्यतिक्त (पुं) ; सप्तला. (1) - सप्तला (स्त्री)
सप्तला. (4) - विमला (स्त्री) , सातला (स्त्री) , भूरिफेना (स्त्री) , चर्मकषा (स्त्री)
विमला सातला भूरिफेना चर्मकषेत्यपि॥ २.४.३८३ ॥
सप्तला. (4) - विमला (स्त्री) , सातला (स्त्री) , भूरिफेना (स्त्री) , चर्मकषा (स्त्री)
वायसोली. (3) - वायसोली (स्त्री) , स्वादुरसा (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) ; वज्रदन्ती. (1) - मकूलक (पुं)
वायसोली स्वादुरसा वयःस्थाथ मकूलकः॥ २.४.३८४ ॥
वायसोली. (3) - वायसोली (स्त्री) , स्वादुरसा (स्त्री) , वयःस्था (स्त्री) ; वज्रदन्ती. (1) - मकूलक (पुं)
वज्रदन्ती. (4) - निकुम्भ (पुं) , दन्तिका (स्त्री) , प्रत्यक्श्रेणी (स्त्री) , उदुम्बरपर्णी (स्त्री)
निकुम्भो दन्तिका प्रत्यक्ष्रेण्युदुम्बरपर्ण्यपि॥ २.४.३८५ ॥
वज्रदन्ती. (4) - निकुम्भ (पुं) , दन्तिका (स्त्री) , प्रत्यक्श्रेणी (स्त्री) , उदुम्बरपर्णी (स्त्री)
अजमोदा. (4) - अजमोदा (स्त्री) , उग्रगन्धा (स्त्री) , ब्रह्मदर्भा (स्त्री) , यवानिका (स्त्री)
अजमोदा तूग्रगन्धा ब्रह्मदर्भा यवानिका॥ २.४.३८६ ॥
अजमोदा. (4) - अजमोदा (स्त्री) , उग्रगन्धा (स्त्री) , ब्रह्मदर्भा (स्त्री) , यवानिका (स्त्री)
पुष्करमूलम्. (4) - पुष्कर (नपुं) , काश्मीर (नपुं) , पद्मपत्र (नपुं) , पौष्कर (नपुं)
मूले पुष्करकाश्मीरपद्मपत्राणि पौष्करे॥ २.४.३८७ ॥
पुष्करमूलम्. (4) - पुष्कर (नपुं) , काश्मीर (नपुं) , पद्मपत्र (नपुं) , पौष्कर (नपुं)
पद्माकः. (5) - अव्यथा (स्त्री) , अतिचरा (स्त्री) , पद्मा (स्त्री) , चारटी (स्त्री) , पद्मचारिणी (स्त्री)
अव्यथातिचरा पद्मा चारटी पद्मचारिणी॥ २.४.३८८ ॥
पद्माकः. (5) - अव्यथा (स्त्री) , अतिचरा (स्त्री) , पद्मा (स्त्री) , चारटी (स्त्री) , पद्मचारिणी (स्त्री)
रोचनी. (5) - काम्पिल्य (पुं) , कर्कश (पुं) , चन्द्र (पुं) , रक्ताङ्ग (पुं) , रोचनी (स्त्री)
काम्पिल्यः कर्कशश्चन्द्रो रक्ताङ्गो रोचनीत्यपि॥ २.४.३८९ ॥
रोचनी. (5) - काम्पिल्य (पुं) , कर्कश (पुं) , चन्द्र (पुं) , रक्ताङ्ग (पुं) , रोचनी (स्त्री)
पुन्नाटः. (4) - प्रपुन्नाट (पुं) , एडगज (पुं) , दद्रुघ्न (पुं) , चकमर्दक (पुं)
प्रपुन्नाडस्त्वेडगजो दद्रुघ्नश्चकमर्दकः॥ २.४.३९० ॥
पुन्नाटः. (4) - प्रपुन्नाट (पुं) , एडगज (पुं) , दद्रुघ्न (पुं) , चकमर्दक (पुं)
पुन्नाटः. (2) - पद्माट (पुं) , उरणाख्य (पुं) ; पलाण्डुः. (2) - पलाण्डु (पुं) , सुकन्दक (पुं)
पद्माट उरणाख्यश्च पलाण्डुस्तु सुकन्दकः॥ २.४.३९१ ॥
पुन्नाटः. (2) - पद्माट (पुं) , उरणाख्य (पुं) ; पलाण्डुः. (2) - पलाण्डु (पुं) , सुकन्दक (पुं)
हरितपलाण्डुः. (2) - लतार्क (पुं) , दुद्रुम (पुं) ; लशुनम्. (1) - महौषध (नपुं)
लतार्कदुद्रुमौ तत्र हरितेऽथ महौषधम्॥ २.४.३९२ ॥
हरितपलाण्डुः. (2) - लतार्क (पुं) , दुद्रुम (पुं) ; लशुनम्. (1) - महौषध (नपुं)
लशुनम्. (5) - लशुन (नपुं) , गृञ्जन (पुं) , अरिष्ट (पुं) , महाकन्द (पुं) , रसोनक (पुं)
लशुनं गृञ्जनारिष्टमहाकन्दरसोनकाः॥ २.४.३९३ ॥
लशुनम्. (5) - लशुन (नपुं) , गृञ्जन (पुं) , अरिष्ट (पुं) , महाकन्द (पुं) , रसोनक (पुं)
पुनर्नवा. (2) - पुनर्नवा (स्त्री) , शोथघ्नी (स्त्री) ; वितुन्नम्. (2) - वितुन्न (नपुं) , सुनिषण्णक (नपुं)
पुनर्नवा तु शोथघ्नी वितुन्नं सुनिषण्णकम्॥ २.४.३९४ ॥
पुनर्नवा. (2) - पुनर्नवा (स्त्री) , शोथघ्नी (स्त्री) ; वितुन्नम्. (2) - वितुन्न (नपुं) , सुनिषण्णक (नपुं)
शणपर्णी. (4) - वातक (पुं) , शीतल (पुं) , अपराजिता (स्त्री) , शणपर्णी (स्त्री)
स्याद्वातकः शीतलोऽपराजिता शणपर्ण्यपि॥ २.४.३९५ ॥
शणपर्णी. (4) - वातक (पुं) , शीतल (पुं) , अपराजिता (स्त्री) , शणपर्णी (स्त्री)
ज्योतिष्मती. (5) - पारावताङ्घ्रि (स्त्री) , कटभी (स्त्री) , पण्या (स्त्री) , ज्योतिष्मती (स्त्री) , लता (स्त्री)
पारावताङ्घ्रिः कटभी पण्या ज्योतिष्मती लता॥ २.४.३९६ ॥
ज्योतिष्मती. (5) - पारावताङ्घ्रि (स्त्री) , कटभी (स्त्री) , पण्या (स्त्री) , ज्योतिष्मती (स्त्री) , लता (स्त्री)
त्रायमाणा. (4) - वार्षिक (नपुं) , त्रायमाणा (स्त्री) , त्रायन्ती (स्त्री) , बलभद्रिका (स्त्री)
वार्षिकं त्रायमाणा स्यात्त्रायन्ती बलभद्रिका॥ २.४.३९७ ॥
त्रायमाणा. (4) - वार्षिक (नपुं) , त्रायमाणा (स्त्री) , त्रायन्ती (स्त्री) , बलभद्रिका (स्त्री)
वाराहीकन्दम्. (4) - विष्वक्सेनप्रिया (स्त्री) , गृष्टि (स्त्री) , वाराही (स्त्री) , बदरा (स्त्री)
विष्वक्सेनप्रिया गृष्टिर्वाराही बदरेत्यपि॥ २.४.३९८ ॥
वाराहीकन्दम्. (4) - विष्वक्सेनप्रिया (स्त्री) , गृष्टि (स्त्री) , वाराही (स्त्री) , बदरा (स्त्री)
भृङ्गराजः. (2) - मार्कव (पुं) , भृङ्गराज (पुं) ; काकमाची. (2) - काकमाची (स्त्री) , वायसी (स्त्री)
मार्कवो भृङ्गराजः स्यात्काकमाची तु वायसी॥ २.४.३९९ ॥
भृङ्गराजः. (2) - मार्कव (पुं) , भृङ्गराज (पुं) ; काकमाची. (2) - काकमाची (स्त्री) , वायसी (स्त्री)
शतपुष्पा. (5) - शतपुष्पा (स्त्री) , सितच्छत्रा (स्त्री) , अतिच्छत्रा (स्त्री) , मधुरा (स्त्री) , मिसि (स्त्री)
शतपुष्पा सितच्छत्रातिच्छत्रा मधुरा मिसिः॥ २.४.४०० ॥
शतपुष्पा. (5) - शतपुष्पा (स्त्री) , सितच्छत्रा (स्त्री) , अतिच्छत्रा (स्त्री) , मधुरा (स्त्री) , मिसि (स्त्री)
शतपुष्पा. (2) - अवाक्पुष्पी (स्त्री) , कारवी (स्त्री) ; प्रसारिणी. (2) - सरणा (स्त्री) , प्रसारिणी (स्त्री)
अवाक्पुष्पी कारवी च सरणा तु प्रसारिणी॥ २.४.४०१ ॥
शतपुष्पा. (2) - अवाक्पुष्पी (स्त्री) , कारवी (स्त्री) ; प्रसारिणी. (2) - सरणा (स्त्री) , प्रसारिणी (स्त्री)
प्रसारिणी. (3) - कटम्भरा (स्त्री) , राजबला (स्त्री) , भद्रबला (स्त्री)
तस्यां कटंभरा राजबला भद्रबलेत्यपि॥ २.४.४०२ ॥
प्रसारिणी. (3) - कटम्भरा (स्त्री) , राजबला (स्त्री) , भद्रबला (स्त्री)
चक्रवर्तिनी. (5) - जनी (स्त्री) , जतूका (स्त्री) , रजनी (स्त्री) , जतुकृत् (स्त्री) , चक्रवर्तिनी (स्त्री)
जनी जतूका रजनी जतुकृच्चक्रवर्तिनी॥ २.४.४०३ ॥
चक्रवर्तिनी. (5) - जनी (स्त्री) , जतूका (स्त्री) , रजनी (स्त्री) , जतुकृत् (स्त्री) , चक्रवर्तिनी (स्त्री)
चक्रवर्तिनी. (1) - संस्पर्शा (स्त्री) ; कचूरः. (3) - शटी (स्त्री) , गन्धमूली (स्त्री) , षड्ग्रन्थिका (स्त्री)
संस्पर्शाथ शटी गन्धमूली षड्ग्रन्थिकेत्यपि॥ २.४.४०४ ॥
चक्रवर्तिनी. (1) - संस्पर्शा (स्त्री) ; कचूरः. (3) - शटी (स्त्री) , गन्धमूली (स्त्री) , षड्ग्रन्थिका (स्त्री)
कचूरः. (2) - कर्चूर (पुं) , पलाश (पुं) ; कारवेल्लः. (2) - कारवेल्ल (पुं) , कठिल्लक (पुं)
कर्चूरोऽपि पलाशोऽथ कारवेल्लः कठिल्लकः॥ २.४.४०५ ॥
कचूरः. (2) - कर्चूर (पुं) , पलाश (पुं) ; कारवेल्लः. (2) - कारवेल्ल (पुं) , कठिल्लक (पुं)
कारवेल्लः. (1) - सुषवी (स्त्री) ; पटोलः. (4) - कुलक (पुं) , पटोल (पुं) , तिक्तक (पुं) , पटु (पुं)
सुषवी चाथ कुलकं पतोलस्तिक्तकः पटुः॥ २.४.४०६ ॥
कारवेल्लः. (1) - सुषवी (स्त्री) ; पटोलः. (4) - कुलक (पुं) , पटोल (पुं) , तिक्तक (पुं) , पटु (पुं)
कूष्माण्डकः. (2) - कूष्माण्डक (पुं) , कर्कारु (पुं) ; कर्कटी. (2) - ईर्वारु (स्त्री-पुं) , कर्कटी (स्त्री)
कूष्माण्डकस्तु कर्कारुरुर्वारुः कर्कटी स्त्रियौ॥ २.४.४०७ ॥
कूष्माण्डकः. (2) - कूष्माण्डक (पुं) , कर्कारु (पुं) ; कर्कटी. (2) - ईर्वारु (स्त्री-पुं) , कर्कटी (स्त्री)
इक्ष्वाकुः. (2) - इक्ष्वाकु (स्त्री) , कटुतुम्बी (स्त्री) ; तुम्बी. (2) - तुम्बी (स्त्री) , अलाबू (स्त्री)
इक्ष्वाकुः कटुतुम्बी स्यात्तुम्ब्यलाबूरुभे समे॥ २.४.४०८ ॥
इक्ष्वाकुः. (2) - इक्ष्वाकु (स्त्री) , कटुतुम्बी (स्त्री) ; तुम्बी. (2) - तुम्बी (स्त्री) , अलाबू (स्त्री)
वनकर्कटी. (3) - चित्रा (स्त्री) , गवाक्षी (स्त्री) , गोडुम्बा (स्त्री) ; इन्द्रवारुणी. (2) - विशाला (स्त्री) , इन्द्रवारुणी (स्त्री)
चित्रा गवाक्षी गोडुम्बा विशाला त्विन्द्रवारुणी॥ २.४.४०९ ॥
वनकर्कटी. (3) - चित्रा (स्त्री) , गवाक्षी (स्त्री) , गोडुम्बा (स्त्री) ; इन्द्रवारुणी. (2) - विशाला (स्त्री) , इन्द्रवारुणी (स्त्री)
सूरणः. (3) - अर्शोघ्न (पुं) , सूरण (पुं) , कन्द (पुं) ; समष्ठिला. (2) - गण्डीर (पुं) , समष्ठिला (स्त्री)
अर्शोघ्नः सूरणः कन्दो गण्डीरस्तु समष्ठिला॥ २.४.४१० ॥
सूरणः. (3) - अर्शोघ्न (पुं) , सूरण (पुं) , कन्द (पुं) ; समष्ठिला. (2) - गण्डीर (पुं) , समष्ठिला (स्त्री)
शाखाभेदः. (4) - कलम्बी (स्त्री) , उपोदका (स्त्री) , मूलक (पुं-नपुं) , हिलमोचिका (स्त्री)
कलम्ब्युपोदिका स्त्री तु मूलकं हिलमोचिका॥ २.४.४११ ॥
शाखाभेदः. (4) - कलम्बी (स्त्री) , उपोदका (स्त्री) , मूलक (पुं-नपुं) , हिलमोचिका (स्त्री)
शाखाभेदः. (1) - वास्तुक (नपुं) ; दूर्वा. (2) - दूर्वा (स्त्री) , शतपर्विका (स्त्री)
वास्तुकं शाकभेदाः स्युर्दूर्वा तु शतपर्विका॥ २.४.४१२ ॥
शाखाभेदः. (1) - वास्तुक (नपुं) ; दूर्वा. (2) - दूर्वा (स्त्री) , शतपर्विका (स्त्री)
दूर्वा. (4) - सहस्रवीर्या (स्त्री) , भार्गवी (स्त्री) , रुहा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री)
सहस्रवीर्याभार्गव्यौ रुहानन्ताथ सा सिता॥ २.४.४१३ ॥
दूर्वा. (4) - सहस्रवीर्या (स्त्री) , भार्गवी (स्त्री) , रुहा (स्त्री) , अनन्ता (स्त्री)
शुक्लदूर्वा. (4) - गोलोमी (स्त्री) , शतवीर्या (स्त्री) , गण्डाली (स्त्री) , शकुलाक्षक (पुं)
गोलोमी शतवीर्या च गण्डाली शकुलाक्षका॥ २.४.४१४ ॥
शुक्लदूर्वा. (4) - गोलोमी (स्त्री) , शतवीर्या (स्त्री) , गण्डाली (स्त्री) , शकुलाक्षक (पुं)
मुस्ता. (4) - कुरुविन्द (पुं) , मेघनामन् (पुं) , मुस्ता (स्त्री) , मुस्तक (पुं-नपुं)
कुरुविन्दो मेघनामा मुस्ता मुस्तकमस्त्रियाम्॥ २.४.४१५ ॥
मुस्ता. (4) - कुरुविन्द (पुं) , मेघनामन् (पुं) , मुस्ता (स्त्री) , मुस्तक (पुं-नपुं)
नागमुस्ता. (2) - भद्रमुस्तक (पुं) , गुन्द्रा (स्त्री) ; मुस्ताभेदः. (3) - चूडाला (स्त्री) , चक्रला (स्त्री) , उच्चटा (स्त्री)
स्याद्भद्रमुस्तको गुन्द्रा चूडाला चक्रलोच्चटा॥ २.४.४१६ ॥
नागमुस्ता. (2) - भद्रमुस्तक (पुं) , गुन्द्रा (स्त्री) ; मुस्ताभेदः. (3) - चूडाला (स्त्री) , चक्रला (स्त्री) , उच्चटा (स्त्री)
वेणुः. (5) - वंश (पुं) , त्वक्सार (पुं) , कर्मार (पुं) , त्वाचिसार (पुं) , तृणध्वज (पुं)
वंशे त्वक्सारकर्मारत्वाचिसारतृणध्वजाः॥ २.४.४१७ ॥
वेणुः. (5) - वंश (पुं) , त्वक्सार (पुं) , कर्मार (पुं) , त्वाचिसार (पुं) , तृणध्वज (पुं)
वेणुः. (5) - शतपर्वन् (पुं) , यवफल (पुं) , वेणु (पुं) , मस्कर (पुं) , तेजन (पुं)
शतपर्वा यवफलो वेणुमस्करतेजनाः ॥ २.४.४१८ ॥
वेणुः. (5) - शतपर्वन् (पुं) , यवफल (पुं) , वेणु (पुं) , मस्कर (पुं) , तेजन (पुं)
वाताहतवेणुः. (1) - कीचक (पुं)
वेणवः कीचकास्ते स्युर्ये स्वनन्त्यनिलोद्धताः॥ २.४.४१९ ॥
वाताहतवेणुः. (1) - कीचक (पुं)
वम्शादिग्रन्थिः. (3) - ग्रन्थि (पुं) , पर्वन् (नपुं) , परुस् (नपुं) ; गुन्द्रः. (3) - गुन्द्र (पुं) , तेजनक (पुं) , शर (पुं)
ग्रन्थिर्ना पर्वपरुशी गुन्द्रस्तेजनकः शरः॥ २.४.४२० ॥
वम्शादिग्रन्थिः. (3) - ग्रन्थि (पुं) , पर्वन् (नपुं) , परुस् (नपुं) ; गुन्द्रः. (3) - गुन्द्र (पुं) , तेजनक (पुं) , शर (पुं)
नडः. (3) - नड (पुं) , धमन (पुं) , पोटगल (पुं) ; काशम्. (1) - काश (पुं-नपुं)
नडस्तु धमनः पोटकलोऽथो काशमस्त्रियाम्॥ २.४.४२१ ॥
नडः. (3) - नड (पुं) , धमन (पुं) , पोटगल (पुं) ; काशम्. (1) - काश (पुं-नपुं)
काशम्. (2) - इक्षुगन्धा (स्त्री) , पोटगल (पुं) ; बल्वजाः. (1) - बल्वज (पुं-बहु)
इक्षुगन्धा पोटगलः पुंसि भूम्नि तु बल्वजाः॥ २.४.४२२ ॥
काशम्. (2) - इक्षुगन्धा (स्त्री) , पोटगल (पुं) ; बल्वजाः. (1) - बल्वज (पुं-बहु)
इक्षुः. (2) - रसाल (पुं) , इक्षु (पुं) ; इक्षुभेदः. (2) - पुण्ड्र (पुं) , कान्तारक (पुं)
रसाल इक्षुस्तद्भेदाः पुण्ड्रकान्तारकादयः॥ २.४.४२३ ॥
इक्षुः. (2) - रसाल (पुं) , इक्षु (पुं) ; इक्षुभेदः. (2) - पुण्ड्र (पुं) , कान्तारक (पुं)
वीरणम्. (2) - वीरण (नपुं) , वीरतर (नपुं) ; वीरणमूलम्. (1) - उशीर (पुं-नपुं)
स्याद्वीरणं वीरतरं मूलेऽस्योशीरमस्त्रियाम्॥ २.४.४२४ ॥
वीरणम्. (2) - वीरण (नपुं) , वीरतर (नपुं) ; वीरणमूलम्. (1) - उशीर (पुं-नपुं)
वीरणमूलम्. (5) - अभय (नपुं) , नलद (नपुं) , सेव्य (नपुं) , अमृणाल (नपुं) , जलाशय (नपुं)
अभयं नलदं सेव्यममृणालं जलाशयम्॥ २.४.४२५ ॥
वीरणमूलम्. (5) - अभय (नपुं) , नलद (नपुं) , सेव्य (नपुं) , अमृणाल (नपुं) , जलाशय (नपुं)
वीरणमूलम्. (4) - लामज्जक (नपुं) , लघुलय (नपुं) , अवदाह (नपुं) , इष्टकापथ (नपुं)
लामज्जकं लघुलयमवदाहेष्टकापथे॥ २.४.४२६ ॥
वीरणमूलम्. (4) - लामज्जक (नपुं) , लघुलय (नपुं) , अवदाह (नपुं) , इष्टकापथ (नपुं)
तृणम्. (1) - तृण (नपुं)
नडादयस्तृणं गर्मुच्छ्यामाकप्रमुखा अपि॥ २.४.४२७ ॥
तृणम्. (1) - तृण (नपुं)
दर्भः. (4) - कुश (पुं-नपुं) , कुथ (पुं) , दर्भ (पुं) , पवित्र (नपुं) ; रोहिषाख्यतृणविशेषः. (1) - कत्तृण (नपुं)
अस्त्री कुशं कुथो दर्भः पवित्रमथ कत्तृणम् ॥ २.४.४२८ ॥
दर्भः. (4) - कुश (पुं-नपुं) , कुथ (पुं) , दर्भ (पुं) , पवित्र (नपुं) ; रोहिषाख्यतृणविशेषः. (1) - कत्तृण (नपुं)
तृणविशेषः. (5) - पौर (नपुं) , सौगन्धिक (नपुं) , ध्याम (नपुं) , देवजग्धक (नपुं) , रौहिष (नपुं)
पौरसौगन्धिकध्यामदेवेजग्धकरौहिषम्॥ २.४.४२९ ॥
तृणविशेषः. (5) - पौर (नपुं) , सौगन्धिक (नपुं) , ध्याम (नपुं) , देवजग्धक (नपुं) , रौहिष (नपुं)
जलजतृणविशेषः. (3) - छत्रा (स्त्री) , अतिच्छत्र (पुं) , पालघ्न (पुं) ; तृणविशेषः. (2) - मालातृणक (नपुं) , भूस्तृण (नपुं)
छत्रातिच्छत्रपालघ्नौ मालातृणकभूस्तृणे॥ २.४.४३० ॥
जलजतृणविशेषः. (3) - छत्रा (स्त्री) , अतिच्छत्र (पुं) , पालघ्न (पुं) ; तृणविशेषः. (2) - मालातृणक (नपुं) , भूस्तृण (नपुं)
नूतनतृणम्. (2) - शष्प (नपुं) , बालतृण (नपुं) ; गवादिभक्ष्यतृणम्. (2) - घास (पुं) , यवस (नपुं) ; तृणम्. (2) - तृण (नपुं) , अर्जुन (नपुं)
शष्पं बालतृणम् घासो यवसं तृणमर्जुनम्॥ २.४.४३१ ॥
नूतनतृणम्. (2) - शष्प (नपुं) , बालतृण (नपुं) ; गवादिभक्ष्यतृणम्. (2) - घास (पुं) , यवस (नपुं) ; तृणम्. (2) - तृण (नपुं) , अर्जुन (नपुं)
तृणसमूहः. (1) - तृण्या (स्त्री) ; नडसमूहः. (1) - नड्या (स्त्री)
तृणानां संहतिस्तृण्या नड्या तु नडसंहतिः॥ २.४.४३२ ॥
तृणसमूहः. (1) - तृण्या (स्त्री) ; नडसमूहः. (1) - नड्या (स्त्री)
तालवृक्षः. (2) - तृणराजाह्वय (पुं) , ताल (पुं) ; नालिकेरः. (2) - नालिकेर (पुं) , लाङ्गली (स्त्री)
तृणराजाह्वयस्तालो नालिकेरस्तु लाङ्गली॥ २.४.४३३ ॥
तालवृक्षः. (2) - तृणराजाह्वय (पुं) , ताल (पुं) ; नालिकेरः. (2) - नालिकेर (पुं) , लाङ्गली (स्त्री)
क्रमुकवृक्षः. (5) - घोण्टा (स्त्री) , पूग (पुं) , क्रमुक (पुं) , गुवाक (पुं) , खपुर (पुं)
घोण्टा तु पूगः क्रमुको गुवाकः खपुरोऽस्य तु॥ २.४.४३४ ॥
क्रमुकवृक्षः. (5) - घोण्टा (स्त्री) , पूग (पुं) , क्रमुक (पुं) , गुवाक (पुं) , खपुर (पुं)
क्रमुकफलम्. (1) - उद्वेग (नपुं) ; तालभेदः. (1) - हिन्ताल (पुं)
फलमुद्वेगमेते च हिन्तालसहितास्त्रयः॥ २.४.४३५ ॥
क्रमुकफलम्. (1) - उद्वेग (नपुं) ; तालभेदः. (1) - हिन्ताल (पुं)
खर्जुरवृक्षः. (1) - खर्जूर (पुं) ; केतकवृक्षः. (1) - केतकी (स्त्री) ; तालभेदः. (1) - ताली (स्त्री) ; खर्जुरभेदः. (1) - खर्जुरी (स्त्री)
खर्जूरः केतकी ताली खर्जुरी च तृणद्रुमाः ॥ २.४.४३६ ॥
खर्जुरवृक्षः. (1) - खर्जूर (पुं) ; केतकवृक्षः. (1) - केतकी (स्त्री) ; तालभेदः. (1) - ताली (स्त्री) ; खर्जुरभेदः. (1) - खर्जुरी (स्त्री)

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